परिचय
2026 की विदेश मंत्रियों की बैठक
भारत ने 26 मई 2026 को नई दिल्ली में 11वीं क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक की मेज़बानी की।
क्वाड देश भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका हैं, जो मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत के लिए साझेदार हैं। इनके विदेश मंत्री 26 मई 2026 को 11वीं क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए नई दिल्ली में मिले। बैठक में समुद्री निगरानी, ऊर्जा सुरक्षा और अति आवश्यक खनिजों पर नया काम शुरू हुआ, पर नेताओं के उस शिखर सम्मेलन की तिथि तय नहीं हुई जिसकी मेज़बानी की प्रतीक्षा भारत 2024 से कर रहा है।
क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक 2026, नई दिल्ली: यह चर्चा में क्यों है
11वीं क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक: तिथि, स्थान और मंत्री
मेज़बान विदेश मंत्री एस. जयशंकर थे। अमेरिका से विदेश मंत्री (सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट) मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया से विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान से विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी आए। बैठक के अंत में एक संयुक्त वक्तव्य और एक तथ्य-पत्र (फ़ैक्टशीट) जारी हुआ। उसी दिन दो और दस्तावेज़ आए: क्वाड अति आवश्यक खनिज पहल की रूपरेखा, और हिंद-प्रशांत ऊर्जा सुरक्षा पर क्वाड का वक्तव्य।
बैठक का एजेंडा उस समय की परिस्थितियों से तय हुआ। अमेरिका और इज़राइल 28 फ़रवरी 2026 को ईरान के साथ युद्ध में उतर चुके थे, और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ से पूरे एशिया में तेल और गैस की आपूर्ति पर दबाव था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कुछ ही दिन पहले चीन से लौटे थे। रुबियो की चार दिन की यात्रा जनवरी 2025 में पद संभालने के बाद उनकी पहली भारत यात्रा थी। युद्ध शुरू होने के बाद किसी वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी की भी यह पहली यात्रा थी, और यह भारत-अमेरिका संबंधों के तनाव भरे एक वर्ष के बाद हुई।
बैठक से पहले मोतेगी ने क्वाड को एक "महत्त्वपूर्ण ढाँचा" बताया था और अति आवश्यक खनिजों को एजेंडे में सबसे ऊपर रखा था। मंत्री इससे पहले 1 जुलाई 2025 को वॉशिंगटन डी.सी. में मिले थे, जहाँ क्वाड के काम को चार क्षेत्रों में समेटा गया था। नई दिल्ली की बैठक को यह दिखाना था कि यह समूह अब भी प्रासंगिक है।
2026 की बैठक के परिणाम: समुद्री निगरानी, ऊर्जा, खनिज और बंदरगाह
बैठक में घोषित अधिकतर काम समुद्र और आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़ा व्यावहारिक काम है। नीचे की सूची बैठक के बाद जारी तथ्य-पत्र के क्रम में है।
- हिंद-प्रशांत समुद्री निगरानी सहयोग (IPMSC): एक नई पहल, जिसमें चारों देश अपनी समुद्री निगरानी क्षमता मिलाकर जहाज़ों की वास्तविक समय की जानकारी साझा करेंगे। शुरुआत हिंद महासागर क्षेत्र से होगी।
- IPMDA का विस्तार: मंत्रियों ने गुरुग्राम स्थित सूचना संलयन केंद्र के माध्यम से समुद्री क्षेत्र जागरूकता के लिए हिंद-प्रशांत साझेदारी (IPMDA) के हिंद महासागर कार्यक्रम को भारत द्वारा चालू किए जाने का स्वागत किया, और पूरे हिंद-प्रशांत के लिए एक साझा परिचालन चित्र बनाने पर सहमति दी।
- भारत में क्वाड-एट-सी: अगला क्वाड-एट-सी शिप ऑब्ज़र्वर मिशन भारत आयोजित करेगा। इसमें चारों देशों के तटरक्षक एक ही जहाज़ पर साथ आते हैं। पहला मिशन जुलाई 2025 में पलाऊ से गुआम तक गया था।
- अति आवश्यक खनिज: एक रूपरेखा, जिसके अंतर्गत साझेदार खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र से 20 अरब अमेरिकी डॉलर तक की सहायता जुटाना चाहते हैं।
- ऊर्जा सुरक्षा: हिंद-प्रशांत ऊर्जा सुरक्षा पर क्वाड पहल, जिसमें प्रौद्योगिकी, नीति, बाज़ार विश्लेषण और आपात प्रतिक्रिया अभ्यास शामिल हैं, और उच्च-स्तरीय वार्ता के लिए क्वाड ईंधन सुरक्षा मंच।
- बंदरगाह और केबल: क्वाड फ़िजी सरकार के साथ बंदरगाह अवसंरचना पर काम करेगा। उसने यह लक्ष्य भी समर्थित किया है कि 2026 तक प्रशांत द्वीप मंच का हर देश समुद्र के नीचे केबल से जुड़ जाए।
- प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य: पलाऊ में ओपन RAN नेटवर्क के लिए विश्वसनीय आपूर्तिकर्ताओं का चयन, 6G मानकों पर साझा काम, AI-ENGAGE के अंतर्गत खेती से जुड़ी छह शोध परियोजनाओं के लिए 60 लाख डॉलर से अधिक, और क्षेत्र भर में स्वास्थ्य प्रशिक्षण, जिसका मूल्य 5 करोड़ डॉलर से अधिक है।
क्वाड संयुक्त वक्तव्य 2026: होर्मुज़, दक्षिण चीन सागर और आतंकवाद
