परिचय

करेंट अफ़ेयर्स
स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाएँ – सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II

आयुष्मान भारत योजना
पश्चिम बंगाल PM-JAY से जुड़ा
5 लाख रु. प्रति परिवार प्रति वर्ष44.73 करोड़ आयुष्मान कार्ड70+ सभी वरिष्ठ नागरिक
एक नज़र में
शुरुआत23 सितंबर 2018
कवरप्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक कैशलेस अस्पताल इलाज
वित्तकेंद्र और राज्य, 60:40 (पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में 90:10)
संचालनराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और राज्य स्वास्थ्य एजेंसियाँ
digitallylearn.comUPSC-CSE करेंट अफ़ेयर्स

आयुष्मान भारत योजना भारत का प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रम है, जिसके दो स्तंभ हैं: प्राथमिक देखभाल के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर, और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY), जो लगभग 12 करोड़ गरीब और वंचित परिवारों तथा 70 वर्ष और अधिक आयु के हर नागरिक को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस अस्पताल इलाज देती है। PM-JAY से बाहर रहे अंतिम राज्य पश्चिम बंगाल ने मई 2026 में 1 जुलाई 2026 से इसमें जुड़ने का निर्णय लिया।

आयुष्मान भारत पश्चिम बंगाल: 2026 में PM-JAY चर्चा में क्यों है

पश्चिम बंगाल 1 जुलाई 2026 से आयुष्मान भारत PM-JAY में शामिल

यह निर्णय पश्चिम बंगाल की नई सरकार का था। 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में आयुष्मान भारत योजना लागू करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि PM-JAY समेत प्रमुख केंद्रीय योजनाओं को राज्य में लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पिछली सरकार ने PM-JAY की जगह अपनी स्वास्थ्य बीमा योजना, स्वास्थ्य साथी, चलाई थी।

23 मई 2026 को अधिकारी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा की वीडियो कॉल पर बैठक हुई। अधिकारी ने बताया कि आयुष्मान कार्ड के लिए नामांकन शुरू हो गया है और लाभ 1 जुलाई से मिलेंगे। स्वास्थ्य साथी कार्ड रखने वाले लगभग छह करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत में लाया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य के लिए 2026-27 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत 3,505.59 करोड़ रुपये का संसाधन-आवंटन भी तय किया, और पहली किस्त के रूप में 527.58 करोड़ रुपये जारी किए।

आयुष्मान भारत PM-JAY की समय-रेखा: 23 सितंबर 2018 को प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये के कवर के साथ शुरुआत; जनवरी 2022 में लाभार्थी आधार बढ़ाकर 12 करोड़ परिवार; मार्च 2024 में आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जोड़े गए; 29 अक्टूबर 2024 से 70 वर्ष और अधिक आयु के सभी नागरिक, आय कुछ भी हो; अप्रैल 2025 में दिल्ली और ओडिशा का जुड़ना; और 1 जुलाई 2026 से पश्चिम बंगाल, जो योजना से बाहर रहा अंतिम राज्य था।

पश्चिम बंगाल योजना से बाहर रहे तीन राज्यों में अंतिम था। सितंबर 2024 में योजना 33 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही थी; केवल दिल्ली, पश्चिम बंगाल और ओडिशा बाहर थे। दिल्ली और ओडिशा वहाँ नई सरकारें बनने के बाद अप्रैल 2025 में जुड़े, और 2026 में पश्चिम बंगाल की बारी आई।

स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2025 और राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा: नए आँकड़े क्या बताते हैं

मई 2026 में आँकड़ों के दो समूहों ने इस प्रगति को मापा। पहला है राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (NSS) के 80वें दौर का स्वास्थ्य सर्वेक्षण। महामारी के बाद और PM-JAY के परिपक्व होने के बाद यह अपनी तरह का पहला व्यापक सर्वेक्षण है। इसके अनुसार 2018 में PM-JAY शुरू होने के बाद से स्वास्थ्य बीमा का दायरा लगभग तीन गुना हो गया है। फिर भी अस्पताल में भर्ती की दर 2014 के स्तर तक नहीं लौटी, अर्थात् बीमा कार्ड होने भर से अस्पताल में बिस्तर मिलना तय नहीं होता।

