परिचय
विद्युत रसायन (वैद्युतरसायन, electrochemistry) इस बात का अध्ययन है कि रेडॉक्स अभिक्रियाओं से रासायनिक ऊर्जा और विद्युत ऊर्जा एक-दूसरे में कैसे बदलती हैं: गैल्वैनी सेल और बैटरियाँ रासायनिक ऊर्जा को विद्युत में बदलती हैं, जबकि वैद्युत अपघटन विद्युत से ऐसी अभिक्रियाएँ कराता है जो अपने-आप नहीं होतीं।
विद्युत रसायन: रासायनिक ऊर्जा से विद्युत
विद्युत रासायनिक सेल: गैल्वैनी सेल, वैद्युत अपघटनी सेल और डेन्यल सेल
टॉर्च के सेल से लेकर विद्युत कार के बैटरी-पैक तक, हर बैटरी एक विद्युत रासायनिक सेल है। यह रेडॉक्स अभिक्रिया से काम करती है, जिसमें एक पदार्थ इलेक्ट्रॉन खोता है और दूसरा उन्हें ग्रहण करता है, जैसा रासायनिक अभिक्रियाएँ (अंग्रेज़ी में) वाले लेख में समझाया गया है। गैल्वैनी सेल, जिसे वोल्टीय सेल भी कहते हैं, ऐसा विद्युत रासायनिक सेल है जो स्वतः होने वाली रेडॉक्स अभिक्रिया की रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है; अभिक्रिया से निकली ऊर्जा विद्युत कार्य बनकर मोटर, हीटर या पंखा चला सकती है।
- डेन्यल सेल: ज़िंक की छड़ ज़िंक सल्फ़ेट विलयन में और कॉपर की छड़ कॉपर सल्फ़ेट विलयन में डूबी रहती है। ज़िंक का ऑक्सीकरण होता है (Zn → Zn²⁺ + 2e⁻) और कॉपर आयनों का अपचयन (Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu); जब दोनों आयनों की सांद्रता 1 मोल प्रति लीटर हो, तो सेल 1.1 V देता है।
- अर्ध-सेल: अपने वैद्युतअपघट्य में डूबा हर धातु इलेक्ट्रोड एक अर्ध-सेल, अर्थात् रेडॉक्स युग्म, है। दोनों बाहर वोल्टमीटर से होकर धातु के तार से और भीतर दोनों वैद्युतअपघट्यों के बीच लवण सेतु से जुड़ते हैं।
- ऐनोड और कैथोड: ऑक्सीकरण ज़िंक इलेक्ट्रोड, अर्थात् ऐनोड, पर और अपचयन कॉपर इलेक्ट्रोड, अर्थात् कैथोड, पर होता है; इलेक्ट्रॉन तार से होकर ज़िंक से कॉपर की ओर बहते हैं।
- वैद्युत अपघटनी सेल: विपरीत बाहरी वोल्टता 1.1 V से अधिक कर दी जाए, तो अभिक्रिया उलटी चलने लगती है। तब यह युक्ति वैद्युत अपघटनी सेल बन जाती है, जो विद्युत ऊर्जा से अस्वतः अभिक्रिया कराती है।
इलेक्ट्रोड विभव और विद्युत रासायनिक श्रेणी
हर अर्ध-सेल का एक इलेक्ट्रोड विभव होता है, पर केवल दो विभवों का अंतर ही मापा जा सकता है। परंपरा से मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का विभव हर ताप पर शून्य माना जाता है: प्लैटिनम ब्लैक से लेपित प्लैटिनम इलेक्ट्रोड, जो 1 मोलर हाइड्रोजन आयन सांद्रता वाले अम्ल में डूबा हो और जिसमें एक बार दाब पर शुद्ध हाइड्रोजन गैस प्रवाहित हो। बाकी हर अर्ध-सेल इसी के सापेक्ष मापा जाता है।
मानक इलेक्ट्रोड विभवों को क्रम से लगाने पर विद्युत रासायनिक श्रेणी बनती है। हाइड्रोजन के सापेक्ष कॉपर +0.34 V और ज़िंक −0.76 V है, इसलिए डेन्यल सेल 0.34 − (−0.76) = 1.10 V देता है। धनात्मक मान का अर्थ है कि आयन हाइड्रोजन आयनों से अधिक आसानी से अपचयित होता है, इसीलिए कॉपर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में नहीं घुलता; ऋणात्मक मान का अर्थ है कि हाइड्रोजन आयन उस धातु का ऑक्सीकरण कर सकते हैं, जैसा वे ज़िंक का करते हैं।
- सबसे प्रबल ऑक्सीकारक: +2.87 V पर फ़्लोरीन में अपचयित होने की प्रवृत्ति सबसे अधिक है, इसलिए फ़्लोरीन गैस सबसे प्रबल ऑक्सीकारक है।
- सबसे प्रबल अपचायक: −3.05 V पर लिथियम का विभव सबसे कम है, इसलिए जल में लिथियम धातु सबसे शक्तिशाली अपचायक है।
- विस्थापन: कम इलेक्ट्रोड विभव वाली धातु अधिक विभव वाली धातु के आयनों को अपचयित करती है, इसलिए कॉपर सल्फ़ेट विलयन में रखा ज़िंक घुल जाता है और कॉपर जम जाता है; धातु और अधातु (अंग्रेज़ी में) वाले लेख की सक्रियता श्रेणी के पीछे भी यही क्रम है।
- विद्युत रासायनिक सेलों के उपयोग: विलयनों का pH, विलेयता गुणनफल और साम्य स्थिरांक ज्ञात करना, और विभवमितीय अनुमापन।
वैद्युत अपघटन, फैराडे के नियम और जल का वैद्युत अपघटन
किसी वैद्युतअपघट्य, अर्थात् विलयन या पिघले पदार्थ, से विद्युत प्रवाहित करके ऐसी रासायनिक अभिक्रिया कराना जो अपने-आप न हो, वैद्युत अपघटन है; यह वैद्युत अपघटनी सेल में होता है। कॉपर इलेक्ट्रोडों के बीच कॉपर सल्फ़ेट विलयन का वैद्युत अपघटन करने पर ऐनोड पर कॉपर घुलता है और कैथोड पर जमता है। यही वैद्युत अपघटनी शोधन का आधार है: अशुद्ध कॉपर को ऐनोड बनाया जाता है, और शुद्ध कॉपर कैथोड पर इकट्ठा होता है।
- वैद्युत अपघटन से प्राप्त धातुएँ: सोडियम और मैग्नीशियम उनके पिघले क्लोराइडों के वैद्युत अपघटन से, और ऐलुमिनियम क्रायोलाइट के साथ ऐलुमिनियम ऑक्साइड के वैद्युत अपघटन से बनता है, क्योंकि इनके लिए कोई उपयुक्त रासायनिक अपचायक उपलब्ध नहीं है।
- फैराडे का पहला नियम: इलेक्ट्रोड पर होने वाली रासायनिक अभिक्रिया की मात्रा वैद्युतअपघट्य से प्रवाहित विद्युत की मात्रा के अनुक्रमानुपाती होती है।
- फैराडे का दूसरा नियम: विद्युत की समान मात्रा से मुक्त होने वाले विभिन्न पदार्थों की मात्राएँ उनके रासायनिक तुल्यांकी भारों के अनुपात में होती हैं। माइकल फैराडे ने दोनों नियम 1833-34 में प्रकाशित किए।
- फैराडे: एक मोल इलेक्ट्रॉनों का आवेश, 96,487 कूलॉम, एक फैराडे कहलाता है। आवेश = ऐम्पियर में धारा × सेकंड में समय, और व्यापारिक धातु-उत्पादन में 50,000 ऐम्पियर तक की धाराएँ लगती हैं।
- लवण-जल का वैद्युत अपघटन: जलीय सोडियम क्लोराइड के वैद्युत अपघटन से सोडियम धातु नहीं, बल्कि सोडियम हाइड्रॉक्साइड, क्लोरीन और हाइड्रोजन मिलते हैं, क्योंकि कैथोड पर सोडियम आयनों की जगह जल का अपचयन होता है।
जल का वैद्युत अपघटन विद्युत से जल को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ता है। विद्यालय के प्रयोग में दो कार्बन इलेक्ट्रोडों के बीच जल में थोड़ा तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल मिलाया जाता है, और दोनों इलेक्ट्रोडों पर गैस के बुलबुले बनते हैं। आदर्श रूप से हाइड्रोजन की मात्रा ऑक्सीजन की दोगुनी होती है, जो 2H₂O → 2H₂ + O₂ से मेल खाती है। जल के विघटन से स्वयं कोई ग्रीनहाउस गैस नहीं निकलती, इसलिए नवीकरणीय बिजली से इस तरह बनी हाइड्रोजन ही आगे चर्चित हरित हाइड्रोजन है।