संयुक्त वक्तव्य क्वाड के स्थायी रुख़ से शुरू होता है। हिंद-प्रशांत में शांति अंतरराष्ट्रीय विधि, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, और संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर टिकी है। चारों देश बल या दबाव से यथास्थिति बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध करते हैं।
- पश्चिम एशिया और होर्मुज़: स्थायी शांति के लिए कूटनीति का समर्थन; समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS) के अनुसार होर्मुज़ जलडमरूमध्य और लाल सागर से व्यापार का निर्बाध प्रवाह; व्यापारिक जहाज़ों पर हमलों की निंदा; और गुज़रते जहाज़ों पर किसी भी शुल्क (टोल) का विरोध।
- दक्षिण और पूर्वी चीन सागर: पानी की तोपों के असुरक्षित प्रयोग और विवादित संरचनाओं के सैन्यीकरण जैसी दबाव की कार्रवाइयों पर गंभीर चिंता। दक्षिण चीन सागर पर 2016 के मध्यस्थता निर्णय को विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का आधार बताया गया।
- आतंकवाद: सीमा-पार आतंकवाद की निंदा, जिसमें 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले और 14 दिसंबर 2025 को ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच पर हुए हमले का नाम लिया गया।
- उत्तर कोरिया और म्यांमार: उत्तर कोरिया का पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण, और म्यांमार में हिंसा तुरंत रोकने की माँग।
- ऑनलाइन ठगी केंद्र: दक्षिण-पूर्व एशिया के ऑनलाइन ठगी केंद्रों (स्कैम सेंटर) और उनसे जुड़े अपराधों (जैसे मानव तस्करी और अवैध वित्त) के विरुद्ध विधि-प्रवर्तन सहयोग।
वक्तव्य से यह भी दिखा कि चारों साझेदार अब किन बातों पर साथ नहीं बोल पाते। इसमें युद्ध में ईरान की कार्रवाइयों की आलोचना तो हुई, किंतु यह नहीं कहा गया कि युद्ध अमेरिका और इज़राइल ने शुरू किया। 4 मार्च को अमेरिकी नौसेना द्वारा श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र के पास हिंद महासागर में ईरानी जहाज़ IRIS डेना पर टॉरपीडो हमले का भी उल्लेख नहीं हुआ। चीन और रूस के साथ अमेरिका के नए संवाद ने वक्तव्य की भाषा को सीमित किया प्रतीत होता है।
क्वाड देश क्या है: क्वाड देशों की सूची, पूरा नाम और स्वरूप
क्वाड समूह के सदस्य और क्वाड का पूरा नाम
क्वाड (Quad) चार देशों (भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका) की साझेदारी है। इसका लक्ष्य एक मुक्त और खुला हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र है, जो समृद्ध भी हो और लचीला भी। इसका काम चार स्तंभों पर चलता है: समुद्री और पारराष्ट्रीय सुरक्षा; आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा; महत्त्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियाँ; तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत। यह तीन उप-क्षेत्रों पर केंद्रित है: दक्षिण-पूर्व एशिया, हिंद महासागर क्षेत्र और प्रशांत द्वीप।
पूरे नाम पर विदेश मंत्रालय का संक्षिप्त विवरण स्पष्ट है: इस साझेदारी का औपचारिक नाम "क्वाड" है, क्वाड्रिलैटरल सिक्योरिटी डायलॉग (चतुर्भुजीय सुरक्षा संवाद) नहीं। फिर भी लंबा नाम आम तौर पर प्रयोग होता है, और UPSC ने भी मुख्य परीक्षा 2020 के प्रश्न में यही नाम लिखा था, इसलिए अभ्यर्थी को दोनों नाम पता होने चाहिए।
हर सदस्य अपना क्षेत्रीय काम साथ लाता है। भारत गुरुग्राम में हिंद महासागर क्षेत्र का सूचना संलयन केंद्र चलाता है। जापान ने ऊर्जा और संसाधन लचीलेपन के लिए POWERR Asia नाम की साझेदारी का प्रस्ताव रखा है। ऑस्ट्रेलिया दक्षिण-पूर्व एशिया और प्रशांत में ऊर्जा सुरक्षा पर धन देता है; फ़िजी को 3 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बजट सहायता इसका उदाहरण है। अमेरिका समुद्री निगरानी की तकनीक देता है, जैसे SeaVision सॉफ़्टवेयर, जिसे भारत ने 2025 में ख़रीदा।
क्या क्वाड सैन्य गठबंधन है? क्वाड और ऑकस की तुलना
क्वाड सैन्य गठबंधन नहीं है, क्योंकि यह सामूहिक रक्षा के सिद्धांत पर नहीं टिका: कोई सदस्य दूसरे की रक्षा के लिए वचनबद्ध नहीं। इसका काम नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों की बैठकों से, तथा विशेषज्ञों के संवाद, कार्यशालाओं और टेबल-टॉप अभ्यासों से चलता है। इसके आलोचक भी मानते हैं कि क्वाड स्वयं को सुरक्षा-केंद्रित समूह के रूप में प्रस्तुत करने से हिचकता है, और चीन का नाम नहीं लेता।
चारों देशों की नौसेनाएँ साथ अभ्यास अवश्य करती हैं, पर क्वाड के ढाँचे से बाहर। मालाबार अभ्यास 1992 में मालाबार तट पर भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में शुरू हुआ। जापान 2015 में इसका स्थायी साझेदार बना और ऑस्ट्रेलिया 2020 में फिर जुड़ा, इसलिए अब चारों क्वाड नौसेनाएँ इसमें भाग लेती हैं। सितंबर 2026 में जापान के एक रक्षा अधिकारी ने बताया कि क्वाड देशों का अगला नौसैनिक अभ्यास वर्ष के अंत से पहले जापान सागर के पास होगा।
