परिचय
भारत का पोल्ट्री उद्योग अंडे और मांस के लिए मुर्गियाँ और बत्तखें पालता है, और इसके साथ हैचरी, आहार कारखाने और बाज़ार भी इसी में आते हैं। 2024-25 में इसने 149.11 अरब अंडे और 51.8 लाख टन कुक्कुट मांस का उत्पादन किया, जिससे भारत अंडा उत्पादन में विश्व में दूसरे स्थान पर है। इसका संगठन मुख्यतः निजी एकीकरणकर्ता कंपनियाँ संविदा कृषि के माध्यम से करती हैं।
भारत का पोल्ट्री उद्योग: आकार, उत्पादन और मूल्य
आज का कुक्कुट क्षेत्र: पक्षी, अंडे और चिकन मांस
मुर्गियों और कुछ बत्तखों को अंडे तथा मांस के लिए पालना, और इस काम के लिए चूज़े, आहार, दवाएँ तथा बाज़ार उपलब्ध कराने वाला पूरा तंत्र मिलकर कुक्कुट उद्योग (poultry industry) कहलाता है। इसका आकार दो तरह से मापा जाता है। पक्षियों की संख्या हर पाँच वर्ष में पशुधन गणना से मिलती है, जबकि अंडे और मांस का वार्षिक उत्पादन पशुपालन एवं डेयरी विभाग का एकीकृत प्रतिदर्श सर्वेक्षण आँकता है।
- पक्षी: 2019 की 20वीं पशुधन गणना में 85.18 करोड़ कुक्कुट पक्षी गिने गए, जो पिछली गणना से 16.81 प्रतिशत अधिक थे। 21वीं पशुधन गणना 25 अक्टूबर 2024 को शुरू हुई।
- अंडे: 2024-25 में उत्पादन 149.11 अरब तक पहुँचा, जो एक वर्ष में 4.44 प्रतिशत अधिक था। इसका अर्थ है प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 106 अंडे।
- मांस: 2024-25 में कुक्कुट मांस का उत्पादन 3.10 प्रतिशत बढ़कर 51.8 लाख टन हुआ। देश के कुल 1.05 करोड़ टन मांस में इसकी हिस्सेदारी लगभग आधी है।
- क्षेत्र: आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना मिलकर देश के लगभग आधे अंडे देते हैं, और दस राज्यों में कुल कुक्कुट पक्षियों का लगभग 78 प्रतिशत है।
यह उद्योग कितनी तेज़ी से बढ़ा, यह लंबी अवधि के आँकड़ों से दिखता है। 2000-01 में अंडा उत्पादन लगभग 37 अरब था और 2012-13 में लगभग 70 अरब; 2022-23 तक यह फिर लगभग दोगुना हो गया। इसी तरह कुक्कुट मांस 2012-13 के लगभग 32 लाख टन से बढ़कर 2022-23 में 49.95 लाख टन हो गया। पिछले एक दशक में यह क्षेत्र हर वर्ष 7 से 10 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। उद्योग की शुरुआत और संकर नस्लों की भूमिका रजत क्रांति के अर्थ और इतिहास (अंग्रेज़ी में) में, तथा राज्यवार स्थिति सबसे अधिक अंडा उत्पादक राज्य (अंग्रेज़ी में) में समझाई गई है।
पशुधन अर्थव्यवस्था में कुक्कुट: उत्पादन का मूल्य
2023-24 में कृषि के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में पशुधन की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत और राष्ट्रीय सकल मूल्य वर्धन में लगभग 5.5 प्रतिशत थी। इसी क्षेत्र में कुक्कुट सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला हिस्सा है। 2023-24 में वर्तमान मूल्यों पर कुक्कुट मांस का मूल्य ₹2,01,669 करोड़ और अंडों का ₹65,808 करोड़ रहा। दुग्ध समूह अब भी कहीं बड़ा है: ₹12,20,986 करोड़, अर्थात् पशुधन उत्पादन के कुल मूल्य का लगभग 64 प्रतिशत।