  • अस्पताल में भर्ती का ख़र्च: 2025 में प्रसव को छोड़कर प्रति भर्ती औसत जेब से ख़र्च 34,064 रुपये रहा; ग्रामीण क्षेत्रों में 31,484 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 38,688 रुपये।
  • सरकारी बनाम निजी: सरकारी अस्पताल में 6,631 रुपये, धर्मार्थ या NGO अस्पताल में 39,530 रुपये और निजी अस्पताल में 50,508 रुपये; 61.25 प्रतिशत भर्तियाँ निजी अस्पतालों में हुईं।
  • किसके पास कवर है: 2025 तक 47.4 प्रतिशत ग्रामीण और 44.3 प्रतिशत शहरी परिवारों के पास किसी न किसी प्रकार का स्वास्थ्य कवर था।
  • प्रसव: 95 प्रतिशत से अधिक प्रसव अब संस्थानों में होते हैं, और 98 प्रतिशत महिलाओं ने प्रसव-पूर्व देखभाल मिलने की बात कही; निजी संस्थान में प्रसव का औसत ख़र्च 37,630 रुपये रहा, जबकि सरकारी संस्थान में 2,299 रुपये।
राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (NSS) के 80वें दौर के स्वास्थ्य सर्वेक्षण से स्तंभ-चार्ट: प्रसव को छोड़कर प्रति अस्पताल भर्ती औसत जेब से ख़र्च सरकारी अस्पतालों में 6,631 रुपये, धर्मार्थ या NGO अस्पतालों में 39,530 रुपये और निजी अस्पतालों में 50,508 रुपये रहा, जबकि अखिल भारतीय औसत 34,064 रुपये था। 61.25 प्रतिशत भर्तियाँ निजी अस्पतालों में हुईं।

दूसरा समूह है 2022-23 के राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान। जेब से होने वाला व्यय (out-of-pocket expenditure), अर्थात् वह राशि जो परिवार इलाज के समय अपनी जेब से देते हैं, 2013-14 में कुल स्वास्थ्य व्यय का 64.2 प्रतिशत था, जो 2022-23 में घटकर 43.4 प्रतिशत रह गया। 2021-22 में यह 39.4 प्रतिशत तक गिरा था, क्योंकि उस वर्ष महामारी पर सरकार के एकमुश्त ख़र्च से उसका हिस्सा बढ़ गया था। स्वास्थ्य मंत्रालय इस लंबी गिरावट का श्रेय आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को देता है। पूरे आँकड़े राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान 2022-23 (अंग्रेज़ी में) वाले लेख में समझाए गए हैं।

आयुष्मान भारत योजना क्या है: सार्विक स्वास्थ्य संरक्षण के दो स्तंभ

आयुष्मान आरोग्य मंदिर: प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल का स्तंभ

आयुष्मान भारत भारत सरकार का प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रम है। यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 से निकला और दो स्तंभों पर टिका है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था के अलग-अलग स्तरों पर काम करते हैं: घर के पास देखभाल के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर, और अस्पताल के इलाज के लिए PM-JAY। एक तीसरा कार्यक्रम, 27 सितंबर 2021 को शुरू हुआ आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (अंग्रेज़ी में), उन डिजिटल स्वास्थ्य अभिलेखों को बनाता है जो दोनों को जोड़ते हैं।

पहले हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर कहलाने वाले आयुष्मान आरोग्य मंदिर वे उप-केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं जिन्हें व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल देने के लिए उन्नत किया गया, और जहाँ दवाएँ और जाँचें मुफ़्त मिलती हैं। देश भर में इनमें से 1.8 लाख से अधिक चालू हैं, और स्वास्थ्य मंत्रालय जेब से व्यय में गिरावट का बड़ा श्रेय इन्हीं को देता है। दिल्ली में सरकार मई 2025 से इन्हें खोल रही है: जुलाई 2026 में शकरपुर में 45 नए खुलने से शहर में इनकी संख्या 415 से अधिक हो गई, जबकि लक्ष्य 1,100 का है।

दोनों स्तंभों का लक्ष्य एक है। सार्विक स्वास्थ्य संरक्षण (universal health coverage) का अर्थ है कि सभी लोग अपनी ज़रूरत की हर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा, जब और जहाँ चाहिए, बिना आर्थिक कठिनाई के पा सकें। यह 2015 में अपनाए गए सतत विकास लक्ष्यों में से एक लक्ष्य है। 2019 में इस पर संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्च-स्तरीय बैठक ने दोहराया कि स्वास्थ्य धारणीय विकास की पूर्व शर्त भी है और उसका परिणाम भी।

आलोचकों के अनुसार सबसे बड़ी कमी भी प्राथमिक देखभाल वाले स्तंभ में ही है। मुफ़्त दवाएँ और जाँचें देने वाला आरोग्य मंदिरों का नेटवर्क दीर्घकालिक बीमारियों के प्रबंधन के लिए अब भी पर्याप्त धन नहीं पाता, और इस क्षेत्र में निजी क्षेत्रक हावी है। आलोचक यह भी कहते हैं कि उप-केंद्रों, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के नाम के आगे एक-सा "हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर" जोड़ने से उनकी अलग-अलग भूमिकाएँ धुंधली हुईं, और ध्यान जनसंख्या के स्वास्थ्य से हटकर व्यक्तिगत कल्याण पर चला गया।

