परिचय

समसामयिकी
अंतर्राष्ट्रीय संबंध – सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026
नई दिल्ली घोषणा
11 सदस्य10 भागीदार देश140 अनुच्छेद, सर्वसम्मति से
एक नज़र में
विषयBuilding for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability
सर्वसम्मतिईरान और UAE ऐसी भाषा पर सहमत हुए जिसमें किसी देश का नाम नहीं
सुधारचीन और रूस ने UN में ब्राज़ील और भारत की बड़ी भूमिका का समर्थन किया
अगला अध्यक्ष2027 में 19वाँ शिखर सम्मेलन चीन में
digitallylearn.comUPSC-CSE समसामयिकी

ब्रिक्स (BRICS) उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है, जिसका नाम इसके पहले पाँच सदस्यों, ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका, के नामों से बना है। अब इसमें ग्यारह सदस्य और दस भागीदार देश हैं। 2026 में भारत इसका अध्यक्ष रहा। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026, समूह का 18वाँ शिखर सम्मेलन, 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में हुआ, जहाँ सदस्य देशों ने नई दिल्ली घोषणा सर्वसम्मति से स्वीकार की।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: नई दिल्ली में आयोजन और चर्चा का कारण

18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: तिथि, स्थान, विषय और नेता

सम्मेलन का विषय था "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability", अर्थात् लचीलापन, नवाचार, सहयोग और संधारणीयता के लिए निर्माण। इस विषय में BRICS के अक्षरों को ही भारत की इस वर्ष की चार प्राथमिकताओं के रूप में पढ़ा गया है। इसकी प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वह आह्वान है, जिसमें उन्होंने "मानवता प्रथम" की सोच वाले, जन-केन्द्रित ब्रिक्स की बात कही थी।

यह सम्मेलन ऐसे समय हुआ, जब पश्चिम एशिया युद्ध की चपेट में है। 28 फ़रवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला किया था। इस युद्ध में ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई मारे गए, और ईरान ने जवाबी हमलों में अपने खाड़ी पड़ोसियों को भी निशाना बनाया, जिनमें UAE भी शामिल था। इस हमले के बाद ब्रिक्स का यह पहला शिखर सम्मेलन था।

  • शीर्ष स्तर पर उपस्थित सदस्य: आठ सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व शीर्ष नेताओं ने किया: भारत, रूस, चीन, ईरान, इंडोनेशिया, मिस्र, इथियोपिया और दक्षिण अफ़्रीका। व्लादिमीर पुतिन और मसूद पेज़ेशकियान आए, और शी जिनपिंग सात वर्षों में पहली बार भारत आए।
  • निचले स्तर पर प्रतिनिधित्व: राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा चुनाव की तैयारी में हैं, इसलिए ब्राज़ील से विदेश मंत्री माउरो विएरा आए। UAE की ओर से अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख़ ख़ालिद बिन मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाह्यान आए। सऊदी अरब को 2024 में सदस्यता का प्रस्ताव मिला था, पर वह अभी औपचारिक रूप से शामिल नहीं हुआ है; उसके विदेश मंत्री घोषणा स्वीकार होने के बाद पहुँचे।
  • भागीदार देश और अतिथि: मलेशिया, वियतनाम और कज़ाख़स्तान जैसे भागीदार देशों के नेता आए। युगांडा और नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति, फ़िलीपींस के राष्ट्रपति, और अफ़्रीकी संघ के अध्यक्ष के रूप में बुरुंडी के राष्ट्रपति भी उपस्थित रहे। बांग्लादेश को BIMSTEC के अध्यक्ष के रूप में आमंत्रित किया गया था, पर वहाँ से कोई नहीं आया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी सम्मेलन में शामिल हुए।

यह सम्मेलन पूरे वर्ष चली बैठकों का शिखर था। घोषणा के अनुसार भारत की अध्यक्षता में देश के तीस शहरों में चार सौ से अधिक बैठकें और कार्यक्रम हुए। सम्मेलन के सप्ताह की शुरुआत 11 सितंबर को ब्रिक्स बिज़नेस फ़ोरम से हुई, जहाँ वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सदस्य देशों से अपनी भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने और स्थानीय मुद्राओं में अधिक व्यापार करने का आग्रह किया।