मांस समूह के भीतर कुक्कुट मांस सबसे बड़ा और सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला खंड है; कुल मांस उत्पादन के मूल्य में इसकी हिस्सेदारी लगभग 42 प्रतिशत है। पशुधन उत्पादन के मूल्य में पूरे मांस समूह की हिस्सेदारी 2014-15 के लगभग 20.7 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 24.8 प्रतिशत हो गई। इस बदलाव के पीछे बढ़ती आय, शहरीकरण और बदलता आहार है, जिनसे पशु-प्रोटीन की माँग बढ़ी। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुमान में कुक्कुट क्षेत्र कृषि उत्पादन में हर वर्ष लगभग ₹1.3 लाख करोड़ जोड़ता है।
कुक्कुट क्षेत्र का संगठन: फार्म, एकीकरणकर्ता और कंपनियाँ
वाणिज्यिक और घरेलू (बैकयार्ड) कुक्कुट पालन की तुलना
भारत में कुक्कुट दो बिल्कुल अलग व्यवस्थाओं में पाले जाते हैं। 1,000 से अधिक पक्षियों वाले फार्म, जहाँ पक्षी शेडों में रहते हैं और तैयार आहार खाते हैं, वाणिज्यिक कुक्कुट कहलाते हैं। इसके विपरीत, ग्रामीण परिवार घर के आसपास जो छोटे झुंड पालते हैं, वे घरेलू कुक्कुट (backyard poultry) हैं। पहला एक व्यवसाय है, जबकि दूसरा गरीब परिवारों के लिए अतिरिक्त आय और भोजन का साधन है। वाणिज्यिक फार्मों में उन्नत नस्लें पाली जाती हैं: अंडों के लिए लेयर और मांस के लिए ब्रॉयलर, जो असील जैसी भारतीय नस्लों और लेगहॉर्न जैसी विदेशी नस्लों के संकरण से तैयार की गई हैं।
| मापदंड | वाणिज्यिक कुक्कुट | घरेलू कुक्कुट |
|---|---|---|
| पक्षी, 2019 की गणना | 53.47 करोड़ | 31.71 करोड़ |
| 2012 की गणना से वृद्धि | 4.50 प्रतिशत | 45.78 प्रतिशत |
| अंडे, 2024-25 | 125.98 अरब (84.49 प्रतिशत) | 23.13 अरब (15.51 प्रतिशत) |
| सभी व्यवस्थाओं में अंडों का स्रोत | उन्नत मुर्गियाँ 86.35 प्रतिशत | देसी मुर्गियाँ 12.59 प्रतिशत |
दोनों व्यवस्थाओं में अंतर केवल आकार का नहीं, गति का भी है। अधिकांश अंडे वाणिज्यिक फार्मों से आते हैं, और सभी अंडों में उन्नत मुर्गियों का हिस्सा 86.35 प्रतिशत है, जबकि देसी मुर्गियों का 12.59 प्रतिशत और बत्तखों का लगभग 1 प्रतिशत। फिर भी 2012 और 2019 की गणनाओं के बीच घरेलू पक्षियों की संख्या कहीं तेज़ी से बढ़ी। राष्ट्रीय पशुधन मिशन इस ग्रामीण पक्ष को सहारा देता है: कम लागत तकनीक वाले, खुले में पाले जा सकने वाले पक्षियों के जनक फार्म, ग्रामीण हैचरी और मदर यूनिट लगाने पर एक बार 50 प्रतिशत पूँजी सहायता, अधिकतम ₹25 लाख। योजनाओं का विवरण कुक्कुट पालन के प्रकार और सरकारी योजनाएँ (अंग्रेज़ी में) में है।
संविदा कृषि और एकीकरणकर्ता: चिकन उद्योग कैसे चलता है
भारत के चिकन उद्योग में संविदा कृषि और ऊर्ध्वाधर एकीकरण व्यापक रूप से प्रचलित हैं। संविदा कृषि (contract farming) में कंपनी चूज़े, आहार जैसे आदान देती है और तैयार उत्पाद वापस ख़रीदती है, जबकि किसान ज़मीन, शेड और श्रम लगाता है। पूरी शृंखला चलाने वाली कंपनी को एकीकरणकर्ता (integrator) कहते हैं, और जनक पक्षियों से लेकर प्रसंस्करण तक हर चरण पर एक ही स्वामित्व ऊर्ध्वाधर एकीकरण (vertical integration) कहलाता है।
- प्रजनक फार्म जनक पक्षी रखते हैं और निषेचित अंडे देते हैं।
- हैचरी इन अंडों को सेती है और एक दिन के चूज़े भेजती है।
- आहार कारखाने मक्का और सोयाबीन खली से हर अवस्था का आहार बनाते हैं।
- अनुबंधित किसान कंपनी के चूज़ों, आहार और पशु-चिकित्सा सहायता से अपने शेड में चूज़े पालते हैं।