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना: आयुष्मान भारत योजना कब शुरू हुई और इसकी रूपरेखा

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) 23 सितंबर 2018 को शुरू हुई। पूरी तरह सरकारी धन से चलने वाली यह दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य आश्वासन योजना है। हर पात्र परिवार को देश भर के सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में द्वितीयक और तृतीयक स्तर के इलाज के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का कवर मिलता है। स्वास्थ्य आश्वासन का यहाँ अर्थ है कि इलाज का भुगतान सरकार करती है, इसलिए परिवार को अस्पताल में कुछ नहीं देना पड़ता।

  • कैशलेस और पोर्टेबल: इलाज के समय कोई भुगतान नहीं, और लाभार्थी केवल अपने राज्य में नहीं, देश के किसी भी सूचीबद्ध अस्पताल में इलाज करा सकता है।
  • पूरा परिवार: पात्र परिवार के सभी सदस्य, आयु चाहे जो हो, कवर में आते हैं।
  • स्वास्थ्य लाभ पैकेज: 1,961 प्रक्रियाओं का संशोधित पैकेज, जिसमें मुफ़्त दवाएँ, भर्ती से 3 दिन पहले तक की जाँचें, अस्पताल से छुट्टी के बाद 15 दिन की दवाएँ, और भोजन तथा ठहरने की सुविधा शामिल है।
  • हकदारी पर आधारित: पात्रता किसी आवेदन या परिवार द्वारा दिए गए प्रीमियम से नहीं, बल्कि एक डेटाबेस से तय होती है।

PM-JAY की शुरुआत के समय कई राज्य केंद्र प्रायोजित राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (RSBY) चला रहे थे, और कुछ की अपनी स्वास्थ्य बीमा योजनाएँ थीं। PM-JAY को इन योजनाओं के साथ-साथ चलने और उनकी ताक़त का लाभ उठाने के लिए बनाया गया, सहकारी संघवाद की भावना के साथ।

आयुष्मान भारत योजना पात्रता और लाभ: किसे और किन सेवाओं का कवर

आयुष्मान भारत योजना पात्रता: SECC 2011, 12 करोड़ परिवार और नए वर्ग

आयुष्मान कार्ड किसे मिलेगा, यह पहले 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) से तय हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार छह वंचना मानदंडों पर और शहरी क्षेत्रों में ग्यारह व्यावसायिक मानदंडों पर पात्र हुए। 2021 में इससे लगभग 10.73 करोड़ पात्र परिवार बने, अर्थात् लगभग 50 करोड़ लोग।

  1. जनवरी 2022: 11.7 प्रतिशत की दशकीय वृद्धि दर के आधार पर केंद्र ने लाभार्थी आधार बढ़ाकर 12 करोड़ परिवार किया, और राज्यों को उन परिवारों के सत्यापन के लिए समान प्रोफ़ाइल वाले अन्य डेटाबेस अपनाने की छूट दी जिन्हें SECC सूची में पहचाना नहीं जा सका।
  2. राज्यों के जोड़े गए वर्ग: कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने अपने ख़र्च पर केंद्रीय सूची से आगे कवर बढ़ाया है।
  3. मार्च 2024: 37 लाख मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा), आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी सहायिकाएँ और उनके परिवार जोड़े गए।
  4. अक्टूबर 2024: 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी नागरिक, आय कुछ भी हो।

आज यह आधार लगभग 12 करोड़ परिवारों, अर्थात् लगभग 55 करोड़ लोगों, का है। पात्रता सूचियों पर टिकी है, इसलिए जो गरीब परिवार सूची में नहीं है वह बाहर रह जाता है। दूसरी ओर, जो परिवार सूची में आने लायक गरीब नहीं, पर निजी बीमा भी नहीं ख़रीद सकता, उसके पास कोई कवर नहीं रहता। इस वर्ग को "मिसिंग मिडिल" (छूटा हुआ मध्य वर्ग) कहा जाता है।

70 वर्ष और अधिक आयु के लिए आयुष्मान कार्ड: वय वंदना कवर

11 सितंबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने PM-JAY का दायरा 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों तक बढ़ाया, चाहे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कुछ भी हो। यह कवर 29 अक्टूबर 2024 से शुरू हुआ। इसका लक्ष्य 4.5 करोड़ परिवारों के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिक थे, जिनमें से हर एक को एक नया, अलग कार्ड मिलता है, जिसे आयुष्मान वय वंदना कार्ड कहते हैं।

