परिचय
जीएसटी परिषद् अनुच्छेद 279क के अंतर्गत बना संवैधानिक निकाय है, जिसके अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री हैं और जिसमें हर राज्य से एक मंत्री होता है; यह वस्तु एवं सेवा कर की हर प्रमुख विशेषता पर सिफ़ारिश करता है। इसे 2016 के 101वें संशोधन ने बनाया, जिसने संसद और राज्यों को वस्तुओं और सेवाओं पर साथ-साथ कर लगाने की शक्ति दी, और यह ऐसे भारित मतदान से निर्णय करता है जिसमें संघ और राज्य दोनों की आवश्यकता होती है।
101वाँ संशोधन और जीएसटी का निर्माण
101वाँ संविधान संशोधन: जीएसटी कैसे लागू हुआ
वस्तुओं और सेवाओं पर कर लगाने की शक्तियाँ संघ और राज्यों में बँटी हुई थीं, इसलिए जीएसटी लाने के लिए स्वयं संविधान बदलना पड़ा। यह परिवर्तन 122वें संविधान संशोधन विधेयक, 2014 से हुआ। राज्य सभा ने इसे 3 अगस्त 2016 को और लोक सभा ने 8 अगस्त को पारित किया, पंद्रह से अधिक राज्यों ने इसका अनुसमर्थन किया, और 8 सितंबर 2016 को राष्ट्रपति की अनुमति मिलने पर यह 101वाँ संशोधन अधिनियम, 2016 बना।
- अनुच्छेद 246क: संसद और हर राज्य विधान-मंडल को जीएसटी पर एक साथ विधि बनाने की शक्ति; अंतर-राज्यीय आपूर्ति केवल संसद का विषय।
- अनुच्छेद 269क: आयात सहित अंतर-राज्यीय आपूर्ति पर जीएसटी संघ लगाता और वसूलता है, और उसे संघ तथा राज्यों में बाँटा जाता है।
- अनुच्छेद 279क: जीएसटी परिषद् का उपबंध, जिसका गठन राष्ट्रपति को संशोधन लागू होने के साठ दिन के भीतर करना था।
- सातवीं अनुसूची: संघ सूची की प्रविष्टि 92ग और राज्य सूची की प्रविष्टियाँ 52 और 55 जैसी कर प्रविष्टियाँ हटाई गईं।
- क्षतिपूर्ति (धारा 18): जीएसटी से होने वाली राजस्व हानि के लिए संसद पाँच वर्ष तक राज्यों को क्षतिपूर्ति का उपबंध करे।
जीएसटी स्वयं 1 जुलाई 2017 से लागू हुआ, जिसकी शुरुआत संसद के विशेष मध्यरात्रि सत्र में हुई। संशोधन ने सूचियों को कैसे बदला, यह सातवीं अनुसूची वाले लेख (अंग्रेज़ी में) में समझाया गया है।
जीएसटी क्यों लाया गया: करों का सोपानिक प्रभाव और एकल बाज़ार
जीएसटी से पहले कई कर हर चरण के मूल्य-वर्धन पर नहीं, बल्कि वस्तु के पूरे मूल्य पर लगते थे, जिसमें कच्चे माल पर पहले से चुकाया गया कर भी शामिल होता था। इससे करों का सोपानिक प्रभाव पैदा होता था, अर्थात् कर पर कर। जीएसटी केवल मूल्य-वर्धन पर कर लगाता है: हर चरण में चुकाया गया कर अगले चरण में इनपुट कर क्रेडिट के रूप में घट जाता है।
| स्तर | जीएसटी में सम्मिलित किए गए मुख्य कर |
|---|---|
| संघ | केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर, केंद्रीय बिक्री कर, कृषि कल्याण उपकर और स्वच्छ भारत उपकर जैसे उपकर |
| राज्य | वैट या बिक्री कर, प्रवेश कर, विलासिता कर, चुंगी, मनोरंजन कर, विज्ञापनों पर कर, लॉटरी, सट्टे और जुए पर कर, वस्तुओं पर राज्यों के उपकर |