ऑकस (AUKUS) का स्वरूप अलग है। 15 सितंबर 2021 को घोषित यह ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका की त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी है। इसके पहले स्तंभ के अंतर्गत ऑस्ट्रेलिया को परमाणु-चालित पनडुब्बियाँ मिलेंगी, और दूसरा स्तंभ उन्नत सैन्य क्षमताओं से जुड़ा है। भारत इसका सदस्य नहीं है।
सैन्य गठबंधन से दूर रहना भारत की विदेश नीति की पुरानी परंपरा है। शीत युद्ध के दौरान भारत ने अमेरिका और सोवियत संघ के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधनों (नाटो और वारसा संधि) से दूरी रखी और गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाई। उसने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर स्वतंत्र रुख़ रखा और दोनों गुटों के सदस्यों से सहायता भी पाई। बिना किसी रक्षा वचन के क्वाड में काम करना उसी स्वतंत्रता की निरंतरता है, जिसे आज सामरिक स्वायत्तता कहा जाता है।
| विशेषता | क्वाड | ऑकस (AUKUS) |
|---|---|---|
| सदस्य | भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान, अमेरिका | ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, अमेरिका |
| शुरुआत | 2004 सुनामी राहत; 2007 से अधिकारी; 2021 से नेता | 15 सितंबर 2021 को घोषित |
| स्वरूप | मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत के लिए साझेदारी; सामूहिक रक्षा नहीं | त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी |
| मुख्य काम | चार स्तंभ: समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, आपदा राहत | स्तंभ 1: ऑस्ट्रेलिया के लिए परमाणु-चालित पनडुब्बियाँ; स्तंभ 2: उन्नत क्षमताएँ |
| भारत | संस्थापक सदस्य | सदस्य नहीं |
क्वाड की स्थापना कब हुई: 2004 की सुनामी से शिखर सम्मेलनों तक
क्वाड का विकास: पुनरुद्धार, क्वाड प्लस देश और शिखर सम्मेलन
चारों देश पहली बार 2004 की हिंद महासागर सुनामी के बाद राहत कार्य में तालमेल के लिए साथ आए। क्वाड अधिकारियों की पहली बैठक मई 2007 में फ़िलीपींस में आसियान क्षेत्रीय मंच के अवसर पर हुई। इसके बाद यह समूह लगभग एक दशक तक निष्क्रिय रहा।
- नवंबर 2017: दस वर्ष के अंतराल के बाद अधिकारी फिर मनीला में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के अवसर पर मिले, और संपर्क-सुविधा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-विरोधी सहयोग तथा मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत पर चर्चा की।
- सितंबर 2019: विदेश मंत्री पहली बार न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अवसर पर मिले।
- 2020, क्वाड प्लस: कोविड-19 महामारी के दौरान ब्राज़ील, इज़राइल, न्यूज़ीलैंड, दक्षिण कोरिया और वियतनाम को उससे निपटने पर “क्वाड प्लस” बैठकों में बुलाया गया।
- 12 मार्च 2021: वर्चुअल शिखर सम्मेलन के साथ क्वाड नेताओं के स्तर तक पहुँचा; पहला प्रत्यक्ष शिखर सम्मेलन 24 सितंबर 2021 को वॉशिंगटन डी.सी. में हुआ।
- 2022 से 2024: तोक्यो (24 मई 2022), हिरोशिमा (20 मई 2023) और विलमिंगटन (21 सितंबर 2024) में शिखर सम्मेलन। IPMDA 2022 में शुरू हुई, और क्वाड कैंसर मूनशॉट पर विलमिंगटन में सहमति बनी।
इसलिए "क्वाड की स्थापना किस वर्ष हुई" का उत्तर इस पर निर्भर है कि गिना क्या जा रहा है: पहला तालमेल 2004 में, पहली बैठक 2007 में, पुनरुद्धार 2017 में, और नेताओं का स्तर 2021 में। चार्ट यह भी दिखाता है कि अब मंदी की बात क्यों होती है: सितंबर 2024 के बाद नेता नहीं मिले, जबकि मंत्रियों की बैठकें चलती रहीं।
क्वाड शिखर सम्मेलन और विदेश मंत्रियों की बैठकें: पूरी सूची
| स्तर | बैठक | तिथि और स्थान |
|---|---|---|
| नेता | पहला (वर्चुअल) | 12 मार्च 2021 |
| नेता | दूसरा | 24 सितंबर 2021, वॉशिंगटन डी.सी. |
| नेता | तीसरा (वर्चुअल) | 3 मार्च 2022 |
| नेता | चौथा | 24 मई 2022, तोक्यो |
| नेता | पाँचवाँ | 20 मई 2023, हिरोशिमा |
| नेता | छठा | 21 सितंबर 2024, विलमिंगटन |
| विदेश मंत्री | पहली से पाँचवीं | न्यूयॉर्क 2019; तोक्यो 2020; वर्चुअल 2021; मेलबर्न और न्यूयॉर्क 2022 |
| विदेश मंत्री | छठी से आठवीं | नई दिल्ली, 3 मार्च 2023; न्यूयॉर्क 2023; तोक्यो, 29 जुलाई 2024 |
| विदेश मंत्री | नौवीं और दसवीं | वॉशिंगटन डी.सी., 21 जनवरी और 1 जुलाई 2025 |
| विदेश मंत्री | 11वीं | नई दिल्ली, 26 मई 2026 |
तालिका में दो बातें साफ़ दिखती हैं। भारत ने मंत्रियों की मेज़बानी दो बार की, 2023 और 2026 में, पर नेताओं की मेज़बानी कभी नहीं। दूसरी बात, 2021 से पहले विदेश मंत्री लगभग वर्ष में एक बार मिलते थे, जबकि अब समूह का काम उन्हीं के कंधों पर है: जनवरी 2025 से मई 2026 के बीच उनकी तीन बैठकों को मंत्रालय ने बढ़ती गति का संकेत बताया।