  • पहले से कवर परिवार में: वरिष्ठ नागरिक को अपने लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का अतिरिक्त टॉप-अप मिलता है, जिसे परिवार के 70 वर्ष से कम आयु के सदस्यों के साथ बाँटना नहीं पड़ता।
  • किसी अन्य परिवार में: परिवार के आधार पर प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का कवर।
  • अन्य सरकारी योजनाएँ: केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS), भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ECHS) या आयुष्मान CAPF वाले लोग अपनी योजना रख सकते हैं या PM-JAY चुन सकते हैं; निजी बीमा या कर्मचारी राज्य बीमा योजना वाले भी पात्र रहते हैं।
PM-JAY में किसे क्या मिलता है
कौन PM-JAY से क्या मिलता है
SECC या राज्य सूची वाला परिवार पूरे परिवार के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक, किसी भी आयु में
पहले से कवर परिवार का 70 वर्ष या अधिक का व्यक्ति परिवार का कवर, साथ में प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का निजी टॉप-अप
किसी अन्य परिवार का 70 वर्ष या अधिक का व्यक्ति परिवार के आधार पर प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक
CGHS, ECHS या आयुष्मान CAPF वाला 70 वर्ष या अधिक का व्यक्ति विकल्प: अपनी योजना रखें या PM-JAY में आएँ
आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता या सहायिका मार्च 2024 से परिवार सहित कवर

2025 में योजना से जुड़ी दिल्ली में वरिष्ठ कवर का असर दिखता है: मई 2026 तक वहाँ जारी 7.72 लाख आयुष्मान कार्डों में से 2.9 लाख वय वंदना योजना के थे।

आयुष्मान कार्ड के लाभ आँकड़ों में: कार्ड, भर्तियाँ और अस्पताल

योजना का उपयोग लगातार बढ़ा है। जुलाई 2026 में संसद को बताया गया कि PM-JAY के अंतर्गत 44.73 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं, और 1.92 लाख करोड़ रुपये मूल्य की 12.69 करोड़ से अधिक अस्पताल भर्तियाँ स्वीकृत हुई हैं। सितंबर 2024 में यही आँकड़े 35.4 करोड़ कार्ड और 7.79 करोड़ भर्तियाँ थे।

PM-JAY के अंतर्गत बने आयुष्मान कार्डों का स्तंभ-चार्ट: सितंबर 2024 में 35.4 करोड़, मार्च 2025 में 36.9 करोड़, फ़रवरी 2026 में 43.52 करोड़ और जुलाई 2026 में 44.73 करोड़।
  • महिलाएँ: सितंबर 2024 तक 49 प्रतिशत आयुष्मान कार्ड महिलाओं को मिले थे, और 3.61 करोड़ अस्पताल भर्तियाँ महिलाओं की थीं।
  • पोर्टेबिलिटी: सितंबर 2024 तक 3,100 करोड़ रुपये की 11.9 लाख भर्तियाँ मरीज़ के अपने राज्य से बाहर स्वीकृत हुई थीं।
  • अस्पताल: 28 फ़रवरी 2026 तक सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या 36,229 हो गई थी।

राज्य केंद्रीय कवर पर अपनी योजनाएँ भी जोड़ सकते हैं। राजस्थान ने अपनी MAA योजना को PM-JAY से जोड़ा और 2026 में अंतर-राज्य पोर्टेबिलिटी शुरू की, जिससे उसके 1.36 करोड़ पात्र परिवार देश भर के सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज करा सकते हैं।

PM-JAY कैसे काम करती है: वित्त, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और राज्य

केंद्र-राज्य वित्त, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और अस्पतालों का सूचीकरण

PM-JAY एक केंद्र प्रायोजित योजना है, अर्थात् इसका ख़र्च केंद्र और राज्य मिलकर उठाते हैं। प्रीमियम केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में बँटता है, पर पूर्वोत्तर राज्यों और तीन हिमालयी राज्यों में यह अनुपात 90:10 है। विधानमंडल रहित केंद्रशासित प्रदेशों के लिए केंद्र पूरा 100 प्रतिशत देता है, जबकि विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों पर 60:40 लागू होता है।

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA): योजना के संचालन के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे स्थापित किया; योजना के साथ एक राष्ट्रीय IT मंच और धोखाधड़ी तथा दुरुपयोग पकड़ने का डेटा विश्लेषण भी है।
  • राज्य स्वास्थ्य एजेंसियाँ: हर राज्य में योजना चलाती हैं; ज़िला कार्यान्वयन इकाइयाँ सूचीबद्ध अस्पतालों में जाकर मरीज़ों और अस्पतालों की समस्याएँ समझती हैं।
  • सूचीकरण: भर्ती की सुविधा वाला हर सरकारी अस्पताल अपने-आप सूचीबद्ध माना जाता है, और सरकारी अस्पतालों को निजी अस्पतालों के बराबर भुगतान होता है; निजी अस्पताल NHA के हॉस्पिटल एंगेजमेंट मॉड्यूल से जुड़ते हैं।
  • शिकायत निवारण: ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की त्रि-स्तरीय व्यवस्था, लाभार्थियों के लिए कॉल सेंटर (14555) और अस्पतालों के लिए अलग कॉल सेंटर (14413)।