- कंपनी बड़े हुए पक्षी ले जाती है और उन्हें जीवित बेचती है या प्रसंस्कृत करके पैकबंद चिकन बनाती है।
इस मॉडल को 1980 के दशक में सुगुणा फ़ूड्स ने खड़ा किया, जिसकी स्थापना 1984 में कोयंबटूर में हुई। उस समय किसान चूज़े, आहार, पशु-चिकित्सा सेवाएँ और अन्य आदान अलग-अलग जुटाते थे। संविदा कृषि में किसान को चूज़े और आहार खुले बाज़ार से ख़रीदने की ज़रूरत नहीं रहती, और वह पक्षी पालने से कमाता है। आज निजी क्षेत्र 8,123 कुक्कुट प्रजनन फार्म चलाता है, जबकि सरकारी विभाग केवल 235।
इस मॉडल की एक क़ीमत भी है। किसान एक ही ख़रीदार पर निर्भर रहता है और शर्तें कंपनी तय करती है। संयुक्त राज्य अमेरिका में, जहाँ लगभग 90 प्रतिशत कुक्कुट उत्पादन ऐसे अनुबंधों से होता है, आलोचकों ने तर्क दिया है कि अनेक अनुबंधित किसान बहुत कम कमाते हैं। भारत में भी उचित शर्तों का प्रश्न उठता है; इसकी चर्चा भारत में कुक्कुट पालन की समस्याएँ (अंग्रेज़ी में) में है।
भारत की प्रमुख पोल्ट्री कंपनियाँ: वेंकीज़, सुगुणा और गोदरेज
कुछ भारतीय पोल्ट्री कंपनियाँ शृंखला का हर चरण स्वयं सँभालकर राष्ट्रीय समूह बन गईं। हर कंपनी की शुरुआत अलग ताक़त से हुई, और इन्हीं से समझ आता है कि भारत का चिकन उद्योग सहकारी समितियों ने नहीं, बल्कि निजी कंपनियों ने खड़ा किया, जबकि डेयरी का विकास सहकारिता से हुआ।
- वेंकटेश्वर हैचरीज़ (VH समूह): 1971 में बंडा वासुदेव राव ने इसकी स्थापना की, जिन्हें अक्सर भारतीय कुक्कुट उद्योग का जनक कहा जाता है। इसकी सूचीबद्ध कंपनी पुणे की वेंकीज़ (इंडिया) लिमिटेड प्रजनन, हैचरी, आहार, रोगाणु-मुक्त (SPF) अंडे, प्रसंस्कृत चिकन और पशु-स्वास्थ्य उत्पादों का काम करती है।
- सुगुणा फ़ूड्स: 1984 में बी. सौंदरराजन और जी. बी. सुंदरराजन ने कोयंबटूर में इसकी स्थापना की। इसने संविदा कृषि को देश भर में फैलाया और प्रजनन, हैचरी, आहार कारखानों तथा प्रसंस्करण का काम करती है; बांग्लादेश, श्रीलंका और केन्या में भी इसका कारोबार है।
- गोदरेज एग्रोवेट: गोदरेज समूह की आहार और कृषि-व्यवसाय कंपनी। 2008 में अमेरिका की टायसन फ़ूड्स के साथ बना इसका संयुक्त उद्यम स्वचालित फार्म चलाता है और पैकबंद चिकन बेचता है।
बी. वी. राव ने 1982 में राष्ट्रीय अंडा समन्वय समिति (NECC) की स्थापना भी की, जो किसानों का एक न्यास है और अंडों के सांकेतिक दाम तय करता है। 1990 में उन्हें पद्म श्री मिला। उनकी यात्रा उद्योग के दोनों पहलू दिखाती है: चूज़े और आहार बेचने वाली कंपनी, और अंडों के उचित दाम के लिए लड़ने वाला किसानों का संगठन।
भारत में पोल्ट्री बाज़ार: अंडों के दाम, जीवित पक्षी और प्रसंस्करण
अंडों के दाम और राष्ट्रीय अंडा समन्वय समिति
पोल्ट्री बाज़ार दो ऐसे उत्पाद बेचता है, जिनका स्वभाव अलग है। अंडे कुछ समय तक टिकते हैं और एक राज्य से दूसरे राज्य तक जाते हैं, जबकि ब्रॉयलर चार से छह सप्ताह की आयु में वध-योग्य वज़न पर पहुँचते ही बेच दिए जाते हैं। इसलिए अंडों के दाम के लिए अलग-अलग उत्पादन केंद्रों में एक साझा संदर्भ चाहिए, और यह संदर्भ किसानों की एक संस्था देती है।