| बाहर रखे गए | फ़िलहाल पाँच पेट्रोलियम उत्पाद; मानव उपभोग की मादक शराब पर राज्य का वैट जारी |
परिणाम को "एक राष्ट्र, एक कर, एक बाज़ार" कहा गया: पूरे देश में समान विधियाँ, प्रक्रियाएँ और दरें, वस्तुओं और सेवाओं की मुक्त आवाजाही, और एक साझा बाज़ार का निर्माण। जीएसटी गंतव्य-आधारित है, इसलिए कर उस राज्य को जाता है जहाँ वस्तु या सेवा का उपभोग होता है।
जीएसटी की लंबी राह: केलकर कार्य-बल से देशव्यापी शुरुआत तक
इस विचार को विधि बनने में पंद्रह वर्ष लगे। 2002 में कर सुधारों की सिफ़ारिश के लिए विजय केलकर की अध्यक्षता में एक कार्य-बल बना, और उसने 2005 में जीएसटी लागू करने की सिफ़ारिश की, जैसा बारहवें वित्त आयोग ने भी सुझाया था। 2006 में केंद्रीय वित्त मंत्री ने 1 अप्रैल 2010 तक इसे लागू करने का प्रस्ताव रखा, और पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता की अध्यक्षता वाली समिति ने इसकी रूपरेखा पर काम किया।
पहला प्रयास अटक गया। 115वाँ संविधान संशोधन विधेयक 22 मार्च 2011 को लोक सभा में पेश हुआ, किन्तु विरोध के कारण स्थायी समिति को भेजा गया, और उसी वर्ष असीम दासगुप्ता ने जीएसटी समिति के प्रमुख पद से त्यागपत्र दे दिया। 2014 का 122वाँ संशोधन विधेयक मई 2015 में लोक सभा से पारित हुआ, और अगस्त 2016 में अंतिम रूप से पारित हुआ।
देरी के दो कारण थे: स्वयं संविधान बदलने की आवश्यकता, और राज्यों की सहमति, जिन्हें वैट, प्रवेश कर और चुंगी जैसे अपने कर छोड़ने थे। उनकी सहमति के लिए संशोधन ने उन्हें पाँच वर्ष की क्षतिपूर्ति का वचन दिया, जो बाद में संरक्षित राजस्व में 14 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के रूप में तय हुआ।
दोहरा जीएसटी: सीजीएसटी, एसजीएसटी और आईजीएसटी
भारत ने दोहरा जीएसटी अपनाया, जिसे संघ और राज्य दोनों चलाते हैं। राज्य के भीतर की आपूर्ति पर केंद्रीय जीएसटी लगता है, जिसे संघ वसूलता है, और राज्य जीएसटी, जिसे राज्य वसूलता है। अंतर-राज्यीय आपूर्ति और आयात पर एकीकृत जीएसटी लगता है, जिसे संघ अनुच्छेद 269क के अंतर्गत लगाता है और फिर बाँटता है।
इसके बाद संसद ने सीजीएसटी अधिनियम और यूटीजीएसटी अधिनियम पारित किए, और हर राज्य ने अपना एसजीएसटी अधिनियम। शुरुआत में जीएसटी की छह मानक दरें थीं, 0, 3, 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत, जो पूरे देश में आपूर्ति पर लागू थीं; 2025 में परिषद् दो मुख्य दरों पर आ गई।
जीएसटी में संघ का हिस्सा विभाज्य पूल में जाता है, और अन्य संघीय करों की तरह वित्त आयोग की सलाह पर राज्यों से बाँटा जाता है। कर बँटवारे का पूरा ढाँचा वित्त आयोग और वित्तीय संबंधों वाले लेख (अंग्रेज़ी में) में समझाया गया है।
अनुच्छेद 279क के अंतर्गत वस्तु एवं सेवा कर परिषद्
जीएसटी परिषद् के अध्यक्ष, सदस्य और संरचना