ज़मीन पर योजना राज्य ही चलाते हैं, इसलिए उनका सहयोग ज़रूरी है। केंद्र और किसी राज्य में असहमति होने पर उस राज्य के परिवार कवर से वंचित रह जाते हैं, जैसा पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के अनुसार पिछली सरकार के समय वहाँ हुआ।

स्वास्थ्य राज्य का विषय: राज्य बाहर क्यों रहे और फिर क्यों जुड़े

स्वास्थ्य राज्य का विषय है। संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 6 में लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता तथा अस्पताल और औषधालय आते हैं। इसलिए स्वास्थ्य सेवाओं का संगठन राज्य करते हैं, और किसी केंद्र प्रायोजित योजना के लिए उनकी सहमति ज़रूरी है। जिन राज्यों की अपनी योजनाएँ थीं, वे कभी-कभी उन्हें ही बेहतर मानते रहे, जैसे दिल्ली, ओडिशा और पश्चिम बंगाल वर्षों तक। लोक स्वास्थ्य राज्य सूची में कृषि, पुलिस और स्थानीय शासन के साथ है, जबकि रक्षा और रेलवे जैसे विषय संघ सूची में हैं। यह दायित्व हर स्तर की सरकार का है: राज्य की नीति के निदेशक तत्त्वों में अनुच्छेद 47 कहता है कि राज्य लोक स्वास्थ्य के सुधार को अपने प्राथमिक कर्तव्यों में मानेगा।

पैसे का सवाल भी बना हुआ है। सितंबर 2026 में हरियाणा के निजी अस्पतालों ने जनवरी से बकाया लगभग 1,200 करोड़ रुपये के विरोध में आयुष्मान दावे भेजना बंद कर दिया, और भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) ने 16 सितंबर से सेवाएँ पूरी तरह वापस लेने की चेतावनी दी। राज्य के अधिकारियों ने कहा कि सेवाएँ सामान्य रूप से चल रही हैं, और डॉक्टरों को बातचीत के लिए बुलाया।

आयुष्मान भारत का प्रभाव और चुनौतियाँ: ख़र्च, धोखाधड़ी और पहुँच

आर्थिक सुरक्षा: आयुष्मान भारत से क्या सुधरा

  • परिवारों की बचत: सरकारी अनुमानों के अनुसार जेब से व्यय में 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई; PM-JAY न होती तो उसके द्वारा चुकाए गए इलाज की कुल लागत 1.5 से 2 गुना अधिक होती।
  • गरीबी से बचाव: सरकार का अनुमान है कि यह योजना हर वर्ष छह करोड़ से अधिक भारतीयों को इलाज के ख़र्च के कारण गरीबी में जाने से बचाने में मदद करती है।
  • जेब से व्यय का घटता हिस्सा: कुल स्वास्थ्य व्यय में 2013-14 के 64.2 प्रतिशत से 2022-23 में 43.4 प्रतिशत।
  • व्यापक कवर: बीमा का दायरा 2018 से पहले की तुलना में लगभग तीन गुना, और प्राथमिक तथा द्वितीयक देखभाल की बड़ी लागत सार्वजनिक क्षेत्र उठा रहा है।
  • सामान्य इलाज सस्ता: प्रति भर्ती जेब से ख़र्च का माध्यिका मान घटकर 11,285 रुपये रह गया, और सरकारी बाह्य-रोगी (OPD) देखभाल लगभग मुफ़्त है।

चुनौतियाँ: पैकेज दरें, बकाया भुगतान, धोखाधड़ी और मिसिंग मिडिल

योजना की कमज़ोरियाँ वहाँ दिखती हैं जहाँ पैसे का लेन-देन होता है। PM-JAY और राज्यों की बीमा योजनाएँ अस्पतालों को अक्सर बाज़ार दर से कम भुगतान करती हैं, इसलिए निजी अस्पताल जाँचों और अन्य सेवाओं के लिए अलग से शुल्क लेकर यह अंतर मरीज़ों से वसूलते हैं। गरीबों के पास कवर नाम भर का है, पर व्यवहार में वे अक्सर उसके लाभ से बाहर रह जाते हैं, जबकि बीमित मध्य वर्ग बढ़ते विनाशकारी ख़र्च झेलता है।