1980 के दशक के आरंभ में अंडों का दाम उत्पादन लागत से नीचे गिर गया और अनेक किसानों ने काम बंद कर दिया। किसानों के एक समूह ने देश भर में घूमकर 300 से अधिक बैठकें कीं, और मई 1982 में NECC एक न्यास के रूप में पंजीकृत हुआ; इसने 14 मई 1982 से अंडों के दाम घोषित करने शुरू किए। आज यह देश के विभिन्न उत्पादन केंद्रों के लिए दैनिक और मासिक औसत दाम प्रकाशित करता है। ये दाम व्यापारियों के लिए संदर्भ हैं, बाध्यकारी आदेश नहीं, और समिति के 35,000 से अधिक सदस्य हैं।
जीवित पक्षी बाज़ार, प्रसंस्कृत चिकन और शीत शृंखला
भारत में चिकन ख़रीदार तक दो रूपों में पहुँचता है: जीवित पक्षी के रूप में, जिसका व्यापार जीवित पक्षी बाज़ारों (live bird markets) और वहीं वध करने वाली दुकानों से होता है, या प्रसंस्कृत मांस के रूप में। जीवित पक्षियों के व्यापार को प्रशीतन की ज़रूरत नहीं होती, किन्तु इसकी क़ीमत स्वच्छता और रोग के जोखिम के रूप में चुकानी पड़ती है। 2024 की कुक्कुट रोग कार्य योजना जीवित पक्षी बाज़ारों में H9N2 जैसे एवियन इन्फ़्लुएंज़ा वायरस मिलने की बात कहती है और इनके लिए जैव-सुरक्षा नियम तय करती है।
शहर इन बाज़ारों को आधुनिक बनाने का प्रयास कर रहे हैं। दिल्ली में ग़ाज़ीपुर के पास लगभग 15 एकड़ में ₹193.29 करोड़ की लागत से नया पोल्ट्री बाज़ार बन रहा है, जिसमें 100 थोक व्यापारियों और 120 प्रसंस्करण इकाइयों के लिए दुकानें होंगी; इसका निर्माण मार्च 2019 में शुरू हुआ और अगस्त 2026 तक लगभग 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था। साफ़ करके, काटकर, ठंडा या जमाकर बेचा जाने वाला प्रसंस्कृत चिकन नया खंड है, जो वेंकीज़, सुगुणा के डेल्फ़्रेज़ और गोदरेज टायसन जैसे ब्रांडों से बिकता है।
- शीत शृंखला: ठंडे और जमे चिकन को कारखाने से दुकान तक हर चरण पर प्रशीतित परिवहन और भंडारण चाहिए।
- ख़रीदार की आदत: जो ख़रीदार जीवित पक्षी चुनने का आदी है, उसे पैकेट पर भरोसा दिलाना पड़ता है।
- बिखरी आपूर्ति: लाखों छोटे फार्मों के कारण गुणवत्ता नियंत्रण और स्रोत का पता लगाना कठिन है।
- ऑनलाइन बिक्री: ऑनलाइन ऑर्डर और ऐप आधारित डिलीवरी प्रसंस्करणकर्ता को सीधे शहरी ख़रीदार से जोड़ सकती है, पर केवल वहीं जहाँ शीत शृंखला पहले से मौजूद हो।
भारत से कुक्कुट निर्यात और वैश्विक तुलना
कुक्कुट निर्यात, और भारत से सबसे अधिक कौन-सा मांस निर्यात होता है
घरेलू बाज़ार की तुलना में भारत का कुक्कुट निर्यात छोटा है, किन्तु बढ़ रहा है। इसका मूल्य 2012-13 के लगभग 6 करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2022-23 में 13.4 करोड़ और 2023-24 में 18.3 करोड़ डॉलर हो गया, अर्थात् एक ही वर्ष में लगभग 41 प्रतिशत की वृद्धि। 2023-24 में भारत ने 64 देशों को कुक्कुट उत्पाद भेजे; प्रमुख गंतव्य ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, मालदीव और जापान थे। निर्यात में मुख्यतः सेने योग्य अंडे, खाने के अंडे और ग्रैंडपेरेंट चूज़े शामिल थे।
बर्ड फ़्लू निर्यात की एक बाधा है, क्योंकि एक प्रकोप से निर्यात बाज़ार बंद हो सकते हैं। भारत इसका उत्तर कम्पार्टमेंटलाइज़ेशन (compartmentalisation) से देता है। इसमें एक ही कड़े जैव-सुरक्षा तंत्र के अधीन फार्मों के समूह को एवियन इन्फ़्लुएंज़ा से मुक्त घोषित किया जाता है, ताकि देश में कहीं और रोग फैलने पर भी वह समूह निर्यात कर सके। भारत के ऐसे 32 कम्पार्टमेंट थे, जिनकी स्व-घोषणा विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) में की गई।