मंत्री जुलाई 2026 में एक बार फिर मनीला में 59वीं आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक के अवसर पर मिले। आसियान के व्यापक रणनीतिक साझेदारों के रूप में उन्होंने मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत तथा आसियान की एकता और केंद्रीयता के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
क्वाड शिखर सम्मेलन 2026: भारत मेज़बानी क्यों नहीं कर पाया
भारत की क्वाड अध्यक्षता और रुका हुआ शिखर सम्मेलन
भारत ने 2024 में क्वाड की अध्यक्षता सँभाली, पर तब से भारत में कोई शिखर सम्मेलन नहीं हुआ। 2024 में अमेरिका के साथ तनाव के कारण बैठक टली और शिखर सम्मेलन अमेरिका में, विलमिंगटन में, हुआ। 2025 में शुल्क, प्रतिबंध, व्यापार और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अमेरिकी दावों पर विवादों के कारण राष्ट्रपति ट्रंप और अन्य नेताओं की दिल्ली यात्रा नहीं हो सकी।
मई 2026 की नई दिल्ली बैठक भी यह प्रश्न हल नहीं कर पाई। मंत्रियों ने केवल इतना कहा कि वे अगले शिखर सम्मेलन की प्रतीक्षा में हैं, और मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि नेताओं का कार्यक्रम तय करना हमेशा कठिन होता है। सूत्रों के अनुसार भारत द्वारा अध्यक्षता सौंपने पर अगली मंत्रिस्तरीय बैठक ऑस्ट्रेलिया में होगी, और शिखर सम्मेलन किसी अन्य बहुपक्षीय बैठक के अवसर पर हो सकता है। यह पूछे जाने पर कि क्या यह स्तर घटाना है, पेनी वोंग ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में होने वाली किसी भी बैठक को स्तर घटाना कहे जाने पर उन्हें आपत्ति होगी।
अमेरिकी नीति, चीन और क्वाड के भविष्य पर बहस
क्वाड पर संदेह मुख्यतः वॉशिंगटन से आते हैं। नवंबर 2025 की अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति पश्चिमी गोलार्ध को हिंद-प्रशांत से ऊपर रखती है और क्वाड का केवल चलते-चलते उल्लेख करती है। मई 2026 की जापान की अद्यतन "मुक्त और खुला हिंद-प्रशांत" नीति में क्वाड का नाम केवल एक बार, खनिजों के संदर्भ में, आता है। मई 2026 में ट्रंप की बीजिंग यात्रा और शी जिनपिंग की प्रस्तावित वॉशिंगटन यात्रा बताती हैं कि अमेरिका चीन के साथ संबंध सहज रखना चाहता है।
चीन ने क्वाड का हमेशा विरोध किया है, उसे "एक्सक्लूसिव क्लीक" (बंद गुट) कहकर, या व्यंग्य में "समुद्र का झाग" कहकर। अमेरिका का बीजिंग की ओर झुकाव भारत के सामने एक मूल प्रश्न रखता है: यदि वॉशिंगटन की रुचि घट जाए, तो अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति के इर्द-गिर्द बना यह मंच कितना उपयोगी रहेगा? समर्थकों का उत्तर है कि जलवायु, स्वास्थ्य, ऋण, अवसंरचना और समुद्री सुरक्षा पर इसका क्षेत्रीय काम अब भी भलाई का साधन है।
- परामर्श का अभाव: पश्चिम एशिया के युद्ध से पहले या उसके दौरान साझेदारों से परामर्श नहीं हुआ, जिससे क्वाड की प्रासंगिकता पर प्रश्न उठे।
- भारत-अमेरिका तनाव: अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया, और भारत-पाकिस्तान संघर्ष, वीज़ा तथा आप्रवासन पर मतभेदों ने 2025 और 2026 में संबंधों की गति धीमी की।
- भारत का अपना संतुलन: जयशंकर के अनुसार भारत उन बहुत कम देशों में है जिनके अमेरिका, इज़राइल, ईरान और खाड़ी देशों, सभी से एक साथ मज़बूत संबंध हैं। जुलाई 2026 में मनीला में उन्होंने चीन के वांग यी से कहा कि भारत-चीन संबंध एक बहुध्रुवीय एशिया को बढ़ावा देंगे।
क्वाड की प्रमुख पहलें: IPMDA, अति आवश्यक खनिज और क्षेत्रीय हित
IPMDA, सूचना संलयन केंद्र और भारत का SAGAR दृष्टिकोण
समुद्री क्षेत्र जागरूकता के लिए हिंद-प्रशांत साझेदारी (IPMDA) 2022 में क्वाड के अंतर्गत शुरू हुई। यह साझेदार देशों के बीच लगभग वास्तविक समय के समुद्री आँकड़े साझा करती है, ताकि वे जहाज़रानी पर ख़तरों को पहचान सकें, रोक सकें और उनका जवाब दे सकें। समुद्री क्षेत्र जागरूकता का अर्थ है यह जानना कि समुद्र में क्या चल रहा है। यह इसलिए ज़रूरी है कि सैकड़ों जहाज़ अपने स्वचालित पहचान प्रणाली (AIS) ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं, ताकि प्रतिबंधों से बच सकें, माल छिपा सकें या समुद्र में ही एक जहाज़ से दूसरे में माल बदल सकें। इसे "गोइंग डार्क" कहा जाता है।
इस काम के हिंद महासागर वाले हिस्से का केंद्र भारत है। गुरुग्राम स्थित हिंद महासागर क्षेत्र सूचना संलयन केंद्र (IFC-IOR) अब IPMDA का हिंद महासागर कार्यक्रम चलाता है, और भारत ने 2025 में अमेरिका से SeaVision समुद्री सॉफ़्टवेयर ख़रीदा। नई IPMSC पहल IPMDA के व्यावसायिक आँकड़ों में सदस्य देशों की अपनी निगरानी जोड़ती है।
यहीं क्वाड भारत की अपनी समुद्री नीति से जुड़ता है। प्रधानमंत्री मोदी ने 12 मार्च 2015 को मॉरीशस में पहली बार SAGAR (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) का उल्लेख किया था। यह हिंद महासागर में विश्वास, पारदर्शिता और समुद्री नियमों के सम्मान का दृष्टिकोण है। हिंद महासागर भारत की MAHASAGAR समुद्री नीति के भी केंद्र में है। SAGAR भारत का राष्ट्रीय दृष्टिकोण है; IPMDA उसे साझा आँकड़े और साझेदार देती है।