बैटरियाँ: प्राथमिक, संचायक, लिथियम-आयन और सोडियम-आयन सेल
प्राथमिक बैटरियाँ: शुष्क सेल और मर्करी सेल
बैटरी श्रेणीक्रम में जुड़े एक या अधिक गैल्वैनी सेल है। व्यावहारिक उपयोग के लिए उसे हल्का और सुसंबद्ध होना चाहिए, और उपयोग के दौरान उसकी वोल्टता में अधिक परिवर्तन नहीं होना चाहिए। प्राथमिक बैटरियों में अभिक्रिया केवल एक बार होती है: अभिकारक समाप्त होते ही बैटरी निष्क्रिय हो जाती है और फिर काम नहीं आती। शुष्क सेल इसका सबसे परिचित उदाहरण है।
- शुष्क सेल (लैक्लांशे सेल): ज़िंक का पात्र ऐनोड है, और चूर्णित मैंगनीज़ डाइऑक्साइड तथा कार्बन से घिरी कार्बन (ग्रेफ़ाइट) की छड़ कैथोड। दोनों के बीच का स्थान अमोनियम क्लोराइड और ज़िंक क्लोराइड के नम पेस्ट से भरा होता है, जो वैद्युतअपघट्य है। यह लगभग 1.5 V देता है और घड़ियाँ तथा ट्रांज़िस्टर रेडियो चलाता है।
- शुष्क सेल के भीतर: ऐनोड पर ज़िंक का ऑक्सीकरण होकर ज़िंक आयन बनते हैं, जबकि कैथोड पर मैंगनीज़ +4 से +3 ऑक्सीकरण अवस्था में अपचयित होता है; बनी अमोनिया ज़िंक आयनों के साथ संकुल बनाती है।
- ज़िंक-कार्बन बैटरी: इसी उपयोग-के-बाद-फेंक शुष्क सेल का आम नाम, उपभोक्ता उपकरणों के लिए बनी सबसे पुरानी बैटरियों में से एक, जो कम शक्ति वाले उपकरणों के लिए आज भी सस्ता विकल्प है।
- मर्करी सेल: श्रवण-यंत्र और घड़ियों जैसी कम धारा वाली युक्तियों में प्रयुक्त। इसमें ज़िंक-मर्करी अमलगम ऐनोड, मर्करी (II) ऑक्साइड और कार्बन का पेस्ट कैथोड, और पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड तथा ज़िंक ऑक्साइड का पेस्ट वैद्युतअपघट्य होता है। इसका लगभग 1.35 V का विभव पूरे जीवनकाल स्थिर रहता है, क्योंकि विलयन में किसी आयन की सांद्रता नहीं बदलती।
संचायक बैटरियाँ: लेड-अम्ल और निकेल-कैडमियम सेल
संचायक बैटरी को उपयोग के बाद विपरीत दिशा में धारा प्रवाहित करके फिर आवेशित किया जा सकता है, और अच्छी संचायक बैटरी डिस्चार्ज और चार्ज के अनेक चक्र झेल लेती है। सबसे महत्त्वपूर्ण लेड संचायक बैटरी है, जो वाहनों और इन्वर्टरों में प्रयुक्त होती है और जिसे 1859 में गैस्टन प्लांटे ने पहली पुनः आवेशनीय बैटरी के रूप में बनाया।
- बनावट: लेड का ऐनोड और लेड डाइऑक्साइड (PbO₂) से भरी लेड की ग्रिड का कैथोड, वैद्युतअपघट्य के रूप में सल्फ़्यूरिक अम्ल के 38 प्रतिशत विलयन में।
- डिस्चार्ज और चार्ज: उपयोग में दोनों इलेक्ट्रोड लेड सल्फ़ेट बन जाते हैं: Pb + PbO₂ + 2H₂SO₄ → 2PbSO₄ + 2H₂O। चार्ज करने पर अभिक्रिया उलट जाती है और लेड सल्फ़ेट फिर लेड और लेड डाइऑक्साइड बन जाता है।
- कार बैटरी: अधिकांश यात्री वाहनों में श्रेणीक्रम में जुड़े छह लेड-अम्ल सेल 12 वोल्ट की प्रणाली बनाते हैं, जबकि भारी ट्रक 24 वोल्ट के लिए बारह सेल लगाते हैं। इसका मुख्य काम स्टार्टर मोटर चलाना है, इसलिए इसे SLI बैटरी कहते हैं: स्टार्टिंग, लाइटिंग और इग्निशन।
- क्षमता: बैटरी की क्षमता ऐम्पियर-घंटे (Ah) में बताई जाती है। एक ऐम्पियर-घंटा एक घंटे तक बहने वाली एक ऐम्पियर की स्थिर धारा का आवेश है, अर्थात् 3,600 कूलॉम।
- पुनर्चक्रण: 12 वोल्ट की कार बैटरी विश्व में सबसे अधिक पुनर्चक्रित होने वाला उत्पाद है, और बेसल अभिसमय के अंतर्गत पुरानी लेड-अम्ल बैटरी परिसंकटमय अपशिष्ट है।
- निकेल-कैडमियम सेल: इसमें निकेल ऑक्साइड हाइड्रॉक्साइड और धात्विक कैडमियम इलेक्ट्रोड होते हैं, और यह लगभग 1.2 V देता है। यह लेड संचायक सेल से अधिक चलता है पर बनाने में महँगा है, और इसके सुवाह्य सीलबंद रूप छोटे उपकरणों में साधारण शुष्क सेलों की जगह ले सकते हैं।
लिथियम-आयन बैटरी: कैसे काम करती है और किससे बनती है
जो पुनः आवेशनीय बैटरी विद्युत चालक ठोस इलेक्ट्रोडों में लिथियम आयनों के उत्क्रमणीय आवागमन से ऊर्जा संचित करती है, वह लिथियम-आयन बैटरी है; इस प्रक्रिया को अंतर्वेशन (इंटरकैलेशन) कहते हैं। दूसरी पुनः आवेशनीय बैटरियों की तुलना में इसका ऊर्जा घनत्व और दक्षता प्रायः अधिक और आयु लंबी होती है, इसीलिए यह फ़ोन, लैपटॉप और विद्युत कारें चलाती है और ग्रिड-स्तर के भंडारण में प्रयुक्त होती है।
- काम कैसे करती है: डिस्चार्ज के समय लिथियम आयन वैद्युतअपघट्य से होकर जाते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन बाहरी परिपथ से होकर कैथोड तक; चार्जिंग उन्हें फिर ग्रेफ़ाइट में लौटा देती है। एक सेल की नाममात्र वोल्टता 3.6 या 3.7 V होती है।
- ऐनोड और वैद्युतअपघट्य: ऋण इलेक्ट्रोड प्रायः ग्रेफ़ाइट का होता है, जिसमें क्षमता बढ़ाने के लिए कभी सिलिकॉन मिलाया जाता है; वैद्युतअपघट्य प्रायः कार्बनिक कार्बोनेटों में घुला लिथियम हेक्साफ़्लोरोफ़ॉस्फ़ेट होता है।
- कैथोड: बैटरियों के प्रकार उनके कैथोड से जाने जाते हैं: हाथ के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में लिथियम कोबाल्ट ऑक्साइड (LCO); लंबी आयु के लिए लिथियम आयरन फ़ॉस्फ़ेट (LFP), लिथियम मैंगनीज़ ऑक्साइड और लिथियम निकेल मैंगनीज़ कोबाल्ट ऑक्साइड (NMC), जिनमें NMC विद्युत वाहनों में व्यापक रूप से प्रयुक्त है।
- आविष्कार: स्टैनली विटिंगहैम ने 1970 के दशक में पहली पुनः आवेशनीय लिथियम-आयन बैटरी बनाई, जॉन गुडइनफ़ ने 1980 में लिथियम कोबाल्ट ऑक्साइड कैथोड दिया, और अकीरा योशिनो ने 1985 में कार्बन ऐनोड वाला पहला प्रोटोटाइप बनाया। बैटरी 1991 में बाज़ार में आई, और तीनों को 2019 का रसायन नोबेल मिला।
- जोखिम: ज्वलनशील वैद्युतअपघट्य इन सेलों को आग या विस्फोट का खतरा बनाता है। बहुत तेज़ या ठंड में चार्ज करने से ऐनोड पर लिथियम धातु जम सकती है, और उसके डेंड्राइट पृथक्कारी को भेदकर सेल को लघुपथित कर सकते हैं।