वस्तु एवं सेवा कर परिषद् अनुच्छेद 279क के अंतर्गत एक संवैधानिक निकाय है। अनुच्छेद 279क 12 सितंबर 2016 को लागू हुआ, उसी दिन केंद्रीय मंत्रिमंडल ने परिषद् के गठन को स्वीकृति दी, और इसकी पहली बैठक 22 और 23 सितंबर 2016 को हुई।
- अध्यक्ष: केंद्रीय वित्त मंत्री।
- संघ से सदस्य: राजस्व या वित्त के प्रभारी केंद्रीय राज्य मंत्री।
- राज्यों से सदस्य: हर राज्य सरकार का वित्त या कराधान प्रभारी मंत्री, या उसके द्वारा नामनिर्दिष्ट कोई अन्य मंत्री।
- उपाध्यक्ष: राज्यों के सदस्य अपने में से चुनते हैं।
- सचिवालय: राजस्व सचिव परिषद् के पदेन सचिव हैं, और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के अध्यक्ष स्थायी आमंत्रित सदस्य, जिन्हें मत का अधिकार नहीं।
अनुच्छेद 279क के लिए 'राज्य' में विधान-मंडल वाला केंद्र शासित प्रदेश भी शामिल है, जैसा अनुच्छेद 366(26ख) कहता है। इसलिए दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर, निर्वाचित विधान सभा वाले तीन केंद्र शासित प्रदेश, परिषद् में राज्य के रूप में बैठते हैं। इसी परिभाषा से ये तीनों अनुच्छेद 246क के अंतर्गत अपना एसजीएसटी भी लगाते हैं।
जीएसटी परिषद् में भारित मतदान, गणपूर्ति और निर्णय
हर निर्णय बैठक में उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के भारित मतों के कम से कम तीन-चौथाई बहुमत से होता है। डाले गए कुल मतों में संघ के मत का भार एक-तिहाई होता है, और सभी राज्यों के मतों का भार मिलाकर दो-तिहाई। सदस्यों का आधा भाग गणपूर्ति बनाता है।
यह गणित दोनों पक्षों को निषेधाधिकार देता है। संघ के पास अकेले केवल एक-तिहाई है, और सभी राज्यों के पास मिलाकर केवल दो-तिहाई, इसलिए दूसरे पक्ष के बिना कोई भी तीन-चौथाई तक नहीं पहुँच सकता। व्यवहार में परिषद् सर्वसम्मति के दृष्टिकोण से निर्णय लेती है, और आवश्यक होने पर ही किसी प्रस्ताव पर मतदान कराती है। परिषद् का कोई कार्य केवल इस कारण अमान्य नहीं होता कि उसमें कोई पद रिक्त है या उसके गठन या प्रक्रिया में कोई त्रुटि है।
अनुच्छेद 279क(4) के अंतर्गत जीएसटी परिषद् के कार्य
परिषद् जीएसटी की हर प्रमुख विशेषता पर संघ और राज्यों को सिफ़ारिशें करती है। ऐसा करते हुए उसे जीएसटी के सामंजस्यपूर्ण ढाँचे और वस्तुओं तथा सेवाओं के सामंजस्यपूर्ण राष्ट्रीय बाज़ार की आवश्यकता से मार्गदर्शन लेना होता है।
- दायरा: संघ, राज्यों और स्थानीय निकायों के कौन-से कर, उपकर और अधिभार सम्मिलित हों, और किन वस्तुओं और सेवाओं पर कर लगे या छूट मिले।
- विधियाँ और सिद्धांत: आदर्श जीएसटी विधियाँ, कर लगाने के सिद्धांत, आईजीएसटी का बँटवारा और आपूर्ति के स्थान के सिद्धांत।
- सीमाएँ और दर-पट्टियाँ: न्यूनतम सीमाएँ, न्यूनतम दरों और पट्टियों सहित दरें, और प्राकृतिक आपदा के समय संसाधन जुटाने के लिए निर्दिष्ट अवधि की विशेष दरें।
- विशेष राज्य: अनुच्छेद में नामित पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए विशेष उपबंध।