रुपयों में देखें, तो 2024-25 में अंडों और अंडा उत्पादों से ₹1,308 करोड़ की कमाई हुई, जिसे आधिकारिक आँकड़े ठहराव बताते हैं। कुक्कुट मांस का निर्यात और भी कम, लगभग ₹112 करोड़ रहा। भारत के मांस निर्यात में सबसे आगे एक अलग पशु है: जमा हुआ भैंस का मांस, जो पशुधन निर्यात की सबसे बड़ी एकल वस्तु है और जिससे 2024-25 में ₹31,074 करोड़ मिले। अतः यदि पूछा जाए कि भारत से सबसे अधिक कौन-सा मांस निर्यात होता है, तो उत्तर भैंस का मांस है, चिकन नहीं।
चीन, अमेरिका और ब्राज़ील की तुलना में भारत
पृथ्वी पर सबसे अधिक संख्या वाला पशुधन कुक्कुट ही है। विश्व में मुर्गियों की संख्या लगभग 27 अरब है, जो कुल पशुधन का लगभग 78 प्रतिशत है; 2016 से 2023 के बीच वैश्विक कुक्कुट संख्या 19.5 प्रतिशत बढ़कर 29.12 अरब हो गई। इसी अवधि में विश्व का अंडा उत्पादन 8.06 करोड़ टन से बढ़कर 9.741 करोड़ टन हो गया।
अंडों में भारत की स्थिति मज़बूत है, जबकि मांस में साधारण। 2023 में विश्व के अंडा उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत, भारत की 8 प्रतिशत, अमेरिका और इंडोनेशिया की 7-7 प्रतिशत तथा ब्राज़ील की 3 प्रतिशत थी। 2016 से 2023 के बीच भारत का अंडा उत्पादन 72 प्रतिशत और इंडोनेशिया का 275 प्रतिशत बढ़ा। कुल मांस उत्पादन में भारत लगभग 3 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ चौथे स्थान पर है, चीन, अमेरिका और ब्राज़ील के बाद।
पोल्ट्री और डेयरी: भारत के दो पशुधन उद्योगों की तुलना
उत्पादन, संगठन और आहार में पोल्ट्री और डेयरी का अंतर
पोल्ट्री और डेयरी भारत के दो सबसे बड़े पशुधन उद्योग हैं, किन्तु दोनों का विकास उलटे रास्तों से हुआ। डेयरी छोटे किसानों की सहकारी समितियों के माध्यम से ऑपरेशन फ़्लड और अमूल मॉडल (अंग्रेज़ी में) के सहारे बढ़ी, जबकि पोल्ट्री निजी कंपनियों और संविदा कृषि से। इसी अंतर से तय होता है कि उद्योग का स्वामित्व किसके पास है और उसके जोखिम कौन उठाता है।
| विशेषता | डेयरी | पोल्ट्री |
|---|---|---|
| विश्व में स्थान | दूध में पहला | अंडों में दूसरा, कुक्कुट मांस में पाँचवाँ |
| उत्पादन, 2024-25 | 2,478.7 लाख टन दूध | 149.11 अरब अंडे, 51.8 लाख टन मांस |
| प्रति व्यक्ति | प्रतिदिन 485 ग्राम दूध | प्रति वर्ष 106 अंडे |
| उत्पादन का मूल्य, 2023-24 | ₹12,20,986 करोड़ (दुग्ध समूह) | मांस ₹2,01,669 करोड़ और अंडे ₹65,808 करोड़ |
| संगठन | सहकारी समितियों पर आधारित (ऑपरेशन फ़्लड, अमूल) | निजी एकीकरणकर्ता और अनुबंधित फार्म |
| पशुओं का आहार | मुख्यतः फ़सल अवशेष और उप-उत्पाद | तैयार आहार; मुख्य अनाज मक्का और सोयाबीन |
नीति के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण पंक्ति आहार वाली है। गाय-भैंस भूसे और फ़सल अवशेष जैसी वे चीज़ें खाती हैं जिन्हें मनुष्य नहीं खाते, इसलिए डेयरी भोजन से बहुत कम प्रतिस्पर्धा करती है। वाणिज्यिक कुक्कुट अनाज खाते हैं, अतः मक्का या सोयाबीन महँगा होते ही उनकी लागत बढ़ जाती है। बदले में ब्रॉयलर, गोमांस के लिए पाले जाने वाले मवेशियों की तुलना में आहार को कहीं अधिक कुशलता से मांस में बदलता है और चार से छह सप्ताह में वध-योग्य हो जाता है। इसी कारण संकर नस्लें और आहार कारखाने आते ही पोल्ट्री तेज़ी से फैली। दूध की सहकारी कहानी भारत में श्वेत क्रांति (अंग्रेज़ी में) में है।