- खनिज: लिथियम का खनन प्रायः शुष्क क्षेत्रों में बहुत पानी लेता है, और कोबाल्ट संघर्ष-खनिज हो सकता है; विश्व की कोबाल्ट आपूर्ति का लगभग 75 प्रतिशत कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य से आता है।
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अपने सेल स्वयं बनाता है। ISRO के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने उपग्रहों और प्रक्षेपण यानों के लिए 1.5 Ah से 100 Ah तक के लिथियम-आयन सेल विकसित और प्रमाणित किए हैं, और 2018 में यह तकनीक उद्योग को दी, जिस पर 141 कंपनियों ने रुचि दिखाई। इसके सिलिकॉन-ग्रेफ़ाइट ऐनोड वाले सेल 190 Wh/kg तक पहुँचते हैं, जबकि इसके मानक लिथियम-आयन सेल 157 Wh/kg।
सोडियम-आयन बैटरी, लिथियम आयरन फ़ॉस्फ़ेट और लिथियम के अन्य विकल्प
लिथियम की ऊँची कीमत, असमान भौगोलिक वितरण और हानिकारक खनन ने दूसरे रसायनों की खोज को बढ़ाया है। सोडियम-आयन बैटरी इसी सिद्धांत पर काम करती है, पर सोडियम आयन (Na⁺) ले जाती है; सोडियम आवर्त सारणी (अंग्रेज़ी में) में लिथियम के ही समूह में है, इसलिए दोनों का व्यवहार मिलता-जुलता है, और सोडियम प्रचुर है, विशेषकर खारे पानी में। फिर भी इसका बड़ा आयन इलेक्ट्रोडों में अधिक धीरे जाता है।
| तकनीक | किस बात में अलग | आज की स्थिति |
|---|---|---|
| सोडियम-आयन | लिथियम की जगह सोडियम आयन; कई प्रकारों में कोबाल्ट, कॉपर या निकेल नहीं चाहिए | 2010 के दशक से व्यावसायिक रुचि |
| लिथियम आयरन फ़ॉस्फ़ेट (LFP) | आयरन फ़ॉस्फ़ेट कैथोड: कम लागत, अधिक सुरक्षा, लंबी आयु, NMC से प्रति kg कम ऊर्जा | सितंबर 2022 तक EV बैटरी बाज़ार का 31 प्रतिशत |
| ठोस-अवस्था | द्रव या जेल की जगह ठोस वैद्युतअपघट्य; लिथियम धातु का ऐनोड लगा सकती है | 2026 में भी बड़े पैमाने पर व्यावसायिक नहीं |
| रेडॉक्स फ़्लो | झिल्ली के दोनों ओर पंप किए जाने वाले दो द्रव; ईंधन सेल की तरह फिर भरी या चार्ज की जा सकती है | ऊर्जा अपने द्रवों में संचित करती है |
ईंधन सेल और हाइड्रोजन
ईंधन सेल: हाइड्रोजन ईंधन सेल कैसे काम करता है
जो गैल्वैनी सेल किसी ईंधन, प्रायः हाइड्रोजन, और किसी ऑक्सीकारक, प्रायः ऑक्सीजन, की रासायनिक ऊर्जा को सीधे विद्युत में बदलता है, उसे ईंधन सेल कहते हैं। बैटरी अपने अभिकारक भीतर रखती है, जबकि ईंधन सेल को ईंधन और ऑक्सीजन की निरंतर आपूर्ति चाहिए, और जब तक ये मिलते रहें, वह चलता रहता है। सर विलियम ग्रोव ने 1830 के दशक में पहले साधारण ईंधन सेल बनाए।
- हाइड्रोजन-ऑक्सीजन सेल: हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को सरंध्र कार्बन इलेक्ट्रोडों से होकर सांद्र सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन में प्रवाहित किया जाता है, और इलेक्ट्रोडों में बारीक प्लैटिनम या पैलेडियम उत्प्रेरक का काम करते हैं। कुल अभिक्रिया 2H₂ + O₂ → 2H₂O है। इसी सेल ने अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम को बिजली दी, और इसका जल अंतरिक्ष यात्रियों के पेयजल में मिलाया गया।
- आवेश का प्रवाह: ऐनोड पर उत्प्रेरक ईंधन को आयनों और इलेक्ट्रॉनों में ऑक्सीकृत करता है; आयन वैद्युतअपघट्य को पार करते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन बाहरी परिपथ से दिष्ट धारा के रूप में बहते हैं।
- उप-उत्पाद: विद्युत के साथ ईंधन सेल जल-वाष्प और ऊष्मा देता है, और ईंधन के अनुसार नाइट्रोजन डाइऑक्साइड तथा अन्य उत्सर्जनों की बहुत थोड़ी मात्रा भी।
- स्टैक: एक सेल केवल लगभग 0.7 V देता है, इसलिए उपयोगी वोल्टता के लिए सेलों को श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।
- ईंधन सेल के प्रकार: ईंधन सेलों का वर्गीकरण उनके वैद्युतअपघट्य से होता है; प्रोटॉन-विनिमय झिल्ली (PEM) सेल लगभग 1 सेकंड में और ठोस ऑक्साइड सेल लगभग 10 मिनट में शुरू होता है।
- ईंधन सेल कहाँ काम आते हैं: दूरस्थ स्थलों के सुवाह्य बिजली तंत्र, भवनों की मुख्य और बैकअप बिजली, और फ़ोर्कलिफ़्ट तथा कारों से लेकर बसों, रेलगाड़ियों, नावों और पनडुब्बियों तक के वाहन।
ईंधन सेल रासायनिक ऊर्जा को पहले भाप बनाए बिना सीधे विद्युत में बदलता है, इसलिए कम ऊर्जा व्यर्थ जाती है। NCERT इसकी दक्षता लगभग 70 प्रतिशत बताती है, जबकि तापीय बिजलीघर की लगभग 40 प्रतिशत; अन्य विवरण चालू सेलों की दक्षता 40 से 60 प्रतिशत बताते हैं, जो व्यर्थ ऊष्मा से भवन गर्म करने पर लगभग 85 प्रतिशत तक पहुँचती है।
सूक्ष्मजीवी ईंधन सेल: जीवाणुओं से विद्युत
जो ईंधन सेल धातु उत्प्रेरक की जगह जीवाणुओं का उपयोग करता है, वह सूक्ष्मजीवी ईंधन सेल है। जीवाणु ऐनोड पर ईंधन का ऑक्सीकरण करते हैं, और इलेक्ट्रॉन बाहरी परिपथ से होकर कैथोड तक जाते हैं, जहाँ वे ऑक्सीजन जैसे किसी ऑक्सीकारक को अपचयित करते हैं। अधिकांश ऐसे सेल कार्बनिक इलेक्ट्रॉन-दाता लेते हैं, जो कार्बन डाइऑक्साइड, प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन में ऑक्सीकृत होता है, हालाँकि सल्फ़र यौगिक और हाइड्रोजन भी प्रयुक्त हुए हैं।
- इतिहास: माइकल क्रेसे पॉटर ने 1911 में यीस्ट, सैकरोमाइसीज़ सेरेविसी, से बिजली बनाई; ऐसे सेल जिनमें जीवाणु किसी रासायनिक मध्यस्थ के बिना सीधे ऐनोड को इलेक्ट्रॉन देते हैं, 1970 के दशक में आए।
- अपशिष्ट जल उपचार: 21वीं सदी में सूक्ष्मजीवी ईंधन सेल अपशिष्ट जल उपचार में व्यावसायिक रूप से प्रयुक्त होने लगे हैं, जहाँ वे पानी साफ़ करते हुए बिजली बनाते हैं।
- जैव-उपचार: ऐनोड पर सूक्ष्मजीव कार्बनिक प्रदूषकों को तोड़ते हैं।
हाइड्रोजन ईंधन सेल वाहन, H-CNG और हरित हाइड्रोजन
हाइड्रोजन ईंधन सेल वाहन ऐसे विद्युत वाहन हैं जिनकी मोटर उस ईंधन सेल की बिजली से चलती है जो संपीडित हाइड्रोजन को वायु की ऑक्सीजन से मिलाता है, और कभी-कभी साथ में एक छोटी बैटरी भी होती है। अधिकांश को शून्य-उत्सर्जन वाहन माना जाता है, क्योंकि निकास में केवल जल होता है। पहला, जनरल मोटर्स का इलेक्ट्रोवैन, 1966 में आया, और सरकार से प्रमाणित पहले व्यावसायिक ईंधन सेल वाहन 2002 में पट्टे पर दिए जाने लगे।