- पेट्रोलियम: वह तिथि जिससे कच्चे पेट्रोलियम, डीज़ल, पेट्रोल, प्राकृतिक गैस और विमानन टरबाइन ईंधन पर जीएसटी लगेगा।
- विवाद: उसकी सिफ़ारिशों से उठने वाले संघ और राज्यों के, या राज्यों के आपसी विवादों के न्यायनिर्णयन का तंत्र।
परिषद् जो व्यवस्था बनाती है, उसे संबंधित संस्थाएँ चलाती हैं। जीएसटी नेटवर्क इसकी तकनीकी रीढ़ है। जीएसटी अपील अधिकरण अपीलें सुनता है, और 2025 में परिषद् ने इसे कार्यरत करने की सिफ़ारिश की। कर कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक न पहुँचने की शिकायतें पहले राष्ट्रीय मुनाफ़ाखोरी-रोधी प्राधिकरण के पास जाती थीं, 1 दिसंबर 2022 से भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के पास और 1 अक्टूबर 2024 से अधिकरण के पास; मुनाफ़ाखोरी-रोधी उपबंध 1 अप्रैल 2025 को समाप्त हो गए।
क्या जीएसटी परिषद् की सिफ़ारिशें बाध्यकारी हैं? मोहित मिनरल्स निर्णय
19 मई 2022 को भारत संघ बनाम मोहित मिनरल्स मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जीएसटी परिषद् की सिफ़ारिशें संघ और राज्यों पर बाध्यकारी नहीं हैं; उनका प्रेरक मूल्य है। संघ का तर्क था कि बाध्यकारी न होने पर एक ही क्षेत्र में अलग-अलग विधियाँ चलेंगी; न्यायालय इससे सहमत नहीं हुआ।
- अनुच्छेद 279क का पाठ: इसमें कोई सर्वोपरि खंड (non-obstante clause) नहीं है, और अनुच्छेद 246क को इसके अधीन नहीं किया गया, इसलिए संसद और राज्य विधान-मंडलों की विधि बनाने की समान शक्ति बनी रहती है।
- प्रारूपण का इतिहास: संशोधन के दौरान प्रस्तावित अनुच्छेद 279ख को हटाया जाना दिखाता है कि संसद सिफ़ारिशों को बाध्यकारी नहीं, प्रेरक रखना चाहती थी।
- संघीय संवाद: न्यायालय ने भारतीय संघवाद को एक संवाद कहा, जो सहकारी संघवाद से लेकर टकराव तक फैला है, और परिषद् को ऐसा निकाय माना जो सहयोग से निर्णय के लिए बना है।
जीएसटी क्षतिपूर्ति और परिषद् का कार्य-रिकॉर्ड
जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर और राज्यों को क्षतिपूर्ति
101वें संशोधन की धारा 18 के अनुसार संसद को जीएसटी से होने वाली राजस्व हानि के लिए पाँच वर्ष तक राज्यों की क्षतिपूर्ति करनी थी। यह काम वस्तु एवं सेवा कर (राज्यों को क्षतिपूर्ति) अधिनियम, 2017 करता है: धारा 7 के अंतर्गत 1 जुलाई 2017 से 30 जून 2022 तक राज्यों का राजस्व, सम्मिलित करों के 2015-16 के संग्रह पर 14 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के साथ, संरक्षित रहा। कोई कमी हो तो उसकी भरपाई अलग क्षतिपूर्ति उपकर से होती है।
- आरंभिक वर्ष: 2017-18 में सत्ताईस राज्यों को क्षतिपूर्ति मिली, और संरक्षित राजस्व में कुल कमी 12.85 प्रतिशत रही।
- निधि पर दबाव: पंद्रहवें वित्त आयोग ने पाया कि 14 प्रतिशत की गारंटी ने व्यवस्था पर भारी बोझ डाला, और उपकर संग्रह आवश्यकता से काफ़ी कम रहा।
- महामारी: कोविड-19 ने कर-आधार घटा दिया; आयोग ने जीएसटी क्षतिपूर्ति के लिए लिया गया उधार अपने राजकोषीय पथ से बाहर रखा।