पोल्ट्री उद्योग की चुनौतियाँ: आहार, रोग और रोज़गार
आहार की लागत, बर्ड फ़्लू और कुक्कुट क्षेत्र में रोज़गार
वाणिज्यिक कुक्कुट ख़रीदे गए आहार पर चलता है, और आहार के दो सबसे महत्त्वपूर्ण अनाज मक्का और सोयाबीन हैं। मक्का अब ईंधन की फ़सल भी है। अगस्त 2026 में सरकार ने बताया कि देश में बनने वाले एथनॉल का लगभग तीन-चौथाई अब अनाज से, मुख्यतः मक्का से, बनता है, क्योंकि पेट्रोल में एथनॉल मिलाया जा रहा है। मक्का के निर्यात से होने वाली कमाई घटी है और भारत हाल में मक्का का शुद्ध आयातक बन गया, इसलिए कुक्कुट किसान एक ही अनाज के लिए आसवनियों से प्रतिस्पर्धा करते हैं।
दूसरा दबाव रोग का है। अत्यधिक रोगजनक बर्ड फ़्लू का प्रकोप होने पर संक्रमित और आसपास के पक्षियों को मारना पड़ता है, आवाजाही पर रोक लगती है और निर्यात बाज़ार बंद हो सकते हैं; प्रकोप पर नियंत्रण भारत में कुक्कुट रोग और बर्ड फ़्लू (अंग्रेज़ी में) में समझाया गया है। तीसरा दबाव बड़े फार्मों के पर्यावरणीय प्रभाव का है, खाद से लेकर अमोनिया तक, जिसकी चर्चा मुर्गी की खाद और संधारणीय कुक्कुट पालन में है।
इन दबावों के सामने उद्योग का सबसे बड़ा मूल्य रोज़गार है। घरेलू झुंड के लिए कम ज़मीन और कम पूँजी चाहिए, इसलिए यह भूमिहीन और छोटे परिवारों के अनुकूल है। महाराष्ट्र विधानसभा ने 2026 में महिला किसानों को मान्यता देने वाला विधेयक पारित किया, जिसमें कुक्कुट पालन से जुड़ी महिलाओं को भी गिना गया है; ग्रामीण महिलाओं के काम में हाल की कुछ वृद्धि भी अधिक आयु की महिलाओं के पशुपालन और कुक्कुट पालन अपनाने से आई है।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के विगत वर्षों के प्रश्न
विगत वर्षों के प्रश्न: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा इस लेख को पढ़ने के बाद आप यूपीएससी के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिख सकेंगे। हर प्रश्न के साथ एक खुलने वाली रूपरेखा है, जो बताती है कि परीक्षा में उसे कैसे हल करें।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2015, सामान्य अध्ययन-IIIग्रामीण क्षेत्रों में कृषीतर रोज़गार और आय का प्रबन्ध करने में पशुधन पालन की बड़ी संभाव्यता है। भारत में इस क्षेत्रक की प्रोन्नति करने के उपयुक्त उपाय सुझाते हुए चर्चा कीजिए।
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: 2023-24 में कृषि के सकल मूल्य वर्धन में पशुधन की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत थी; 2024-25 में 149.11 अरब अंडों और 51.8 लाख टन मांस के साथ कुक्कुट दिखाता है कि पशुधन पालन एक उद्योग की तरह बढ़ सकता है।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- संभावना: कम ज़मीन और पूँजी; जल्दी आय (ब्रॉयलर चार से छह सप्ताह में बिकने योग्य); महिलाओं के लिए काम; 2012 से 2019 के बीच घरेलू पक्षियों में 45.78 प्रतिशत वृद्धि।