  • दावे और भुगतान: ग़लत दस्तावेज़ों के कारण दावों का अस्वीकार होना, भुगतान में लंबी देरी, और डिजिटल सेवाओं पर निर्भरता, जैसा 2026 के हरियाणा बकाया विवाद में दिखा।
  • धोखाधड़ी: जून 2026 में जम्मू-कश्मीर ने एक डॉक्टर को निलंबित कर अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज में PMJAY-SEHAT के अंतर्गत 103 हृदय प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ी की जाँच के आदेश दिए।
  • जो कवर में नहीं: अधिकतर बीमा केवल अस्पताल में भर्ती को कवर करता है, इसलिए बाह्य-रोगी देखभाल और दवाओं का ख़र्च अब भी जेब से जाता है; विशेषज्ञों ने PM-JAY में मानसिक स्वास्थ्य की बाह्य-रोगी सेवाएँ जोड़ने का सुझाव दिया है।
  • व्यय में छोटा हिस्सा: 2022-23 में सरकारी धन वाली सभी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का कुल व्यय 26,266 करोड़ रुपये रहा, जो कुल स्वास्थ्य व्यय का लगभग 3 प्रतिशत है, जबकि चालू स्वास्थ्य व्यय में सबसे बड़ा हिस्सा, 30.83 प्रतिशत, निजी अस्पतालों का रहा।

सुधार की दिशा यहीं से निकलती है। परिवारों को गरीबी से बचाने और लगभग सार्वभौमिक संस्थागत प्रसव हासिल करने के बाद अगले चरण में ऐसे मज़बूत सरकारी अस्पताल चाहिए जो तृतीयक देखभाल में निजी क्षेत्र से मुक़ाबला कर सकें, दीर्घकालिक बीमारियों के लिए बेहतर धन वाली प्राथमिक देखभाल चाहिए, और ऐसी पैकेज दरें चाहिए जिन्हें निजी अस्पताल मरीज़ों पर बोझ डाले बिना स्वीकार करें।

UPSC के लिए आयुष्मान भारत: पाठ्यक्रम से जुड़ाव और परीक्षा दृष्टि

UPSC पाठ्यक्रम में आयुष्मान भारत: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II और प्रारंभिक परीक्षा

  1. सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II: स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास और प्रबंधन से जुड़े मुद्दे; कमज़ोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ और उनका प्रदर्शन; राज्य के विषय में केंद्र-राज्य संबंध (देखें सामान्य अध्ययन II का पाठ्यक्रम (अंग्रेज़ी में))।
  2. सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III: समावेशी विकास और सरकारी बजट, जेब से व्यय और स्वास्थ्य वित्त के माध्यम से।
  3. प्रारंभिक परीक्षा: दोनों स्तंभ, कवर की राशि, पात्रता, 70 वर्ष से अधिक का विस्तार, वित्त-अनुपात और राज्य सूची की प्रविष्टि।
  4. निबंध: स्वास्थ्य देखभाल और कल्याणकारी राज्य; प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और विकास।

विगत वर्षों के प्रश्न: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा इस लेख को पढ़ने के बाद आप यूपीएससी के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिख सकेंगे। हर प्रश्न के साथ एक खुलने वाली रूपरेखा है, जो बताती है कि परीक्षा में उसे कैसे हल करें।

  1. यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2024, सामान्य अध्ययन-IIलोक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में भारतीय राज्य को उस व्यवस्था के बाजारीकरण के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए व्यापक भूमिका निभानी चाहिए। कुछ ऐसे उपाय सुझाइए जिनके माध्यम से राज्य, लोक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की पहुंच का विस्तार तृणमूल स्तर तक कर सके।
    उत्तर-लेखन रूपरेखा

    प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।

    निर्देशात्मक शब्द: उपाय सुझाइए · दृष्टिकोण: पहले संक्षेप में बताएँ कि बाजारीकरण मरीज़ों को कैसे नुकसान पहुँचाता है, फिर तृणमूल स्तर तक सार्वजनिक देखभाल पहुँचाने के ठोस उपाय दें।

    भूमिका: अंतर से शुरुआत करें: 2025 में निजी अस्पताल में भर्ती पर परिवार का ख़र्च 50,508 रुपये रहा, जबकि सरकारी अस्पताल में 6,631 रुपये, और 61.25 प्रतिशत भर्तियाँ निजी अस्पतालों में हुईं।

    मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):