- संक्रमण के बाद: कुछ राज्यों ने पाँच वर्ष के बाद भी क्षतिपूर्ति माँगी; 2024 में परिषद् ने एक मंत्री-समूह बनाया, जो क्षतिपूर्ति उपकर समाप्त होने के बाद उसकी जगह लेने वाले कर का प्रस्ताव दे।
जीएसटी परिषद् की बैठक और प्रमुख निर्णय
परिषद् समय-समय पर मिलती है, और उसके निर्णयों ने जीएसटी के कामकाज को आकार दिया है। उसके अपने रिकॉर्ड के कुछ उदाहरण उसके काम का दायरा दिखाते हैं।
- 24वीं बैठक: ई-वे (e-way bill) व्यवस्था को स्वीकृति।
- 33वीं और 34वीं बैठक: निर्माणाधीन गैर-किफ़ायती आवास पर प्रभावी दर 12 से घटाकर 5 प्रतिशत, और किफ़ायती आवास पर 8 से 1 प्रतिशत।
- 35वीं बैठक: ई-इनवॉइसिंग को स्वीकृति; 1 अगस्त 2023 से यह 5 करोड़ रुपये या उससे अधिक कारोबार वाली फ़र्मों के लिए अनिवार्य है।
- 36वीं बैठक: इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी 12 से घटाकर 5 प्रतिशत।
- 56वीं बैठक, 3 सितंबर 2025: चार दरों के ढाँचे की जगह दो मुख्य दरें, 5 प्रतिशत (मेरिट दर) और 18 प्रतिशत (मानक दर), और कुछ वस्तुओं के लिए 40 प्रतिशत की विशेष दर, 22 सितंबर 2025 से; व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा कर-मुक्त।
दरों के नवीनतम बदलाव और उनका प्रभाव जीएसटी सुधार वाले समसामयिकी लेख (अंग्रेज़ी में) में दिया गया है।
जीएसटी परिषद् और सहकारी संघवाद
परिषद् संविधान में साझा कराधान शक्ति का उदाहरण है: दो स्तरों की सरकारें अलग-अलग कर छोड़कर साथ निर्णय करती हैं। मतदान का नियम यह सुनिश्चित करता है कि कोई पक्ष अपनी इच्छा न थोप सके, और मोहित मिनरल्स निर्णय अंतिम शक्ति विधान-मंडलों के पास रखता है।
- राज्यों के पक्ष में: संघ के अप्रत्यक्ष करों के निर्णयों में भागीदारी, और ऐसा गंतव्य-आधारित कर जिसके बारे में पंद्रहवें वित्त आयोग ने पाया कि इससे छोटे पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों को लाभ हुआ।
- विपक्ष में: अधिकांश वस्तुओं पर राज्य अपनी दरें तय करने की शक्ति खो बैठे, और 14 प्रतिशत की गारंटीशुदा वृद्धि 2022 में क्षतिपूर्ति के साथ समाप्त हो गई।
- जीएसटी से बाहर: पाँच पेट्रोलियम उत्पाद और मादक शराब बाहर हैं, और राज्य शराब पर अब भी वैट लगाते हैं।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के विगत वर्षों के प्रश्न
विगत वर्षों के प्रश्न: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा इस लेख को पढ़ने के बाद आप यूपीएससी के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिख सकेंगे। हर प्रश्न के साथ एक खुलने वाली रूपरेखा है, जो बताती है कि परीक्षा में उसे कैसे हल करें।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2023, सामान्य अध्ययन-II101 वें संविधान संशोधन अधिनियम का महत्व समझाइए । यह किस हद तक संघवाद के समावेशी भावना को दर्शाता है ?