- रोज़गार के रूप: घरेलू झुंड, एकीकरणकर्ताओं के लिए संविदा कृषि, हैचरी, आहार कारखाने, परिवहन, प्रसंस्करण और खुदरा व्यापार।
- आदान से जुड़े उपाय: घरेलू झुंडों के लिए उन्नत पक्षी (राष्ट्रीय पशुधन मिशन); मक्का के एथनॉल में जाने के दौर में आहार-अनाज की आपूर्ति; पशु-चिकित्सा सेवा।
- बाज़ार से जुड़े उपाय: शीत शृंखला और प्रसंस्करण; आधुनिक पोल्ट्री बाज़ार; अनुबंध की उचित शर्तें; रोग-मुक्त कम्पार्टमेंट से निर्यात।
- जोखिम और संस्थाएँ: बीमा, ऋण, डेयरी की तरह उत्पादक समूह और सहकारी समितियाँ, महिला पशुपालकों को मान्यता।
निष्कर्ष: निष्कर्ष में लिखें कि पशुधन पालन ग्रामीण श्रम को तभी अपना पाएगा जब छोटे उत्पादकों को आदान, बाज़ार और दाम तथा रोग के झटकों से सुरक्षा मिले, जैसा कुक्कुट का मिला-जुला अनुभव दिखाता है।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2005 (हिंदी रूपांतर)सूची-I (विशिष्ट व्यक्ति) को सूची-II (कार्य क्षेत्र) से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए। सूची-II: 1. मोटरगाड़ी निर्माण, 2. मात्स्यिकी अर्थशास्त्र, 3. सूचना प्रौद्योगिकी और सॉफ़्टवेयर, 4. कुक्कुट पालन, 5. प्रबंध विज्ञान।
- (A) बी. वी. राव
- (B) सी. के. प्रह्लाद
- (C) जॉन कुरियन
- (D) किरण कर्णिक
सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: चरण 1: बी. वी. राव ने VH समूह (वेंकीज़) और NECC की स्थापना की, अतः A का मिलान 4, कुक्कुट पालन, से होगा। केवल विकल्प (b) और (d) में A के सामने 4 है। चरण 2: सी. के. प्रह्लाद अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय में व्यवसाय-प्रबंधन के प्रोफ़ेसर और प्रबंध-चिंतक थे, अतः B का मिलान 5, प्रबंध विज्ञान, से होगा। चरण 3: इससे (b) हट जाता है, जिसमें B को सूचना प्रौद्योगिकी से जोड़ा गया है। चरण 4: (d) में किरण कर्णिक सूचना प्रौद्योगिकी और सॉफ़्टवेयर से जुड़े हैं, जिस आउटसोर्सिंग उद्योग के लिए वे जाने जाते हैं, और जॉन कुरियन मात्स्यिकी अर्थशास्त्र से।
इस भ्रम से बचें: कुरियन नाम डेयरी में प्रसिद्ध है (वर्गीज़ कुरियन), इसलिए जल्दबाज़ी में पाठक डेयरी वाला विकल्प खोज सकता है; इस प्रश्न के जॉन कुरियन मात्स्यिकी अर्थशास्त्री हैं, और डेयरी का कोई विकल्प दिया ही नहीं गया।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) A-2 B-5 C-1 D-3: गलत। बी. वी. राव कुक्कुट पालन (4) से जुड़े हैं, मात्स्यिकी से नहीं।
- (b) A-4 B-3 C-2 D-5: गलत। प्रह्लाद प्रबंध विज्ञान (5) से जुड़े हैं, सूचना प्रौद्योगिकी से नहीं।
- (c) A-2 B-3 C-1 D-5: गलत। राव कुक्कुट से और प्रह्लाद प्रबंधन से जुड़े हैं; यहाँ दोनों मिलान गलत हैं।
- (d) A-4 B-5 C-2 D-3: सही। राव कुक्कुट, प्रह्लाद प्रबंध विज्ञान, कुरियन मात्स्यिकी, कर्णिक सूचना प्रौद्योगिकी।
उत्तर: A-4 B-5 C-2 D-3: विकल्प (d), क्योंकि बी. वी. राव ने कुक्कुट उद्योग खड़ा किया और प्रह्लाद प्रबंध-चिंतक थे।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2015, सामान्य अध्ययन-IIIभारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का विकास करने की राह में विपणन और पूर्ति शृंखला प्रबंधन में क्या बाधाएँ हैं? क्या इन बाधाओं पर काबू पाने में ई-वाणिज्य सहायक हो सकता है?