    • बाजारीकरण के दुष्प्रभाव: बाज़ार से कम पैकेज दरों के कारण अलग से शुल्क; बीमित पर लाभ से वंचित गरीब; मध्य वर्ग पर विनाशकारी ख़र्च।
    • प्राथमिक देखभाल: 1.8 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को मुफ़्त दवा, जाँच और दीर्घकालिक बीमारियों की देखभाल के लिए पर्याप्त धन।
    • सरकारी अस्पताल: PM-JAY में अपने-आप सूचीकरण और बराबर भुगतान; निजी क्षेत्र से मुक़ाबले के लिए तृतीयक क्षमता का निर्माण।
    • विनियमन: राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के माध्यम से दर निर्धारण और धोखाधड़ी पर नियंत्रण; शिकायत निवारण।
    • कवर की कमियाँ: बाह्य-रोगी देखभाल और दवाएँ; मिसिंग मिडिल।

    निष्कर्ष: निष्कर्ष दें कि राज्य तृणमूल स्तर तक सबसे अच्छी पहुँच अपनी प्राथमिक और द्वितीयक देखभाल को मज़बूत करके बनाता है, और बीमा का उपयोग परिवारों की रक्षा के लिए करता है, सार्वजनिक सेवा की जगह लेने के लिए नहीं।

  2. यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2015, सामान्य अध्ययन-IIसार्विक स्वास्थ्य संरक्षण प्रदान करने में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की अपनी परिसीमाएँ हैं। क्या आपके विचार में खाई को पाटने में निजी क्षेत्रक सहायक हो सकता है? आप अन्य कौन-से व्यवहार्य विकल्प सुझाएँगे?
    उत्तर-लेखन रूपरेखा

    प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।

    निर्देशात्मक शब्द: चर्चा कीजिए और सुझाइए · दृष्टिकोण: सीमाएँ स्वीकार करें, निजी क्षेत्रक की भूमिका को उसके जोखिमों के साथ तौलें, फिर विकल्प सुझाएँ।

    भूमिका: सार्विक स्वास्थ्य संरक्षण को बिना आर्थिक कठिनाई के इलाज के रूप में परिभाषित करें, और बताएँ कि 2022-23 में भी जेब से व्यय कुल स्वास्थ्य व्यय का 43.4 प्रतिशत था।

    मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):

    • सीमाएँ: राज्यों की क्षमता, उपचार पर ज़ोर, प्राथमिक देखभाल को कम धन, स्वास्थ्य राज्य का विषय।
    • निजी क्षेत्रक मदद कर सकता है: PM-JAY के सूचीबद्ध निजी अस्पताल और पोर्टेबिलिटी पहुँच बढ़ाते हैं।
    • पर: पैकेज दरें और अलग से शुल्क, धोखाधड़ी के मामले, निजी इलाज का ऊँचा ख़र्च।
    • विकल्प: आरोग्य मंदिर; मज़बूत सरकारी अस्पताल; PM-JAY से जुड़ी राज्य योजनाएँ; बाह्य-रोगी कवर; विनियमन।

    निष्कर्ष: निष्कर्ष दें कि निजी क्षेत्रक सार्वजनिक नियमों और दरों के भीतर कमियाँ भर सकता है, पर सार्विक स्वास्थ्य संरक्षण की नींव मज़बूत सार्वजनिक व्यवस्था ही है।

  3. यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2020, सामान्य अध्ययन-IIसामाजिक विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के क्रम में, विशेषकर जराचिकित्सा एवं मातृ स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में सुदृढ़ और पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल संबंधी नीतियों की आवश्यकता है। विवेचन कीजिए।
    उत्तर-लेखन रूपरेखा

    प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।

    निर्देशात्मक शब्द: विवेचन कीजिए · दृष्टिकोण: प्रश्न में नामित दोनों वर्गों को एक-एक कर लें, हर एक के लिए नीति और उसकी कमियाँ बताएँ।

    भूमिका: स्वास्थ्य नीति को सामाजिक विकास का साधन बताते हुए शुरुआत करें; वृद्ध और माताएँ इलाज के ख़र्च से सबसे अधिक प्रभावित दो वर्ग हैं।

    मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):

    • जराचिकित्सा: 70 वर्ष और अधिक के सभी लोगों के लिए PM-JAY, लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिक; कवर वाले परिवारों में 5 लाख रुपये का टॉप-अप; CGHS और ECHS सदस्यों के लिए विकल्प।
    • मातृ स्वास्थ्य देखभाल: 95 प्रतिशत से अधिक संस्थागत प्रसव और 98 प्रतिशत प्रसव-पूर्व देखभाल।
    • कमियाँ: निजी प्रसव सरकारी से 16 गुना से अधिक महँगा; वृद्धों के लिए बाह्य-रोगी देखभाल और दवाएँ कवर में नहीं; प्राथमिक केंद्रों में दीर्घकालिक बीमारियों की देखभाल को कम धन।

    निष्कर्ष: निष्कर्ष दें कि इन दोनों वर्गों के लिए कवर अब लगभग सार्वभौमिक है, और अगला काम सस्ती बाह्य-रोगी, दीर्घकालिक और सरकारी मातृ देखभाल है।