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: 101वें संशोधन अधिनियम, 2016 ने संसद और राज्यों को वस्तुओं और सेवाओं पर एक साथ कर लगाने की शक्ति दी और जीएसटी परिषद् बनाई, इससे शुरुआत करें।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- महत्व: अनुच्छेद 246क की साझा कराधान शक्ति, अनुच्छेद 269क का आईजीएसटी, अनुच्छेद 279क की परिषद्, एकल राष्ट्रीय बाज़ार।
- समावेशन: ऐसा भारित मतदान जिसमें दोनों पक्ष चाहिए, राज्यों को पाँच वर्ष की क्षतिपूर्ति, कुछ राज्यों के लिए विशेष उपबंध।
- सीमाएँ: राज्यों ने अपनी दरें तय करने की शक्ति छोड़ी; क्षतिपूर्ति 2022 में समाप्त।
- मोहित मिनरल्स (2022): सिफ़ारिशें प्रेरक, बाध्यकारी नहीं, जिससे विधायी स्वायत्तता बनी रहती है।
निष्कर्ष: निष्कर्ष में लिखें कि संशोधन अपनी रचना में समावेशी संघवाद दिखाता है, जिसकी व्यावहारिक परीक्षा राजस्व के बँटवारे में होती है।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2020, सामान्य अध्ययन-IIIवस्तु एवं सेवा कर (राज्यों को क्षतिपूर्ति) अधिनियम, 2017 के तर्काधार की व्याख्या कीजिए। कोविड-19 ने कैसे वस्तु एवं सेवा कर क्षतिपूर्ति निधि (जी० एस० टी० कॉम्पेन्सेशन फन्ड) को प्रभावित और नये संघीय तनावों को उत्पन्न किया है?
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: वस्तु एवं सेवा कर (राज्यों को क्षतिपूर्ति) अधिनियम, 2017 ने 101वें संशोधन की धारा 18 को लागू किया, जिसमें राज्यों को पाँच वर्ष की क्षतिपूर्ति का वचन था, इससे शुरुआत करें।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- तर्काधार: राज्यों ने वैट, प्रवेश कर और अन्य कर छोड़े; 2015-16 पर 14 प्रतिशत वृद्धि के साथ राजस्व संरक्षित; कमी की भरपाई क्षतिपूर्ति उपकर से।
- कोविड-19: कर-आधार सिकुड़ा; उपकर संग्रह आवश्यकता से काफ़ी कम रहा; क्षतिपूर्ति के लिए उधार लेना पड़ा।
- संघीय तनाव: पाँच वर्ष के बाद भी क्षतिपूर्ति की माँग, और नियत गारंटी से व्यवस्था पर पड़ा बोझ।
निष्कर्ष: निष्कर्ष में लिखें कि गारंटी से जीएसटी पर राज्यों की सहमति मिली, और महामारी ने नियत दर वाले वचन की सीमा दिखा दी।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2019, सामान्य अध्ययन-IIIउन अप्रत्यक्ष करों को गिनाइए जो भारत में वस्तु एवं सेवा कर (जी० एस० टी०) में सम्मिलित किए गए हैं। भारत में जुलाई 2017 से क्रियान्वित जी० एस० टी० के राजस्व निहितार्थों पर भी टिप्पणी कीजिए।
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: 1 जुलाई 2017 से जीएसटी ने संघ और राज्यों के बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष करों की जगह ली, इससे शुरुआत करें।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- संघ के कर: केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर, केंद्रीय बिक्री कर, उपकर।
- राज्य के कर: वैट, प्रवेश कर, विलासिता कर, चुंगी, मनोरंजन कर, विज्ञापनों और लॉटरी पर कर।
- राजस्व: क्षतिपूर्ति की गारंटी; उपकर की कमी; पेट्रोलियम और शराब जीएसटी से बाहर।
निष्कर्ष: निष्कर्ष में लिखें कि जीएसटी ने कर-आधार बढ़ाया, किन्तु राजस्व का जोखिम राज्यों की ओर गया, जिसे क्षतिपूर्ति ने कुछ समय के लिए ढका।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2013, सामान्य अध्ययन-III (हिंदी रूपांतर)भारत में वस्तु एवं सेवा कर लागू करने के औचित्य की चर्चा कीजिए। इसकी व्यवस्था लागू करने में देरी के कारणों को आलोचनात्मक रूप से सामने लाइए।
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: जीएसटी का प्रस्ताव सोपानिक प्रभाव वाली बिखरी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था की जगह मूल्य-वर्धन पर एक कर लाने के लिए था, इससे शुरुआत करें।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- औचित्य: इनपुट कर क्रेडिट से सोपानिक प्रभाव का अंत; साझा राष्ट्रीय बाज़ार; सरल अनुपालन।
- देरी: संविधान संशोधन की आवश्यकता; अपने कर खोने की राज्यों की आशंका; क्षतिपूर्ति की रूपरेखा।
- समाधान: 101वाँ संशोधन, भारित मतदान, पाँच वर्ष की क्षतिपूर्ति।
निष्कर्ष: निष्कर्ष में लिखें कि संघीय व्यवस्था में सहमति बनाने की कीमत यह देरी थी।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2017 (हिंदी रूपांतर)'वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी)' लागू करने के सबसे संभावित लाभ क्या है/हैं?