क्वाड जिस दूसरे क्षेत्रीय संगठन का समर्थन करता है, वह हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) है। इसका औपचारिक आरंभ 6 और 7 मार्च 1997 को हुआ और इसका मुख्यालय मॉरीशस के एबेन में है। इसके 23 सदस्य देश हैं और छह प्राथमिक क्षेत्र: समुद्री सुरक्षा, व्यापार और निवेश, मत्स्य प्रबंधन, आपदा जोखिम में कमी, शैक्षिक और वैज्ञानिक सहयोग, तथा पर्यटन और संस्कृति। नीली अर्थव्यवस्था (ब्लू इकॉनमी) इसका एक केंद्रित क्षेत्र है।
क्वाड अति आवश्यक खनिज रूपरेखा, पैक्स सिलिका और भारत की आपूर्ति शृंखला
अति आवश्यक खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) वे धातुएँ हैं जिनके बिना हरित ऊर्जा और उन्नत तकनीक संभव नहीं। 2025 में चीन द्वारा दुर्लभ मृदा तत्त्वों पर निर्यात नियंत्रण लगाने के बाद इनकी आपूर्ति और तंग हुई। 26 मई 2026 की क्वाड रूपरेखा के तीन भाग हैं। पहला, "क्वाड संबंध" वाली परियोजनाओं में निवेश, अर्थात् क्वाड देशों में स्थित, वहाँ मुख्यालय वाली कंपनियों द्वारा चलाई जा रही, या क्वाड बाज़ारों को आपूर्ति करने वाली परियोजनाएँ। दूसरा, अनुमति के बेहतर नियम और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरनाक सौदों की समीक्षा। तीसरा, ई-कचरे और स्क्रैप से इन खनिजों का पुनर्चक्रण।
उसी दिन भारत ने अमेरिका के साथ एक अलग रूपरेखा पर हस्ताक्षर किए, जो अति आवश्यक खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्त्वों के खनन, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और निवेश से जुड़ी है। भारत 20 फ़रवरी 2026 को अमेरिका के नेतृत्व वाली पैक्स सिलिका पहल में शामिल हो चुका था। यह 15 देशों की आर्थिक-सुरक्षा पहल है, जो खनिजों, सेमीकंडक्टर और कंप्यूटिंग को समेटती है। क्वाड के वक्तव्य ने पैक्स सिलिका को सदस्यों की आर्थिक सुरक्षा का एक स्तंभ बताया।
देश के भीतर सरकार ने जुलाई 2023 में 30 अति आवश्यक खनिजों की सूची जारी की, जिसमें लिथियम, कोबाल्ट, निकल और दुर्लभ मृदा तत्त्व शामिल हैं। 2023 में संसद ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में संशोधन किया, ताकि प्रथम अनुसूची के भाग D में दर्ज अति आवश्यक खनिजों की रियायतों की नीलामी केवल केंद्र सरकार करे, जबकि राजस्व राज्य को मिले। भारत को विदेश की ओर भी देखना पड़ता है: उसका संयुक्त उद्यम KABIL विदेश में लिथियम और कोबाल्ट की खनिज परिसंपत्तियाँ हासिल करता है।
देश के भीतर की पूरी तस्वीर, राष्ट्रीय अति आवश्यक खनिज मिशन सहित, भारत की अति आवश्यक खनिज रणनीति (अंग्रेज़ी में) वाले लेख में है।
क्वाड की प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और आपदा राहत पहलें
समुद्र और खनिजों से आगे क्वाड का काम क्षेत्रीय सार्वजनिक हित का है: ऐसी सेवाएँ, जो चारों देश उन छोटे देशों को देते हैं जो इन्हें अकेले नहीं बना सकते। मुख्य परीक्षा 2020 ने क्वाड के इसी पक्ष को ध्यान में रखकर पूछा था कि क्या यह समूह सुरक्षा संवाद से आगे बढ़कर कुछ व्यापक बन रहा है।
- क्वाड कैंसर मूनशॉट: 2024 में सहमति, जिसका लक्ष्य गर्भाशय-ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर का उन्मूलन है; साथ ही क्षेत्र भर में स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशिक्षण, जिसका मूल्य 5 करोड़ डॉलर से अधिक है।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के सिद्धांत: 2024 में स्वीकृत; इसके बाद पलाऊ में ओपन RAN नेटवर्क और 6G मानकों पर साझा काम।
- मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR): पापुआ न्यू गिनी में एंगा भूस्खलन (2024) और म्यांमार भूकंप (2025) पर मिलकर प्रतिक्रिया, जिसके लिए मानक संचालन प्रक्रियाएँ बनाई गईं।
- हिंद-प्रशांत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क: नागरिक आपदा प्रतिक्रिया के लिए साझा रसद; अप्रैल 2025 में टेबल-टॉप अभ्यास और दिसंबर 2025 में फ़ील्ड प्रशिक्षण अभ्यास से परखा गया, और 2026 में जापान में दूसरा टेबल-टॉप अभ्यास होना है।
- AI-ENGAGE: शोध परियोजनाएँ, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और सेंसिंग से किसानों को उपज और कीटों से जुड़ी समस्याओं में मदद देती हैं।
भारत के लिए क्वाड का महत्त्व और उसकी सीमाएँ
भारत की हिंद-प्रशांत रणनीति में क्वाड का महत्त्व
- समुद्री सुरक्षा: क्वाड की हिंद महासागर निगरानी का आधार भारत का अपना सूचना संलयन केंद्र है, और अगला क्वाड-एट-सी मिशन भारत आयोजित करेगा।
- ऊर्जा और व्यापार: होर्मुज़ संकट ने दिखाया कि भारत कितना असुरक्षित है। जयशंकर ने ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता की आवश्यकता बताई; क्वाड की ऊर्जा पहल और शुल्क के विरुद्ध उसका रुख़ इसी आवश्यकता की पूर्ति करते हैं।