नई दिल्ली घोषणा पर सहमति: ईरान, UAE और पश्चिम एशिया

ईरान और UAE दोनों 2024 से ब्रिक्स के सदस्य हैं। 2026 में ब्रिक्स की मंत्रिस्तरीय बैठकों में दोनों ने हर संयुक्त वक्तव्य को रोक दिया। जब मई में नई दिल्ली में विदेश मंत्रियों की बैठक हुई, तब अध्यक्ष के रूप में भारत केवल अध्यक्ष का सारांश ही जारी कर सका; इसका विवरण मई 2026 की ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक (अंग्रेज़ी में) वाले लेख में है। ईरान चाहता था कि शिखर सम्मेलन संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल की निंदा करे, जैसी शंघाई सहयोग संगठन ने अपने बिश्केक शिखर सम्मेलन (अंग्रेज़ी में) में की थी। दूसरी ओर UAE चाहता था कि पड़ोसियों पर ईरान के हमलों की भी उतनी ही निंदा हो।

गतिरोध सम्मेलन के पहले दिन टूटा, जब दोनों देश ऐसी भाषा पर सहमत हो गए जिसमें किसी देश का नाम नहीं है। अनुच्छेद 28 मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताता है। यह सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने, नागरिकों की रक्षा करने और व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं तथा ऊर्जा के प्रवाह को बनाए रखने का आह्वान करता है। अनुच्छेद 29 नागरिक अवसंरचना पर हमलों, और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण (IAEA) के सुरक्षा उपायों के अधीन शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमलों को लेकर गंभीर चिंता जोड़ता है।

इसके बाद सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस की अलग से भेंट हुई। युद्ध शुरू होने के बाद दोनों देशों के बीच यह सबसे ऊँचे स्तर की बैठक थी, और दोनों ने तनाव कम करने की बात कही। वार्ता में भारत के शेरपा, विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने सहमत पाठ का श्रेय महीनों की बातचीत को दिया।

ब्रिक्स क्या है: उत्पत्ति, सदस्य देश और कार्यप्रणाली

ब्रिक्स की स्थापना, पूरा नाम और विस्तार की समय-रेखा

ब्रिक्स (BRICS) नाम इसके पहले पाँच सदस्यों के अंग्रेज़ी नामों के पहले अक्षरों से बना है: ब्राज़ील (Brazil), रूस (Russia), भारत (India), चीन (China) और दक्षिण अफ़्रीका (South Africa)। BRIC शब्द 2001 में निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने गढ़ा था। उसके एक शोध-पत्र में अनुमान लगाया गया था कि अगले पाँच दशकों में ये चारों देश दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में होंगे।

राजनीतिक सहयोग के मंच के रूप में BRIC की औपचारिक स्थापना 2006 में हुई। 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट ने इसे एक साझा उद्देश्य दिया: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज़ को अधिक महत्त्व दिलाना। पहला BRIC शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ।

दक्षिण अफ़्रीका सितंबर 2010 में जुड़ा और 2011 के शिखर सम्मेलन में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हुआ; इसी से BRIC बना BRICS। एक दशक से अधिक समय तक समूह में पाँच ही सदस्य रहे। जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और UAE इसमें शामिल हुए। सऊदी अरब को भी उसी समय आमंत्रित किया गया था, और भारत उसे सदस्यों में गिनता है, किन्तु वह अभी औपचारिक रूप से शामिल नहीं हुआ है। जनवरी 2025 में इंडोनेशिया ग्यारहवाँ सदस्य बना।

समूह के विस्तार के साथ हाल के शिखर सम्मेलन एक के बाद एक हुए। रूस ने अक्टूबर 2024 में कज़ान में 16वें शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की। उसकी घोषणा का शीर्षक था "Strengthening Multilateralism for Just Global Development and Security", अर्थात् न्यायपूर्ण वैश्विक विकास और सुरक्षा के लिए बहुपक्षवाद को सशक्त करना। ब्राज़ील ने जुलाई 2025 में रियो डी जनेरियो में 17वें शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की, और 1 जनवरी 2026 को अध्यक्षता भारत के पास आई।