हाइड्रोजन को जलाया भी जा सकता है। भारत ने 2016 में आंतरिक दहन इंजनों के लिए हाइड्रोजन को वाहन-ईंधन के रूप में अधिसूचित किया, और सितंबर 2020 में CNG इंजनों में H-CNG, अर्थात् संपीडित प्राकृतिक गैस के साथ 18 प्रतिशत हाइड्रोजन का मिश्रण, की अनुमति दी; दिल्ली में 50 H-CNG बसों का प्रदर्शन हुआ। मिश्रण की हाइड्रोजन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटाती है, और मौजूदा CNG स्टेशनों में थोड़े बदलाव से इसे भरा जा सकता है, इसलिए यह एक अंतरिम कदम है। फिर भी मिश्रण का चार-पाँचवें से अधिक भाग प्राकृतिक गैस, एक कार्बन ईंधन, है, इसलिए यह कार्बन उत्सर्जन घटाता है, समाप्त नहीं करता।
- हरित हाइड्रोजन: नवीकरणीय बिजली से जल के वैद्युत अपघटन से, या जैव-भार से बनी हाइड्रोजन। भारत के मानक के अनुसार यह तभी हरित है जब प्रक्रिया प्रति kg हाइड्रोजन पर 2 kg CO₂ समतुल्य से अधिक उत्सर्जन न करे।
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: 4 जनवरी 2023 को ₹19,744 करोड़ के साथ स्वीकृत, जिसमें इलेक्ट्रोलाइज़र बनाने और हरित हाइड्रोजन उत्पादन के प्रोत्साहनों के SIGHT कार्यक्रम के लिए ₹17,490 करोड़ हैं। इसका लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष कम से कम 50 लाख टन है, लगभग 125 GW नई नवीकरणीय क्षमता के साथ, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अधीन।
- उद्योग में हरित हाइड्रोजन: उर्वरक संयंत्रों में जीवाश्म कच्चे माल की जगह हरित अमोनिया, तेलशोधक कारखानों में जीवाश्म-आधारित हाइड्रोजन की जगह हरित हाइड्रोजन, और लौह अयस्क के अपचयन के लिए इस्पात की पाँच पायलट परियोजनाएँ।
- प्राकृतिक गैस में मिश्रण: NTPC ने जनवरी 2023 में सूरत के अपने कवास टाउनशिप के घरों को आपूर्ति करने वाले पाइप्ड प्राकृतिक गैस नेटवर्क में हरित हाइड्रोजन मिलाना शुरू किया, आयतन के अनुसार 5 प्रतिशत से, चरणबद्ध रूप से 20 प्रतिशत के लक्ष्य के साथ। यह कवास के गैस टरबाइनों में बिजली बनाने के लिए हाइड्रोजन के सह-दहन का अध्ययन भी कर रहा है।
- सड़क परिवहन की पायलट परियोजनाएँ: पाँच परियोजनाएँ 10 मार्गों पर 37 हाइड्रोजन बसों और ट्रकों को समेटती हैं, जिनमें 15 ईंधन सेल से और 22 हाइड्रोजन आंतरिक दहन इंजन से चलते हैं।
मिशन की प्रगति और SIGHT के पुरस्कार राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (अंग्रेज़ी में) वाले करंट अफ़ेयर्स लेख में दिए गए हैं।
भारत के ऊर्जा संक्रमण में बैटरियाँ
विद्युत वाहन और बैटरी भंडारण: उत्सर्जन और लाभ
विद्युत वाहन वहीं उत्सर्जन घटाते हैं जहाँ लोग रहते हैं। बैटरी विद्युत वाहन से टेलपाइप उत्सर्जन नहीं होता, और उसकी टैंक-से-पहिये तक की दक्षता आंतरिक दहन इंजन से लगभग तीन गुना है। खड़े रहने पर यह ऊर्जा नहीं लेता, और पुनर्योजी ब्रेकिंग वह ऊर्जा वापस लेती है जो घर्षण ब्रेक ऊष्मा के रूप में खो देते हैं।
पूरा लाभ इस पर निर्भर है कि बिजली कैसे बनती है। एक EV बनाने में औसतन तुलनीय पारंपरिक कार से लगभग 50 प्रतिशत अधिक CO₂ निकलती है, पर जो ईंधन वह कभी नहीं जलाता, उससे यह अंतर उसके जीवनकाल में पूरा हो जाता है। भारत के कार्बन-प्रधान ग्रिड पर पूरे जीवन-चक्र की बचत लगभग 20 प्रतिशत है, जबकि चीन में लगभग 40 प्रतिशत, और ग्रिड जितना स्वच्छ होगा, यह उतनी बढ़ेगी।
- सेल निर्माण: PLI योजना उन्नत रसायन सेल बैटरी भंडारण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम, 12 मई 2021 को ₹18,100 करोड़ के साथ स्वीकृत, 50 GWh घरेलू क्षमता का लक्ष्य रखती है। चार कंपनियों को 40 GWh दिए गए हैं, पर दिसंबर 2025 तक केवल 1 GWh स्थापित हुआ था; मंत्रालय बाधाओं में तकनीक की अनुपलब्धता, कौशल की कमी और आयातित उपकरण गिनाता है। मंत्रिमंडल को आशा थी कि इन सेलों से EV तेज़ी से अपनाए जाएँगे और कार्यक्रम की अवधि में तेल आयात पर होने वाले खर्च में ₹2 लाख करोड़ से ₹2.5 लाख करोड़ की बचत होगी।
- बैटरी खनिज: 29 जनवरी 2025 को ₹16,300 करोड़ के साथ स्वीकृत राष्ट्रीय अति आवश्यक खनिज मिशन, और खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड द्वारा अर्जेंटीना में लिए गए लिथियम ब्राइन के पाँच ब्लॉक आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए हैं। सितंबर 2026 में भारतीय कंपनी लोहुम ने ज़िम्बाब्वे से लिथियम अयस्क की पहली खेप भेजी, जिससे वह विदेशी परिसंपत्तियों से लिथियम बनाने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी, और केंद्रीय खान सचिव ने कहा कि लिथियम और निकेल के प्रसंस्करण की नीति तैयार हो रही है।
- वितरित ऊर्जा संसाधन: लोड के पास जुड़ी 10 MW या उससे छोटी उत्पादन और भंडारण इकाइयाँ: रूफ़टॉप सौर, बायोमास जेनरेटर, ईंधन सेल और ग्रिड से जुड़ा बैटरी भंडारण।
- सीमाएँ: लिथियम, कोबाल्ट और निकेल के खनन से स्थानीय पर्यावरणीय खतरे होते हैं, और विद्युत कारें सड़क पर कारों की जगह और पार्किंग की समस्या नहीं घटातीं।
भारत अपने ग्रिड से बढ़ते EV बेड़े को कैसे चार्ज करेगा, यह भारत की EV और ग्रिड रणनीति (अंग्रेज़ी में) वाले करंट अफ़ेयर्स लेख में दिया गया है।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के विगत वर्षों के प्रश्न