- आपूर्ति शृंखला: खनिज रूपरेखा और पैक्स सिलिका भारत को ऐसी आपूर्ति शृंखलाओं से जोड़ते हैं जो किसी एक देश पर निर्भर न हों।
- क्षेत्र में भारत की भूमिका: प्रशांत द्वीपों, आसियान और हिंद महासागर के लिए क्वाड का काम, IORA के साथ मिलकर, भारत की पहचान सुरक्षा और विकास में सहयोगी देश के रूप में बढ़ाता है।
क्वाड की यात्रा मुख्य परीक्षा 2020 के प्रश्न का उत्तर भी देती है। इसकी शुरुआत आपदा राहत और समुद्री सुरक्षा से हुई, और इसका एजेंडा अब खनिज, ऊर्जा, बंदरगाह, केबल और स्वास्थ्य तक फैल गया है। फिर भी यह व्यापार गुट नहीं बना: इसका कोई व्यापार समझौता नहीं, और शुल्क में कोई रियायत नहीं। इसका आर्थिक काम सुरक्षित आपूर्ति शृंखलाओं और निवेश से जुड़ा है। अतः इसे ऐसा समूह कहना अधिक सटीक है जिसने समुद्री सुरक्षा के साथ आर्थिक सुरक्षा भी जोड़ ली है।
चुनौतियाँ: अमेरिका का एकपक्षवाद, चीन और भारत की सामरिक स्वायत्तता
समूह के आंतरिक विरोधाभास, विशेषकर दुनिया भर में अमेरिका के एकतरफ़ा कदम, एक गंभीर चुनौती हैं। नई दिल्ली की बैठक से अच्छी पहलें तो निकलीं, पर चारों देश यह एक स्वर में नहीं कह सके कि पश्चिम एशिया का युद्ध किसने शुरू किया। रुबियो की यात्रा का द्विपक्षीय हिस्सा भी केवल एक उल्लेखनीय समझौते पर रुका, जो अति आवश्यक खनिजों पर था।
- अलग-अलग प्राथमिकताएँ: अमेरिका होर्मुज़ फिर से खुलवाना चाहता है और पाकिस्तान की मध्यस्थता से ईरान से बात कर रहा है; भारत सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति चाहता है; जापान ने अति आवश्यक खनिजों को एजेंडे में सबसे ऊपर रखा।
- शिखर सम्मेलन में ठहराव: भारत में तीन वर्ष से शिखर सम्मेलन नहीं, और यह आशंका कि क्वाड 2021 से पहले वाले केवल-मंत्री स्तर पर लौट जाए।
- चीन: बीजिंग का विरोध और वॉशिंगटन का उसकी ओर झुकाव क्वाड को दो दिशाओं में खींचते हैं। क्वाड चीन का नाम नहीं लेता; इससे छोटे देश सहज रहते हैं, पर समूह का उद्देश्य धुंधला होता है।
भारत ने दूसरे रास्ते भी खुले रखे हैं। सितंबर 2026 में उसने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की, जिसका विवरण ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 और नई दिल्ली घोषणा (अंग्रेज़ी में) वाले लेख में है। दोनों समूहों की सदस्यता ही भारत की बहु-संरेखण (मल्टी-अलाइनमेंट) नीति का व्यवहार है।
UPSC के लिए क्वाड: पाठ्यक्रम से जुड़ाव और परीक्षा दृष्टि
UPSC पाठ्यक्रम में क्वाड: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II और प्रारंभिक परीक्षा
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II: भारत से जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और समझौते; विकसित देशों की नीतियों का भारत के हितों पर प्रभाव (देखें सामान्य अध्ययन II का पाठ्यक्रम (अंग्रेज़ी में))।
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III: सीमा और समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ, IPMDA और सूचना संलयन केंद्र के माध्यम से; अति आवश्यक खनिज और आपूर्ति शृंखलाएँ।
- प्रारंभिक परीक्षा: सदस्य, तिथियाँ और स्थान, चार स्तंभ, IPMDA, IORA, ऑकस और अति आवश्यक खनिजों से जुड़े नियम।
- निबंध और साक्षात्कार: बहु-संरेखण, सामरिक स्वायत्तता और हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका।
विगत वर्षों के प्रश्न: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा इस लेख को पढ़ने के बाद आप यूपीएससी के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिख सकेंगे। हर प्रश्न के साथ एक खुलने वाली रूपरेखा है, जो बताती है कि परीक्षा में उसे कैसे हल करें।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2026, सामान्य अध्ययन-II"आई.पी.एम.डी.ए. (इंडो-पैसिफिक पार्टनरशिप फॉर मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस) के लिए साझेदारी भारत के SAGAR (सेक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन) दृष्टिकोण और क्वाड (Quad) की सामूहिक इंडो-पैसिफिक रणनीति के बीच की खाई को पाटती है।" आई.पी.एम.डी.ए. पर केंद्रित रहते हुए इस कथन का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: IPMDA को 2022 की क्वाड साझेदारी के रूप में प्रस्तुत करें, जो लगभग वास्तविक समय के समुद्री आँकड़े साझा करती है, और SAGAR को 2015 में मॉरीशस में घोषित भारत के हिंद महासागर दृष्टिकोण के रूप में।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- पुल का राष्ट्रीय छोर: SAGAR के विश्वास और समुद्री नियमों के सम्मान वाले लक्ष्यों के लिए समुद्र की पूरी तस्वीर चाहिए; IPMDA का हिंद महासागर कार्यक्रम गुरुग्राम के IFC-IOR से चलता है।