ब्रिक्स की समय-रेखा: 2001 में BRIC शब्द गढ़ा गया; 2006 में औपचारिक स्थापना; 2009 में येकातेरिनबर्ग में पहला शिखर सम्मेलन; 2010 में दक्षिण अफ़्रीका का प्रवेश; 2012, 2016 और 2021 में भारत की अध्यक्षता; 2014 में फ़ोर्टालेज़ा में नव विकास बैंक पर समझौता; 2024 और 2025 में विस्तार; और 2026 में नई दिल्ली में 18वें शिखर सम्मेलन के साथ भारत की चौथी अध्यक्षता।

ब्रिक्स देशों के नाम: 2026 के सदस्यों और भागीदारों की पूरी सूची

ग्यारह सदस्य देशों में दुनिया की 49.5 प्रतिशत जनसंख्या रहती है। विश्व के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में इनकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार में 26 प्रतिशत है। क्रय शक्ति समता (PPP) पर मापें, तो इनका संयुक्त उत्पादन G7 से अधिक है। इनमें दुनिया के कुछ सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादक भी हैं और सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता भी।

2026 में ब्रिक्स के सदस्य और भागीदार देश
देश 2026 में स्थिति जुड़ने का वर्ष
ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन संस्थापक सदस्य 2006
दक्षिण अफ़्रीका सदस्य 2010
मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात सदस्य 2024
सऊदी अरब आमंत्रित; औपचारिक रूप से शामिल नहीं 2024
इंडोनेशिया सदस्य 2025
बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कज़ाख़स्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान, वियतनाम भागीदार देश 2025
2026 में ब्रिक्स का विश्व मानचित्र। पाँच संस्थापक सदस्य ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका गहरे नीले रंग में हैं; 2024 और 2025 में जुड़े मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया बैंगनी रंग में हैं; सऊदी अरब हल्के बैंगनी रंग और धारीदार किनारे में है, क्योंकि उसे आमंत्रित किया गया है पर वह औपचारिक रूप से शामिल नहीं हुआ। दस भागीदार देश, बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कज़ाख़स्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम, अंकों से दिखाए गए हैं। 18वें शिखर सम्मेलन की मेज़बान नई दिल्ली लाल रंग में चिह्नित है।

ब्रिक्स कैसे काम करता है: अध्यक्षता, सर्वसम्मति और तीन स्तंभ

ब्रिक्स का न कोई स्थायी मुख्यालय है, न कोई सचिवालय। अध्यक्षता हर वर्ष संक्षिप्त नाम के अक्षरों के क्रम में बदलती है और 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक चलती है। अध्यक्ष देश वर्ष की प्राथमिकताएँ तय करता है, शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करता है, और मंत्रिस्तरीय बैठकों तथा कार्य-समूहों का संचालन करता है। सदस्य अब ग्यारह हो गए हैं, अतः बारी तय करने के नए सूत्र पर चर्चा चल रही है।

ब्रिक्स के निर्णय सर्वसम्मति (consensus) से होते हैं। इसका अर्थ है कि एक अकेला सदस्य भी किसी संयुक्त पाठ को रोक सकता है, जैसा 2026 में ईरान और UAE लगातार करते रहे। घोषणा के दूसरे अनुच्छेद में सदस्य देश सहयोग के तीन स्तंभ गिनाते हैं:

  1. राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग: संघर्षों, आतंकवाद, संयुक्त राष्ट्र और बाह्य अंतरिक्ष पर शिखर सम्मेलन का रुख़।
  2. आर्थिक और वित्तीय सहयोग: व्यापार, नव विकास बैंक, भुगतान, स्वास्थ्य, खाद्य, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी।
  3. सांस्कृतिक और जन-से-जन सहयोग: शिक्षा, युवा, खेल, संस्कृति और पर्यटन।

समूह की कार्यप्रणाली पर सम्मेलन में दो प्रस्ताव आए। श्री मोदी ने G20 की तरह एक त्रिगुट (troika) का सुझाव दिया, ताकि पिछला, वर्तमान और अगला अध्यक्ष मिलकर काम को एक वर्ष से अगले वर्ष तक ले जाएँ। दूसरा प्रस्ताव ब्रिक्स निरंतरता एवं कार्यान्वयन तंत्र का था: हर निर्णय का एक सुरक्षित डिजिटल अभिलेख, जिसमें उसका नोडल बिंदु, समय-सीमा और स्थिति दर्ज हो।