विगत वर्षों के प्रश्न: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा इस लेख को पढ़ने के बाद आप यूपीएससी के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिख सकेंगे। हर प्रश्न के साथ एक खुलने वाली रूपरेखा है, जो बताती है कि परीक्षा में उसे कैसे हल करें।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2009 (हिंदी रूपांतर)शुष्क सेल (बैटरी) में निम्नलिखित में से कौन-से वैद्युतअपघट्य के रूप में प्रयुक्त होते हैं?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: शुष्क सेल की बनावट याद करें। ज़िंक का पात्र ऐनोड है; चूर्णित मैंगनीज़ डाइऑक्साइड और कार्बन से घिरी कार्बन (ग्रेफ़ाइट) की छड़ कैथोड; और दोनों के बीच का स्थान अमोनियम क्लोराइड (NH₄Cl) तथा ज़िंक क्लोराइड (ZnCl₂) के नम पेस्ट से भरा होता है। प्रश्न दोनों वैद्युतअपघट्य पूछता है, इसलिए वह विकल्प चुनें जिसमें ये दोनों लवण हों और कुछ नहीं।
इस भ्रम से बचें: दो विकल्पों में एक-एक सही लवण है; दोनों सही लवण केवल एक में हैं।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) अमोनियम क्लोराइड और ज़िंक क्लोराइड: सही। यही दोनों लवण ज़िंक पात्र और कार्बन छड़ के बीच का नम पेस्ट बनाते हैं।
- (b) सोडियम क्लोराइड और कैल्शियम क्लोराइड: गलत। शुष्क सेल के पेस्ट में इनमें से कोई नहीं होता।
- (c) मैग्नीशियम क्लोराइड और ज़िंक क्लोराइड: गलत। ज़िंक क्लोराइड सही है, पर उसका साथी अमोनियम क्लोराइड है, मैग्नीशियम क्लोराइड नहीं।
- (d) अमोनियम क्लोराइड और कैल्शियम क्लोराइड: गलत। अमोनियम क्लोराइड सही है, पर उसका साथी ज़िंक क्लोराइड है, कैल्शियम क्लोराइड नहीं।
उत्तर: पेस्ट अमोनियम क्लोराइड और ज़िंक क्लोराइड का है: विकल्प (a)।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 1999 (हिंदी रूपांतर)मोटर कार की बैटरी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- I. वोल्टता प्रायः 12 V होती है।
- II. प्रयुक्त वैद्युतअपघट्य हाइड्रोक्लोरिक अम्ल है।
- III. इलेक्ट्रोड लेड और कॉपर के होते हैं।
- IV. क्षमता ऐम्पियर-घंटे में व्यक्त की जाती है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: हर कथन को लेड संचायक बैटरी से मिलाएँ। I: कार बैटरी में लगभग 2 वोल्ट के छह लेड-अम्ल सेल श्रेणीक्रम में होते हैं, अर्थात् नाममात्र 12 वोल्ट, इसलिए I सही है। II: वैद्युतअपघट्य सल्फ़्यूरिक अम्ल का 38 प्रतिशत विलयन है, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल नहीं, इसलिए II गलत है। III: इलेक्ट्रोड लेड (ऐनोड) और लेड डाइऑक्साइड से भरी लेड ग्रिड (कैथोड) हैं; कॉपर नहीं है, इसलिए III गलत है। IV: क्षमता ऐम्पियर-घंटे में बताई जाती है, इसलिए IV सही है। सही युग्म I और IV है।
इस भ्रम से बचें: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और कॉपर विश्वसनीय लगते हैं; लेड-अम्ल बैटरी में सल्फ़्यूरिक अम्ल और लेड डाइऑक्साइड होते हैं।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) I और II: गलत। I सही है, पर II गलत है, क्योंकि वैद्युतअपघट्य सल्फ़्यूरिक अम्ल है।
- (b) II और III: गलत। दोनों गलत हैं: अम्ल सल्फ़्यूरिक है और इलेक्ट्रोड लेड तथा लेड डाइऑक्साइड हैं।
- (c) III और IV: गलत। IV सही है, पर III गलत है, क्योंकि कॉपर का इलेक्ट्रोड नहीं होता।
- (d) I और IV: सही। छह सेल 12 V देते हैं, और क्षमता ऐम्पियर-घंटे में व्यक्त होती है।
उत्तर: 12 V और ऐम्पियर-घंटे सही, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और कॉपर गलत: विकल्प (d)।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 1995 (हिंदी रूपांतर)टॉर्च, विद्युत शेवर आदि उपकरणों में आमतौर पर प्रयुक्त पुनः आवेशनीय बैटरियों में निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ-युग्म इलेक्ट्रोड का काम करता है?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: मुख्य शब्द है पुनः आवेशनीय, छोटे उपकरणों के लिए। ज़िंक और कार्बन शुष्क सेल बनाते हैं, जो प्राथमिक सेल है और फिर आवेशित नहीं होता, इसलिए वह हटता है। लेड और लेड डाइऑक्साइड (लेड परऑक्साइड) पुनः आवेशनीय लेड संचायक बैटरी बनाते हैं, पर वह वाहनों और इन्वर्टरों की भारी बैटरी है। छोटा पुनः आवेशनीय सेल, जिसके सुवाह्य सीलबंद रूप शुष्क सेलों की जगह लेते हैं, निकेल-कैडमियम सेल है।
इस भ्रम से बचें: लेड और लेड परऑक्साइड भी पुनः आवेशनीय है, पर वह कार की बैटरी है, टॉर्च या शेवर का सेल नहीं।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) निकेल और कैडमियम: सही। Ni-Cd सेल में निकेल ऑक्साइड हाइड्रॉक्साइड और धात्विक कैडमियम होते हैं, और इसके सुवाह्य सीलबंद रूप छोटे उपकरणों में शुष्क सेलों की जगह लेते हैं।
- (b) ज़िंक और कार्बन: गलत। यह उपयोग-के-बाद-फेंक शुष्क सेल है, प्राथमिक बैटरी, जो फिर आवेशित नहीं होती।
- (c) लेड परऑक्साइड और लेड: गलत। यह लेड संचायक बैटरी है, पुनः आवेशनीय पर भारी, जो वाहनों और इन्वर्टरों में लगती है।
- (d) आयरन और कैडमियम: गलत। पुनः आवेशनीय कैडमियम सेल में कैडमियम का साथी निकेल है, आयरन नहीं।
उत्तर: छोटा पुनः आवेशनीय सेल निकेल और कैडमियम का: विकल्प (a)।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2025विद्युत् वाहन बैटरियों के संदर्भ में, निम्नलिखित तत्त्वों पर विचार कीजिए :
- I. कोबाल्ट
- II. ग्रेफाइट
- III. लिथियम
- IV. निकेल
उपर्युक्त में से कितने सामान्यतया बैटरी के कैथोड बनाने के लिए उपयुक्त होते हैं?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: हर तत्व को कैथोड या ऐनोड में रखें। कोबाल्ट: लिथियम कोबाल्ट ऑक्साइड (LCO) और निकेल मैंगनीज़ कोबाल्ट ऑक्साइड (NMC) कैथोड में, इसलिए हाँ। ग्रेफ़ाइट: ऋण इलेक्ट्रोड, अर्थात् ऐनोड, इसलिए नहीं। लिथियम: हर लिथियम-आयन कैथोड लिथियम का यौगिक है (LCO, LFP, NMC), इसलिए हाँ। निकेल: विद्युत वाहनों में व्यापक NMC कैथोड में, इसलिए हाँ। चार में से तीन।
इस भ्रम से बचें: ग्रेफ़ाइट हर लिथियम-आयन सेल में होता है, पर ऐनोड के रूप में।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) केवल एक: गलत। कोबाल्ट, लिथियम और निकेल, तीनों आम कैथोडों में मिलते हैं।
- (b) केवल दो: गलत। कैथोड के पदार्थ दो नहीं, तीन तत्व हैं।