- पुल का क्वाड छोर: पूरे हिंद-प्रशांत के लिए साझा परिचालन चित्र; मई 2026 की IPMSC सदस्यों की निगरानी जोड़ती है; भारत की मेज़बानी वाला अगला क्वाड-एट-सी तटरक्षकों का तालमेल बढ़ाता है।
- मूल्य: प्रतिबंधों से बचने या तस्करी के लिए "गोइंग डार्क" होने वाले जहाज़ों पर नज़र; हिंद महासागर के तटीय देशों को लाभ, जो SAGAR के "सभी के लिए विकास" से मेल खाता है।
- कमियाँ: पूरा उपयोग भारत-अमेरिका सहयोग पर टिका, जिस पर शुल्क और वीज़ा का तनाव है; 2024 के बाद क्वाड शिखर सम्मेलन नहीं; आँकड़े साझा करना प्रतिक्रिया क्षमता नहीं है; चीन का विरोध।
निष्कर्ष: निष्कर्ष दें कि IPMDA, SAGAR और क्वाड के बीच सबसे व्यावहारिक कड़ी है, पर यह पुल तभी टिकेगा जब इसके पीछे की साझेदारी की गति बनी रहे।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2020, सामान्य अध्ययन-II'चतुर्भुजीय सुरक्षा संवाद (क्वाड)' वर्तमान समय में स्वयं को सैनिक गठबंधन से एक व्यापारिक गुट में रूपान्तरित कर रहा है: विवेचना कीजिये।
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के क्वाड का परिचय दें: 2004 की सुनामी राहत से जन्म, 2017 में पुनरुद्धार और 2021 में नेताओं का स्तर, मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत के लिए।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- आरंभ से ही सैन्य गठबंधन नहीं: कोई सामूहिक रक्षा वचन या कमान नहीं; नौसेनाएँ मालाबार में क्वाड के ढाँचे से बाहर अभ्यास करती हैं।
- बढ़ता एजेंडा: चार स्तंभ; अति आवश्यक खनिज रूपरेखा (20 अरब डॉलर तक), ऊर्जा सुरक्षा, बंदरगाह, समुद्र के नीचे केबल, ओपन RAN, स्वास्थ्य।
- व्यापार गुट नहीं: कोई मुक्त व्यापार समझौता या शुल्क रियायत नहीं; आर्थिक काम आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा और निवेश है।
- सुरक्षा अब भी केंद्र में: IPMDA, IPMSC, क्वाड-एट-सी, होर्मुज़ और दक्षिण चीन सागर पर रुख़।
- सीमाएँ: 2024 के बाद शिखर सम्मेलन नहीं; अमेरिकी शुल्क और चीन की ओर झुकाव; अलग प्राथमिकताएँ।
निष्कर्ष: निष्कर्ष दें कि क्वाड "गठबंधन से व्यापार गुट" नहीं, बल्कि सुरक्षा संवाद से सुरक्षा और आर्थिक सार्वजनिक हित देने वाले समूह की ओर बढ़ा है।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2021, सामान्य अध्ययन-IIभारत-प्रशांत महासागर क्षेत्र में चीन की महत्त्वाकांक्षाओं का मुकाबला करना नई त्रि-राष्ट्र साझेदारी AUKUS का उद्देश्य है। क्या यह इस क्षेत्र में मौजूदा साझेदारी का स्थान लेने जा रहा है? वर्तमान परिदृश्य में, AUKUS की शक्ति और प्रभाव की विवेचना कीजिए।
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: ऑकस को 15 सितंबर 2021 को घोषित त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी के रूप में प्रस्तुत करें, जिसका पहला उद्देश्य ऑस्ट्रेलिया को परमाणु-चालित पनडुब्बियाँ दिलाना है।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- शक्ति: कठोर सैन्य क्षमता, घनिष्ठ सहयोगियों में तकनीक साझा करना, हिंद-प्रशांत में पनडुब्बियों की दीर्घकालिक उपस्थिति।
- प्रभाव: क्षेत्र के सैन्य संतुलन में बदलाव; चीन की आपत्ति; अप्रसार पर बहस।
- स्थान नहीं लेगा: क्वाड भारत के साथ सार्वजनिक हित का काम करता है, और भारत गठबंधनों से दूर रहता है; आसियान-केंद्रित मंच और IORA क्षेत्रीय ढाँचा बने रहते हैं।
- पूरकता: मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत का एक ही लक्ष्य, अलग-अलग साधनों से।
निष्कर्ष: निष्कर्ष दें कि ऑकस क्षेत्र की साझेदारियों में एक सैन्य परत जोड़ता है, पर क्वाड या आसियान-केंद्रित ढाँचे का स्थान नहीं लेता।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2015 (हिंदी रूपांतर)'हिंद महासागर रिम एसोसिएशन फ़ॉर रीजनल कोऑपरेशन (IOR-ARC)' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसकी स्थापना हाल ही में समुद्री डकैती और तेल रिसाव की दुर्घटनाओं के प्रत्युत्तर में की गई है।
- यह केवल समुद्री सुरक्षा के लिए बना एक गठबंधन है।
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: चरण 1: कथन 1 कहता है कि संगठन हाल ही में समुद्री डकैती और तेल रिसाव के कारण बना। यह गलत है, क्योंकि इसका औपचारिक आरंभ 1997 में क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग के लिए हुआ। चरण 2: कथन 2 कहता है कि यह केवल समुद्री सुरक्षा का गठबंधन है। यह भी गलत है, क्योंकि समुद्री सुरक्षा उसके छह प्राथमिक क्षेत्रों में से एक है। अतः दोनों कथन गलत हैं।
इस भ्रम से बचें: समुद्री सुरक्षा IORA का एक प्राथमिक क्षेत्र है, इसलिए "केवल" वाला कथन सही लग सकता है।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) केवल 1: गलत। IORA का आरंभ 1997 में हुआ, 2015 से बहुत पहले, और समुद्री डकैती इसका कारण नहीं थी।