  4. यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2021, सामान्य अध्ययन-II"एक कल्याणकारी राज्य की नैतिक अनिवार्यता के अलावा, प्राथमिक स्वास्थ्य संरचना धारणीय विकास की एक आवश्यक पूर्व शर्त है।" विश्लेषण कीजिए।
    उत्तर-लेखन रूपरेखा

    प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।

    निर्देशात्मक शब्द: विश्लेषण कीजिए · दृष्टिकोण: नैतिक दावे और विकास वाले दावे को अलग-अलग लें, हर एक के साथ प्रमाण दें।

    भूमिका: प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को नागरिक और स्वास्थ्य व्यवस्था के पहले संपर्क के रूप में, और आयुष्मान भारत के पहले स्तंभ के रूप में प्रस्तुत करें।

    मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):

    • नैतिक अनिवार्यता: गरीबों को घर के पास मुफ़्त दवा और जाँच के साथ देखभाल; अनुच्छेद 47 के अंतर्गत कल्याणकारी राज्य का कर्तव्य (लोक स्वास्थ्य का सुधार राज्य के प्राथमिक कर्तव्यों में)।
    • धारणीय विकास की पूर्व शर्त: 2019 में संयुक्त राष्ट्र ने दोहराया कि स्वास्थ्य धारणीय विकास की पूर्व शर्त है; प्राथमिक देखभाल महँगी भर्ती को रोकती है; आरोग्य मंदिरों के श्रेय के साथ जेब से व्यय का हिस्सा 64.2 से घटकर 43.4 प्रतिशत; स्वस्थ कार्यबल।
    • कमियाँ: दीर्घकालिक बीमारियों के लिए कम धन; एक-से नाम ने उप-केंद्रों, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की भूमिकाएँ धुंधली कीं।

    निष्कर्ष: निष्कर्ष दें कि मज़बूत प्राथमिक देखभाल के बिना बीमा केवल उन बीमारियों का भुगतान करता है जिन्हें रोका जा सकता था।

  5. यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2023 (हिंदी रूपांतर)निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
    1. कथन-I: भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था मुख्यतः उपचारात्मक देखभाल पर केंद्रित है, जिसमें निवारक, प्रोत्साहक और पुनर्वास देखभाल सीमित है।
    2. कथन-II: स्वास्थ्य देखभाल वितरण की भारत की विकेंद्रीकृत व्यवस्था में स्वास्थ्य सेवाओं के संगठन की मुख्य ज़िम्मेदारी राज्यों की है।

    उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?

    1. a कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं और कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या है
    2. b कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं और कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या नहीं है
    3. c कथन-I सही है, किंतु कथन-II गलत है
    4. d कथन-I गलत है, किंतु कथन-II सही है
    इस प्रश्न को कैसे हल करें

    प्रश्न का प्रकार: कथन-I और कथन-II

    हल करने की विधि: चरण 1: कथन-I सही है, क्योंकि सार्वजनिक व्यवस्था का ज़ोर उपचार पर है और निवारक, प्रोत्साहक तथा पुनर्वास देखभाल सीमित है। चरण 2: कथन-II भी सही है, क्योंकि स्वास्थ्य राज्य सूची का विषय है। चरण 3: क्या कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है? नहीं; सेवाएँ कौन चलाता है, इससे यह तय नहीं होता कि वे किस प्रकार की देखभाल देती हैं। अतः दोनों सही हैं, पर कथन-II व्याख्या नहीं है।

    इस भ्रम से बचें: दोनों कथन सही हैं और आपस में जुड़े लगते हैं, जिससे विकल्प (a) आकर्षक लगता है।

    विकल्पवार व्याख्या:

    • (a) दोनों सही, कथन-II व्याख्या करता है: गलत। राज्य का विषय होने से उपचार पर ज़ोर पैदा नहीं होता।
    • (b) दोनों सही, कथन-II व्याख्या नहीं करता: सही। दोनों कथन सही हैं, पर अलग-अलग बातों के बारे में हैं।
    • (c) कथन-I सही, कथन-II गलत: गलत। राज्य सूची की प्रविष्टि 6 स्वास्थ्य को राज्य का विषय बनाती है।
    • (d) कथन-I गलत, कथन-II सही: गलत। निवारक देखभाल व्यय का छोटा हिस्सा है, इसलिए कथन-I सही है।

    उत्तर: विकल्प (b), आधिकारिक उत्तर: दोनों कथन सही हैं और कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या नहीं है।

स्रोत और संदर्भ

संपादकीय अस्वीकरण

यह लेख स्वास्थ्य मंत्रालय की आधिकारिक विज्ञप्तियों, संविधान और इस पृष्ठ पर दिए गए अन्य स्रोतों पर आधारित है।