- (c) केवल तीन: सही। कोबाल्ट, लिथियम और निकेल कैथोड बनाते हैं; ग्रेफ़ाइट ऐनोड बनाता है।
- (d) सभी चार: गलत। ग्रेफ़ाइट ऋण इलेक्ट्रोड है, कैथोड का भाग नहीं।
उत्तर: ग्रेफ़ाइट ऐनोड है, इसलिए तीन: विकल्प (c)।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2023संसार का लगभग तीन-चौथाई कोबाल्ट, जो विद्युत् मोटर वाहनों की बैटरी के निर्माण के लिए आवश्यक धातु है, किस देश द्वारा उत्पादित किया जाता है?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: कोबाल्ट मुख्यतः कॉपर और निकेल खनन का उप-उत्पाद है, और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य तथा ज़ाम्बिया की कॉपरबेल्ट से विश्व का अधिकांश कोबाल्ट निकलता है; अकेला कांगो विश्व आपूर्ति का लगभग 75 प्रतिशत देता है। तीन-चौथाई कांगो से मेल खाता है।
इस भ्रम से बचें: अर्जेंटीना बैटरी खनिजों से लिथियम के कारण जुड़ा है, कोबाल्ट से नहीं।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) अर्जेंटीना: गलत। बैटरी आपूर्ति शृंखला में यह खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड के लिथियम ब्राइन ब्लॉकों की जगह के रूप में आता है, कोबाल्ट उत्पादक के रूप में नहीं।
- (b) बोत्सवाना: गलत। यह उस कॉपरबेल्ट का भाग नहीं, जहाँ से विश्व का अधिकांश कोबाल्ट निकलता है।
- (c) कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य: सही। यह विश्व की कोबाल्ट आपूर्ति का लगभग 75 प्रतिशत देता है।
- (d) कज़ाख़िस्तान: गलत। यह कांगो-ज़ाम्बिया की उस कॉपरबेल्ट का भाग नहीं, जो अधिकांश कोबाल्ट देती है।
उत्तर: विश्व का लगभग तीन-चौथाई कोबाल्ट कांगो देता है: विकल्प (c)।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2015 (हिंदी रूपांतर)'ईंधन सेलों' के संदर्भ में, जिनमें विद्युत बनाने के लिए हाइड्रोजन-समृद्ध ईंधन और ऑक्सीजन का उपयोग होता है, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- यदि ईंधन के रूप में शुद्ध हाइड्रोजन का उपयोग हो, तो ईंधन सेल उप-उत्पाद के रूप में ऊष्मा और जल छोड़ता है।
- ईंधन सेलों का उपयोग भवनों को बिजली देने के लिए हो सकता है, लैपटॉप कंप्यूटर जैसे छोटे उपकरणों के लिए नहीं।
- ईंधन सेल प्रत्यावर्ती धारा (AC) के रूप में विद्युत बनाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: हर कथन परखें। कथन 1: शुद्ध हाइड्रोजन पर चलता ईंधन सेल विद्युत के साथ जल-वाष्प और ऊष्मा देता है, इसलिए यह सही है। कथन 2: ईंधन सेल भवनों को बिजली देते हैं, पर सुवाह्य बिजली तंत्र के रूप में भी बनते हैं, इसलिए यह दावा कि वे छोटे उपकरणों के काम नहीं आते, गलत है। कथन 3: इलेक्ट्रॉन ऐनोड से बाहरी परिपथ होकर कैथोड तक एक ही दिशा में बहते हैं, जो दिष्ट धारा है, इसलिए यह गलत है। केवल कथन 1 सही है।
इस भ्रम से बचें: कथन 2 सावधान लगता है पर गलत है: ईंधन सेल भवनों के साथ सुवाह्य उपकरणों के भी काम आते हैं।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) केवल 1: सही। जल और ऊष्मा उप-उत्पाद हैं; कथन 2 और 3 गलत हैं।
- (b) केवल 2 और 3: गलत। दोनों गलत हैं: ईंधन सेल सुवाह्य बिजली भी देते हैं, और दिष्ट धारा बनाते हैं।
- (c) केवल 1 और 3: गलत। कथन 3 गलत है, क्योंकि ईंधन सेल दिष्ट धारा बनाते हैं, प्रत्यावर्ती नहीं।
- (d) 1, 2 और 3: गलत। कथन 2 और 3 गलत हैं।
उत्तर: केवल जल और ऊष्मा वाला कथन सही: विकल्प (a)।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2010 (हिंदी रूपांतर)हाइड्रोजन ईंधन सेल वाहन 'निकास' के रूप में निम्नलिखित में से क्या छोड़ते हैं?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: सेल की कुल अभिक्रिया लिखें: 2H₂ + O₂ → 2H₂O। भीतर केवल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन जाती हैं, इसलिए निकास में केवल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के परमाणु हो सकते हैं, और समीकरण जल देता है।
इस भ्रम से बचें: हाइड्रोजन परऑक्साइड में भी केवल H और O हैं, पर सेल का उत्पाद जल है।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) NH₃: गलत। अमोनिया में नाइट्रोजन है, जो सेल की अभिक्रिया का अभिकारक नहीं।
- (b) CH₄: गलत। मीथेन में कार्बन है; शुद्ध हाइड्रोजन सेल के पास छोड़ने को कार्बन नहीं।
- (c) H₂O: सही। हाइड्रोजन और ऑक्सीजन मिलकर जल बनाते हैं।
- (d) H₂O₂: गलत। सेल की अभिक्रिया जल बनाती है, 2H₂ + O₂ → 2H₂O, हाइड्रोजन परऑक्साइड नहीं।
उत्तर: सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का एकमात्र उत्पाद जल है: विकल्प (c)।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2024निम्नलिखित में से कौन-सा हाइड्रोजन द्वारा चालित फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक वाहनों से निकलने वाला निर्वातक नली उत्सर्जन है ?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: हाइड्रोजन ईंधन सेल वाहन संपीडित हाइड्रोजन को वायु की ऑक्सीजन से मिलाता है; ऊष्मा के साथ निकलने वाला उत्पाद जल-वाष्प है। जो कुछ इस उत्पाद से अलग है, उसे हटा दें।
इस भ्रम से बचें: ऑक्सीजन वायु से सेल में जाती है; वह खपती है, निकलती नहीं।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) हाइड्रोजन परऑक्साइड: गलत। सेल की अभिक्रिया जल देती है, हाइड्रोजन परऑक्साइड नहीं।
- (b) हाइड्रोनियम: गलत। हाइड्रोनियम, H₃O⁺, जल में रहने वाला आयन है, निकास नली से निकलने वाली गैस नहीं।
- (c) ऑक्सीजन: गलत। ऑक्सीजन वायु से ली जाने वाली अभिकारक है, जो कैथोड पर खप जाती है।
- (d) जल-वाष्प: सही। ईंधन सेल विद्युत के साथ जल-वाष्प और ऊष्मा देते हैं।
उत्तर: निकास जल-वाष्प है: विकल्प (d)।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2011 (हिंदी रूपांतर)सूक्ष्मजीवी ईंधन सेलों को धारणीय ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। क्यों?