- (b) केवल 2: गलत। इसके छह प्राथमिक क्षेत्रों में व्यापार, मत्स्य और पर्यटन भी हैं, केवल सुरक्षा नहीं।
- (c) 1 और 2 दोनों: गलत। दोनों कथन गलत हैं।
- (d) न तो 1 और न ही 2: सही। IORA 1997 का संगठन है, जिसका एजेंडा आर्थिक और समुद्री, दोनों है।
उत्तर: न तो 1 और न ही 2: विकल्प (d), आधिकारिक उत्तर।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2025निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- I. भारत, खनिज सुरक्षा भागीदारी में एक सदस्य के रूप में सम्मिलित हो गया है।
- II. भारत अपने द्वारा चिह्नित सभी 30 अति आवश्यक खनिजों में साधन-संपन्न है।
- III. संसद ने 2023 में खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में संशोधन कर कतिपय अति आवश्यक खनिजों के लिए खनन पट्टा और संयुक्त (कम्पोजिट) लाइसेंस नीलामी से देने हेतु केन्द्रीय सरकार को अनन्य रूप से सशक्त किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: चरण 1: कथन I सही है, क्योंकि भारत जून 2023 में खनिज सुरक्षा भागीदारी का सदस्य बना। चरण 2: कथन II गलत है, क्योंकि भारत सभी 30 अति आवश्यक खनिजों में साधन-संपन्न नहीं; लिथियम और कोबाल्ट के लिए उसे विदेश की ओर देखना पड़ता है। चरण 3: कथन III सही है, क्योंकि 2023 के संशोधन ने इन रियायतों की नीलामी का अधिकार केवल केंद्र सरकार को दिया। अतः केवल I और III सही हैं।
इस भ्रम से बचें: कथन II में "सभी 30": भारत ने 30 खनिजों को अति आवश्यक इसलिए माना कि इनमें से कई की आपूर्ति असुरक्षित है।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) केवल I और II: गलत। कथन II गलत है।
- (b) केवल II और III: गलत। कथन II गलत है, जबकि कथन I सही है।
- (c) केवल I और III: सही। भारत 2023 में MSP में शामिल हुआ, और 2023 के संशोधन से नीलामी का अधिकार केंद्र को मिला।
- (d) I, II और III: गलत। भारत सभी 30 अति आवश्यक खनिजों में साधन-संपन्न नहीं है।
उत्तर: केवल I और III: विकल्प (c), आधिकारिक उत्तर।
स्रोत और संदर्भ
- Ministry of External Affairs: Quad Foreign Ministers' Meeting Joint Statement (26 May 2026)
- Ministry of External Affairs: Factsheet, Quad Foreign Ministers' Meeting in New Delhi (May 2026)
- Ministry of External Affairs: Quad Critical Minerals Initiative Framework (26 May 2026)
- Ministry of External Affairs: Quad Statement on Indo-Pacific Energy Security (26 May 2026)
- Ministry of External Affairs: Quad brief (updated July 2026)
- PIB: Thirty Critical Minerals List Released (24 July 2023)
- NCERT: Politics in India since Independence (Class XII), India's External Relations
- PIB: Parliament passes the Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2023
- PIB: Critical minerals initiatives of the Ministry of Mines (2025)
- The Hindu, Delhi, 4 and 11 May 2026: India's diplomatic calendar; India seeks to recharge the IORA
- The Hindu, Delhi, 23 to 26 May 2026: Jaishankar to host Quad Ministers' meet on May 26; Delhi plays a key role in Indo-Pacific policy of the U.S., says Rubio; Quad grouping is 'vital', says Japan's Foreign Minister; India-U.S. ties, Iran crisis in focus as Quad Foreign Ministers meet today
- The Hindu, Delhi, 27 May 2026: Quad announces maritime plans amid Hormuz crisis; India, U.S. draw up deal on rare earth elements; No clarity on Quad leaders' summit; editorial on the Rubio visit
- The Hindu, Delhi, 28 May 2026: Quad says ports for Fiji; Ditoka says no specific project yet
- The Hindu, Delhi, 30 May 2026: Different directions (editorial)
- The Hindu, Delhi, 6 and 25 June, 7, 8, 9 and 23 July 2026: the U.S., China and the Quad; India and Australia; Quad Foreign Ministers in Manila
- The Hindu, Delhi, 22 August 2026: maritime domain awareness and the IPMDA
- The Hindu, Delhi, 24 and 30 September 2026: Jaishankar takes up U.S. sanctions law with Rubio; Japan on the next Quad naval exercise
- Wikipedia: Quadrilateral Security Dialogue
- Wikipedia: AUKUS
- Wikipedia: Exercise Malabar
- Wikipedia: Indian Ocean Rim Association
- Wikipedia: Security and Growth for All in the Region
- Wikipedia: Minerals Security Partnership
- Wikipedia: Pax Silica
- UPSC: Civil Services Examination question papers
संपादकीय अस्वीकरण
यह लेख क्वाड के संयुक्त वक्तव्य और तथ्य-पत्र, आधिकारिक विज्ञप्तियों और इस पृष्ठ पर दिए गए अन्य स्रोतों पर आधारित है।