भारत चार बार ब्रिक्स का अध्यक्ष रहा है, अतः 2026 का शिखर सम्मेलन भारत में हुआ चौथा सम्मेलन था:

  • 2012, चौथा शिखर सम्मेलन, नई दिल्ली: विषय “BRICS Partnership for Global Stability, Security and Prosperity”; इसने एक नए विकास बैंक की संभावना तलाशने का प्रस्ताव रखा और आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था की नींव तैयार की।
  • 2016, आठवाँ शिखर सम्मेलन, गोवा: विषय “Building Responsive, Inclusive and Collective Solutions”; नव विकास बैंक के पहले ऋण दिए गए और BIMSTEC देशों के साथ आउटरीच शिखर सम्मेलन हुआ।
  • 2021, 13वाँ शिखर सम्मेलन, वर्चुअल: विषय “BRICS@15: Intra-BRICS Cooperation for Continuity, Consolidation and Consensus”; इसमें ब्रिक्स आतंकवाद-रोधी कार्य योजना स्वीकार हुई और टीका अनुसंधान एवं विकास केंद्र शुरू किया गया।
  • 2026, 18वाँ शिखर सम्मेलन, नई दिल्ली: विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”; 140 अनुच्छेदों की नई दिल्ली घोषणा सर्वसम्मति से स्वीकार हुई।

नई दिल्ली घोषणा 2026: विषयवार प्रमुख परिणाम

वैश्विक शासन में सुधार: सुरक्षा परिषद, IMF और WTO

नई दिल्ली घोषणा शिखर सम्मेलन का सर्वसम्मत पाठ है, और इसका पहला विषय वैश्विक संस्थाओं में सुधार है। संयुक्त राष्ट्र के बारे में सदस्य सुरक्षा परिषद के व्यापक सुधार का समर्थन करते हैं, ताकि विकासशील देशों को अधिक सीटें मिलें। सुरक्षा परिषद के जो दो स्थायी सदस्य ब्रिक्स में हैं, चीन और रूस, वे यह समर्थन दोहराते हैं कि सुरक्षा परिषद सहित संयुक्त राष्ट्र में ब्राज़ील और भारत की भूमिका बड़ी हो। घोषणा यह भी दर्ज करती है कि आज तक कोई महिला संयुक्त राष्ट्र महासचिव नहीं चुनी गई।

सुरक्षा परिषद में पाँच स्थायी सदस्य हैं: संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ़्रांस और चीन। इन्हें इसलिए चुना गया था कि द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में ये सबसे शक्तिशाली देश और विजेता थे। इनके अतिरिक्त दस अस्थायी सदस्य होते हैं। स्थायी सीट पर भारत का दावा उसके आर्थिक उदय पर टिका है, और इस बात पर भी कि वह संयुक्त राष्ट्र को नियमित वित्तीय योगदान देता रहा है और भुगतान में कभी नहीं चूका।

नई दिल्ली घोषणा के 140 अनुच्छेदों का खंडवार दंड-आरेख: प्रस्तावना और अध्यक्षता 6, वैश्विक शासन 16, शांति और सुरक्षा 26, अर्थव्यवस्था, विकास और वित्त 73, और जन-से-जन सहयोग 19। आर्थिक खंड सबसे लंबा है।

श्री मोदी ने नेताओं से वैश्विक शासन में सुधार के दस प्रस्ताव तैयार करने को कहा, जो अगले शिखर सम्मेलन तक ब्रिक्स सुधार रोडमैप बनें। इनके केंद्र में तीन विचार हैं: प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम-निर्माण। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद पर वार्ता की एक निश्चित समय-सीमा होनी चाहिए, और वैश्विक दक्षिण को "नियम मानने वालों से नियम गढ़ने वालों" की भूमिका में आना होगा। उन्होंने संकट में फँसे नाविकों की सहायता के लिए एक नाविक आपात सहायता नेटवर्क (Seafarers' Emergency Support Network) का प्रस्ताव भी रखा।

वित्त के क्षेत्र में घोषणा एक सशक्त, कोटा-आधारित और पर्याप्त संसाधनों वाला IMF चाहती है। यह आग्रह करती है कि कोटा की 16वीं सामान्य समीक्षा में तय कोटा-वृद्धि बिना देरी लागू हो, और 17वीं समीक्षा में ऐसा पुनर्संरेखण हो जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं का हिस्सा बढ़े। इसका कारण स्पष्ट है: IMF के मतों में संयुक्त राज्य अमेरिका की हिस्सेदारी 16.49 प्रतिशत है, और बड़े निर्णयों के लिए 85 प्रतिशत के विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। अतः अमेरिका अकेले ही किसी बड़े निर्णय को रोक सकता है।