- वे कुछ आधारद्रव्यों से विद्युत बनाने के लिए जीवित जीवों को उत्प्रेरक के रूप में प्रयोग करते हैं।
- वे आधारद्रव्य के रूप में तरह-तरह के अकार्बनिक पदार्थों का प्रयोग करते हैं।
- उन्हें अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों में लगाकर जल साफ़ किया जा सकता है और बिजली बनाई जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: हर कथन परखें। कथन 1: सूक्ष्मजीवी ईंधन सेल जीवाणुओं से उत्प्रेरित अभिक्रियाओं से बिजली बनाते हैं, इसलिए जीवित जीव उत्प्रेरक हैं: सही। कथन 2: अधिकांश सेल कार्बनिक इलेक्ट्रॉन-दाता लेते हैं, जो कार्बन डाइऑक्साइड, प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन में ऑक्सीकृत होता है, इसलिए 'तरह-तरह के अकार्बनिक पदार्थ' गलत है। कथन 3: ये अपशिष्ट जल उपचार में व्यावसायिक रूप से प्रयुक्त होने लगे हैं, जहाँ पानी साफ़ करते हुए बिजली बनाते हैं: सही। कथन 1 और 3।
इस भ्रम से बचें: ईंधन मुख्यतः कार्बनिक पदार्थ है, अकार्बनिक नहीं।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) केवल 1: गलत। कथन 3 भी सही है: ये सेल अपशिष्ट जल उपचार में प्रयुक्त होते हैं।
- (b) केवल 2 और 3: गलत। कथन 2 गलत है, क्योंकि आधारद्रव्य मुख्यतः कार्बनिक हैं।
- (c) केवल 1 और 3: सही। जीवाणु उत्प्रेरक हैं, और ये सेल बिजली बनाते हुए अपशिष्ट जल साफ़ कर सकते हैं।
- (d) 1, 2 और 3: गलत। कथन 2 गलत है।
उत्तर: जीवाणु उत्प्रेरक और अपशिष्ट जल वाला उपयोग सही, अकार्बनिक आधारद्रव्य गलत: विकल्प (c)।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2023हरित हाइड्रोजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- इसे आंतरिक दहन के लिए ईंधन के रूप में सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है।
- इसे प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर ताप या शक्ति जनन के लिए ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
- इसे वाहन चालन के लिए हाइड्रोजन ईंधन प्रकोष्ठ में इस्तेमाल किया जा सकता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: हर उपयोग को भारत के अपने उदाहरणों से मिलाएँ। कथन 1: भारत ने 2016 में आंतरिक दहन इंजनों के लिए हाइड्रोजन को वाहन-ईंधन अधिसूचित किया, और सड़क पायलट के 37 हाइड्रोजन वाहनों में 22 हाइड्रोजन आंतरिक दहन इंजन वाले हैं, इसलिए इसे सीधे जलाया जा सकता है: सही। कथन 2: NTPC अपने कवास टाउनशिप के घरों की पाइप्ड प्राकृतिक गैस में हरित हाइड्रोजन मिलाता है (ताप), और कवास के गैस टरबाइनों में प्राकृतिक गैस के साथ हाइड्रोजन के सह-दहन का अध्ययन कर रहा है (शक्ति): सही। कथन 3: पायलट के 15 वाहन हाइड्रोजन ईंधन सेल से चलते हैं: सही। तीनों।
इस भ्रम से बचें: ताप और शक्ति के लिए प्राकृतिक गैस में मिश्रण वास्तविक है, काल्पनिक नहीं।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) केवल एक: गलत। तीनों उपयोग भारत में चालू हैं या परीक्षण में हैं।
- (b) केवल दो: गलत। इंजन, मिश्रण और ईंधन सेल, तीनों में हाइड्रोजन का उपयोग होता है।
- (c) सभी तीन: सही। हाइड्रोजन इंजन, पाइप्ड गैस और गैस टरबाइनों में मिश्रण, और ईंधन सेल वाहन।
- (d) कोई भी नहीं: गलत। हर कथन का भारत में एक चालू उदाहरण है।
उत्तर: हाइड्रोजन इंजनों में जलती है, प्राकृतिक गैस में मिलती है और ईंधन सेलों में लगती है: विकल्प (c)।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2023निम्नलिखित भारी उद्योगों पर विचार कीजिए :
- उर्वरक संयंत्र
- तेलशोधक कारखाने
- इस्पात संयंत्र
उपर्युक्त में से कितने उद्योगों के विकार्बनन में हरित हाइड्रोजन की महत्त्वपूर्ण भूमिका होने की अपेक्षा है?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन में हर उद्योग के हाइड्रोजन-उपयोग से मिलाएँ। उर्वरक संयंत्र: जीवाश्म-ईंधन आधारित कच्चे माल की जगह हरित अमोनिया। तेलशोधक कारखाने: जीवाश्म-आधारित हाइड्रोजन की जगह हरित हाइड्रोजन। इस्पात संयंत्र: पाँच पायलट परियोजनाएँ लौह अयस्क के अपचयन के लिए हरित हाइड्रोजन परख रही हैं। तीनों।
इस भ्रम से बचें: इस्पात असंबद्ध लग सकता है, पर लौह अयस्क के अपचयन में हाइड्रोजन कार्बन की जगह ले सकती है।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) केवल एक: गलत। तीनों उद्योग हरित हाइड्रोजन से विकार्बनन के लिए गिनाए गए हैं।
- (b) केवल दो: गलत। लौह-अपचयन की पायलट परियोजनाओं से इस्पात भी उर्वरक और तेलशोधन के साथ जुड़ता है।
- (c) सभी तीन: सही। उर्वरकों के लिए हरित अमोनिया, तेलशोधन में हरित हाइड्रोजन, और इस्पात की पायलट परियोजनाएँ।
- (d) कोई भी नहीं: गलत। मिशन में हर उद्योग की भूमिका तय है।
उत्तर: उर्वरक, तेलशोधन और इस्पात, तीनों मिशन में: विकल्प (c)।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2019सार्वजनिक परिवहन में बसों के लिए ईंधन के रूप में हाइड्रोजन संवर्धित CNG (H-CNG) का इस्तेमाल करने के प्रस्तावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- H-CNG के इस्तेमाल का मुख्य लाभ कार्बन मोनोक्साइड के उत्सर्जनों का विलोपन है।
- ईंधन के रूप में H-CNG कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन उत्सर्जनों को कम करती है।
- बसों के लिए ईंधन के रूप में CNG के साथ हाइड्रोजन को आयतन के आधार पर पाँचवें हिस्से तक मिलाया जा सकता है।
- CNG की अपेक्षा H-CNG ईंधन को कम खर्चीला बनाती है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: हर कथन परखें। कथन 1: H-CNG का चार-पाँचवें से अधिक भाग अब भी प्राकृतिक गैस, एक कार्बन ईंधन, है, इसलिए यह कार्बन मोनोक्साइड समाप्त नहीं करता, केवल कार्बन उत्सर्जन घटाता है: गलत। कथन 3: भारत 18 प्रतिशत हाइड्रोजन मिश्रण की अनुमति देता है, और आयतन में 20 प्रतिशत से कम हाइड्रोजन वाले मिश्रण CNG के समान माने जाते हैं, इसलिए पाँचवें हिस्से तक सही है: सही। कथन 2: मिश्रण की हाइड्रोजन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटाती है, और सरकार H-CNG को उत्सर्जन घटाने की अंतरिम तकनीक कहती है, जो कथन से मेल खाता है। अब हटाएँ: (a) और (d) में गलत कथन 1 है, और (c) में सही कथन 3 छूटता है, इसलिए केवल (b) बचता है।