- यह अनेक प्राधिकारियों द्वारा वसूले जाने वाले अनेक करों का स्थान लेगा, और इस प्रकार भारत में एकल बाज़ार बनाएगा।
- यह भारत के 'चालू खाता घाटे' को भारी मात्रा में घटाएगा और उसे अपना विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने में सक्षम बनाएगा।
- यह भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि और आकार को बहुत बढ़ाएगा और उसे निकट भविष्य में चीन से आगे निकलने में सक्षम बनाएगा।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: केवल वही रखें जिसके लिए जीएसटी बना है। कथन 1 उसकी रचना बताता है: अनेक प्राधिकारियों के अनेक करों की जगह एक कर, और एकल राष्ट्रीय बाज़ार। कथन 2, चालू खाता घाटे में बड़ी कमी, शेष विश्व के साथ व्यापार से जुड़ा है, जिसे जीएसटी तय नहीं करता। कथन 3, भारत की अर्थव्यवस्था का चीन से आगे निकलना, वृद्धि का अनुमान है, किसी कर का लाभ नहीं। केवल कथन 1 टिकता है।
इस भ्रम से बचें: बड़े आर्थिक दावे आकर्षक लगते हैं, किन्तु कर इनके लिए नहीं बना है।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) केवल 1: सही। अनेक करों की जगह लेना और एकल बाज़ार बनाना ही जीएसटी की रचना का उद्देश्य है।
- (b) केवल 2 और 3: गलत। न चालू खाता घाटा और न चीन से आगे निकलना जीएसटी का लाभ है, और कथन 1 छूट गया है।
- (c) केवल 1 और 3: गलत। कथन 3 वृद्धि का अनुमान है, कर का लाभ नहीं।
- (d) 1, 2 और 3: गलत। कथन 2 और 3 जीएसटी के लाभ नहीं हैं।
उत्तर: विकल्प (a): केवल एकल बाज़ार वाला कथन जीएसटी का वर्णन करता है।
स्रोत
- Legislative Department, Ministry of Law and Justice: The Constitution of India
- GST Council: The Constitution (One Hundred and First Amendment) Act, 2016
- GST Council: The GST Council
- GST Council Secretariat: Office Memorandum on the Group of Ministers on Compensation Cess, 25 September 2024
- Press Information Bureau: Recommendations of the 56th Meeting of the GST Council, 3 September 2025
- Press Information Bureau: GST compensation to States for five years, 19 July 2022
- Fifteenth Finance Commission: Report for 2021-26, Volume I, Main Report
- Supreme Court of India: Union of India v. Mohit Minerals Pvt. Ltd., judgment of 19 May 2022
- NCERT: Introductory Macroeconomics, Class 12, Chapter 5, Government Budget and the Economy
- Wikipedia: Goods and Services Tax (India)
- The Hindu (Delhi): GST refund norms eased; officers lose arrest powers, 9 October 2026
संपादकीय अस्वीकरण
यह लेख जीएसटी परिषद् को संविधान, परिषद् के अपने दस्तावेज़ों, उच्चतम न्यायालय के निर्णय और सूची में दिए अन्य स्रोतों के आधार पर समझाता है। यह कर संबंधी सलाह नहीं है।