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: खाद्य प्रसंस्करण जल्दी खराब होने वाली कृषि उपज को टिकाऊ और दूर तक जाने योग्य उत्पाद बनाता है; इसका विकास खेत और ख़रीदार के बीच की शृंखला पर निर्भर है।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- आपूर्ति शृंखला: शीत शृंखला और भंडारण की कमी, इसलिए ठंडे या जमे उत्पाद दूर नहीं जा पाते।
- बिखरी आपूर्ति: लाखों छोटे उत्पादकों के कारण गुणवत्ता, श्रेणीकरण और स्रोत का पता लगाना कठिन।
- बाज़ार की संरचना: जीवित पक्षी बाज़ार और अनेक बिचौलिये; ताज़ा, अप्रसंस्कृत भोजन की पसंद।
- जोखिम: रोग का प्रकोप और जल्दी खराब होना (ब्रॉयलर चार से छह सप्ताह में बेचे जाते हैं)।
- ई-वाणिज्य कहाँ मदद करता है: प्रसंस्करणकर्ता से शहरी ख़रीदार तक सीधा संपर्क, मूल्य-खोज, ब्रांड, कम बिचौलिये।
- ई-वाणिज्य क्या नहीं सुधार सकता: भौतिक परिवहन, प्रशीतन, ग्रामीण इंटरनेट की कमी, स्रोत पर खाद्य सुरक्षा।
निष्कर्ष: निष्कर्ष में लिखें कि ई-वाणिज्य विपणन का औज़ार है, जो शीत शृंखला और संगठित आपूर्ति के ऊपर ही काम करता है; अतः पहले परिवहन और भंडारण में निवेश ज़रूरी है।
स्रोत
- NCERT: Science, Class IX, Chapter 15, Improvement in Food Resources (poultry farming)
- Department of Animal Husbandry and Dairying: Basic Animal Husbandry Statistics 2025
- Department of Animal Husbandry and Dairying: Poultry Disease Action Plan 2024
- Department of Animal Husbandry and Dairying: 20th Livestock Census 2019, key results
- Press Information Bureau: 21st Livestock Census
- Wikipedia: Suguna Foods
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- Wikipedia: National Egg Coordination Committee
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- Wikipedia: Compound feed
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- Wikipedia: Feed conversion ratio
- Department of Animal Husbandry and Dairying: National Livestock Mission guidelines
- Wikipedia: Vertical integration
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- The Hindu (Delhi), 23 June 2026: Unions write to PM against free trade pact with U.S.
- The Hindu (Delhi), 3 July 2026: Maharashtra Bill to recognise women farmers
- The Hindu (Delhi), 25 July 2026: women's work participation and animal husbandry
- The Hindu (Delhi), 4 August 2026: Delhi reviews mandi projects including the Ghazipur poultry market
- The Hindu (Delhi), 18 August 2026: Decoding India's growth in merchandise exports
- The Hindu (Delhi), 22 August 2026: Sugar price hike, Centre says ethanol not to blame
- The Hindu (Delhi), 17 September 2026: What lies beyond India's E20 push
- Wikipedia: C. K. Prahalad
- Wikipedia: Verghese Kurien
- Wikipedia: Poultry farming in India
- Wikipedia: Avian influenza
- Wikipedia: Kiran Karnik
- UPSC: Civil Services Examination question papers
संपादकीय अस्वीकरण
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