इस भ्रम से बचें: उत्सर्जन घटाना उन्हें समाप्त करना नहीं है; मिश्रण अब भी प्राकृतिक गैस जलाता है।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) केवल 1: गलत। कथन 1 गलत है: मिश्रण अधिकतर प्राकृतिक गैस है और कार्बन मोनोक्साइड समाप्त नहीं करता।
- (b) केवल 2 और 3: सही। कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम, और आयतन में पाँचवें हिस्से तक हाइड्रोजन (भारत में 18 प्रतिशत)।
- (c) केवल 4: गलत। इसमें सही कथन 3 छूट जाता है।
- (d) 1, 2, 3 और 4: गलत। इसमें गलत कथन 1 शामिल है।
उत्तर: कथन 2 और 3: विकल्प (b)।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2024निम्नलिखित पर विचार कीजिए :
- बैटरी भंडारण
- बायोमास जेनरेटर
- ईंधन सेल
- रूफटॉप सौर प्रकाश-वोल्टीय यूनिट
उपर्युक्त में से कितने "वितरित ऊर्जा संसाधन" माने जाते हैं ?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: वितरित ऊर्जा संसाधन 10 MW या उससे छोटी उत्पादन और भंडारण इकाइयाँ हैं, जो लोड के पास ग्रिड या वितरण प्रणाली से जुड़ी हों। बैटरी भंडारण: ग्रिड से जुड़ा भंडारण उपकरण वितरित ऊर्जा संसाधन है। बायोमास जेनरेटर: बायोमास ऐसे तंत्रों के नवीकरणीय स्रोतों में से है। ईंधन सेल: आवासीय ईंधन सेल इकाइयाँ स्थल पर बिजली बनाती हैं। रूफ़टॉप सौर इकाइयाँ: सौर ऊर्जा वितरित स्रोत है। चारों।
इस भ्रम से बचें: बैटरी भंडारण कुछ बनाता नहीं, फिर भी ग्रिड से जुड़ा भंडारण गिना जाता है।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) केवल एक: गलत। चारों लोड के पास ग्रिड से जुड़ी छोटी उत्पादन या भंडारण इकाई की परिभाषा में आते हैं।
- (b) केवल दो: गलत। बायोमास और रूफ़टॉप सौर के साथ भंडारण और ईंधन सेल भी गिने जाते हैं।
- (c) केवल तीन: गलत। लोग बैटरी भंडारण छोड़ देते हैं, पर वह भी गिना जाता है।
- (d) सभी चार: सही। भंडारण, बायोमास जेनरेटर, ईंधन सेल और रूफ़टॉप सौर, सभी वितरित ऊर्जा संसाधन हैं।
उत्तर: चारों: विकल्प (d)।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2023, सामान्य अध्ययन-III (हिंदी रूपांतर)विश्व भर में विद्युत वाहनों को अपनाने की गति तेज़ी से बढ़ रही है। विद्युत वाहन कार्बन उत्सर्जन घटाने में कैसे योगदान देते हैं, और पारंपरिक दहन इंजन वाहनों की तुलना में वे कौन-से प्रमुख लाभ देते हैं?
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: विद्युत वाहन बैटरी में संचित बिजली से चलता है, इसलिए सड़क पर कोई ईंधन नहीं जलाता और टेलपाइप से कुछ नहीं छोड़ता।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- उत्सर्जन: शून्य टेलपाइप उत्सर्जन; टैंक-से-पहिये तक दक्षता दहन इंजन से लगभग तीन गुना; खड़े रहने पर ऊर्जा व्यय नहीं; पुनर्योजी ब्रेकिंग।
- जीवन-चक्र: EV बनाने में लगभग 50 प्रतिशत अधिक CO₂, जो जीवनकाल में पूरी हो जाती है; भारत के ग्रिड पर जीवनभर की बचत लगभग 20 प्रतिशत, जो ग्रिड के विकार्बनन के साथ बढ़ती है।
- लाभ: शहरों में स्वच्छ हवा; तेल आयात पर कम खर्च, ACC कार्यक्रम की अवधि में ₹2 से 2.5 लाख करोड़ की बचत का अनुमान; ग्रिड भंडारण और वितरित ऊर्जा संसाधन के रूप में बैटरियाँ।
- भारत: 50 GWh सेलों के लिए ₹18,100 करोड़ की ACC PLI; अति आवश्यक खनिज मिशन; तकनीक और खनिजों की बाधाएँ।
निष्कर्ष: निष्कर्ष यह रखें कि EV का पूरा जलवायु लाभ स्वच्छ ग्रिड और देश में बैटरी निर्माण के साथ ही मिलता है।
स्रोत
- NCERT: रसायन विज्ञान (कक्षा 12), वैद्युतरसायन
- NCERT: Chemistry Part I (Class XII), Electrochemistry
- NCERT: Science (Class X), Chemical Reactions and Equations
- PIB: Cabinet approves National Green Hydrogen Mission (4 January 2023)
- PIB: Unlocking India's Green Hydrogen Production Potential (press note, November 2025)
- Ministry of New and Renewable Energy: National Green Hydrogen Mission
- PIB: Cabinet approves PLI scheme National Programme on Advanced Chemistry Cell Battery Storage (12 May 2021)
- PIB: Advanced Chemistry Cell batteries and domestic capacity (12 December 2025)
- PIB: Notification allowing use of H-CNG issued (28 September 2020)
- PIB: Hydrogen fuel for public transport (15 December 2021)
- PIB: NTPC starts India's first green hydrogen blending operation in PNG network (3 January 2023)
- PIB: NTPC and GE Gas Power MoU on hydrogen co-firing (6 October 2022)
- ISRO: Transfer of VSSC developed lithium-ion cell technology to industries
- ISRO: Flight demonstration of Si-Gr anode based high energy density Li-ion cells
- Wikipedia: Lithium-ion battery
- Wikipedia: Sodium-ion battery
- Wikipedia: Fuel cell
- Wikipedia: Microbial fuel cell
- Wikipedia: Fuel cell vehicle
- Wikipedia: Automotive battery
- Wikipedia: Electric vehicle
- Wikipedia: Distributed generation
- UPSC: Civil Services Examination question papers
- The Hindu, Delhi edition, 10 September 2026: Lohum ships first lithium ore from Zimbabwe
- The Hindu, Delhi edition, 23 September 2026: Union Mines Secretary at the FIMI annual general meeting
संपादकीय अस्वीकरण
यह लेख NCERT की पाठ्यपुस्तकों और इस पृष्ठ पर दिए गए अन्य स्रोतों पर आधारित है।