व्यापार पर सदस्य देश उन एकतरफ़ा प्रशुल्क और गैर-प्रशुल्क उपायों पर गंभीर चिंता जताते हैं, जो विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों को तोड़ते हैं। वे WTO की दो-स्तरीय विवाद निपटान व्यवस्था को फिर से चालू करने के लिए अपीलीय निकाय में नए सदस्यों की नियुक्ति की माँग करते हैं, और WTO में इथियोपिया तथा ईरान के प्रवेश का समर्थन करते हैं। वे द्वितीयक प्रतिबंधों सहित एकतरफ़ा दंडात्मक उपायों की निंदा करते हैं, और कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) का संरक्षणवादी मानकर विरोध करते हैं।

शांति और सुरक्षा: ग़ाज़ा, आतंकवाद और बाह्य अंतरिक्ष

पश्चिम एशिया के अतिरिक्त, घोषणा कई अन्य संघर्षों और ख़तरों पर स्पष्ट रुख़ अपनाती है।

  • ग़ाज़ा और फ़िलिस्तीन: अक्टूबर 2025 के युद्धविराम के बावजूद जारी हिंसा पर चिंता; फ़िलिस्तीनियों के किसी भी जबरन विस्थापन को रोकने की माँग; 1967 की सीमाओं के भीतर, पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर, एक संप्रभु फ़िलिस्तीन राज्य का समर्थन, और उसे संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता का समर्थन। इज़राइल के विरुद्ध दक्षिण अफ़्रीका के मामले में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के अनंतिम उपायों का भी उल्लेख है।
  • लेबनान: इज़राइल लेबनान के क्षेत्र से अपनी सेनाएँ हटाए; लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) पर हमलों की निंदा, जिनमें इंडोनेशिया के चार शांति-सैनिक मारे गए।
  • आतंकवाद: 22 अप्रैल 2025 को जम्मू और कश्मीर में हुए आतंकी हमले की निंदा, जिसमें 26 लोग मारे गए थे; दोहरे मानदंडों की अस्वीकृति; आतंकियों की सीमा-पार आवाजाही, आतंक के वित्तपोषण और सुरक्षित पनाहगाहों का स्पष्ट उल्लेख; और संयुक्त राष्ट्र में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय (CCIT) को स्वीकार करने की माँग।
  • अन्य संघर्ष: सूडान में तुरंत युद्धविराम, सीरिया में समावेशी संक्रमण, और क्यूबा के विरुद्ध आर्थिक उपायों की समाप्ति।
  • बाह्य अंतरिक्ष: बाह्य अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ रोकने का समर्थन, और अंतरिक्ष में हथियार रखने के विरुद्ध उस प्रारूप संधि का समर्थन, जो 2014 में निरस्त्रीकरण सम्मेलन में प्रस्तुत की गई थी।

भारत के लिए आतंकवाद वाला अनुच्छेद सबसे महत्त्वपूर्ण है। पहलगाम हमले की निंदा ऐसे पाठ में दर्ज हुई, जिसे चीन सहित हर सदस्य ने स्वीकार किया। इसी के साथ आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता और उससे निपटने में दोहरे मानदंड न अपनाने का आह्वान भी है। नेताओं ने ब्रिक्स आतंकवाद-रोधी कार्य-समूह और उसके पाँच उप-समूहों के काम का भी स्वागत किया।

स्वास्थ्य, कृषि, प्रौद्योगिकी और व्यापार में नई ब्रिक्स पहलें

घोषणा का सबसे बड़ा भाग, 140 में से 73 अनुच्छेद, आर्थिक और विकास सहयोग पर है। भारत की अध्यक्षता के व्यावहारिक परिणाम इसी भाग में हैं। नेताओं ने इन पहलों को स्वीकार किया या इनका स्वागत किया:

  • ब्रिक्स एकीकृत पूर्व चेतावनी प्रणाली (स्वास्थ्य): बड़े पैमाने पर फैलने वाले संक्रामक रोगों की पहले से चेतावनी देने के लिए एक उप-कार्य-समूह।
  • स्वस्थ जीवनशैली के लिए ब्रिक्स मिशन (स्वास्थ्य): मोटापे और गैर-संचारी रोगों के विरुद्ध 2026-2029 का रोडमैप।
  • मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों का नेटवर्क (स्वास्थ्य): NIMHANS के समन्वय में उत्कृष्टता केंद्र।
  • ब्रिक्स अनाज विनिमय (कृषि): सदस्य देशों के बीच अनाज व्यापार का एक मंच, जिस पर अभी चर्चा चल रही है।
  • ब्रिक्स AGRIN (कृषि): कृषि-आदानों, आनुवंशिक संसाधनों और सूचना पर किसान-केन्द्रित नेटवर्क।
  • डिजिटल कृषि पर ब्रिक्स नेटवर्क (कृषि): किसानों के लिए AI, भू-स्थानिक उपकरण और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना।
  • ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क (नवाचार): सदस्य देशों के स्टार्ट-अप और इनक्यूबेटरों को जोड़ता है; एक स्टार्ट-अप नवाचार कोष पर विचार हो रहा है।
  • लॉजिस्टिक्स आपूर्ति-शृंखला सहयोग ढाँचा (व्यापार): आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक विश्वसनीय और लचीला बनाता है।
  • जयपुर सर्वसम्मति (व्यापार): MSME की कार्यशील पूँजी मुक्त करने के लिए बीजक बट्टाकरण (invoice discounting) व्यवस्था का अध्ययन।
  • BRICS CONNECT (श्रम): क्षमता निर्माण, रोज़गार-योग्यता, नए कौशल और सामाजिक सुरक्षा।
  • ब्रिक्स शहरी गतिशीलता केंद्र (शहरी): शहरी परिवहन की अच्छी पद्धतियों का आदान-प्रदान।

पूरे सम्मेलन में प्रौद्योगिकी छाई रही। नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के वैश्विक शासन पर अपने वक्तव्य को लागू करने का संकल्प लिया, और फ़रवरी 2026 में भारत में हुए AI इम्पैक्ट समिट का स्वागत किया। श्री मोदी ने प्रौद्योगिकी और महत्त्वपूर्ण खनिजों तक पहुँच को "हथियार बनाने" के ख़िलाफ़ चेतावनी दी। श्री शी ने पाँच-सूत्री योजना रखी, जिसमें एक ब्रिक्स AI ओपन सोर्स समुदाय शामिल है, जबकि रूस ने एक बीमा तंत्र और एक अनाज बाज़ार का प्रस्ताव रखा।

जलवायु पर सदस्य देश पेरिस समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं, COP32 की अध्यक्षता के लिए इथियोपिया का समर्थन करते हैं, और भारत के अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन (IBCA) का उल्लेख करते हैं। वे 2026 में किम्बर्ली प्रक्रिया की भारत की अध्यक्षता का भी स्वागत करते हैं; यह प्रक्रिया कच्चे हीरों को प्रमाणित करने वाली व्यवस्था है।

ब्रिक्स का वित्त: नव विकास बैंक, आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था और ब्रिक्स मुद्रा

नव विकास बैंक (NDB): मुख्यालय, पूँजी और ऋण

ब्रिक्स का अपना ऋणदाता नव विकास बैंक (न्यू डेवलपमेंट बैंक, NDB) है। पाँच संस्थापक देशों ने 15 जुलाई 2014 को ब्राज़ील के फ़ोर्टालेज़ा में हुए छठे शिखर सम्मेलन में इसके समझौते पर हस्ताक्षर किए, और इसका मुख्यालय चीन के शंघाई में है। यह बैंक ब्रिक्स देशों और अन्य उभरते तथा विकासशील देशों में अवसंरचना और सतत विकास के लिए धन जुटाता है। इसके पहले ऋण 2016 में दिए गए, जिनमें से अधिकांश नवीकरणीय ऊर्जा के लिए थे।

  • पूँजी: प्रारंभिक अधिकृत पूँजी 100 अरब अमेरिकी डॉलर; 50 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रारंभिक अभिदत्त पूँजी पाँचों संस्थापकों में बराबर बाँटी गई।
  • मताधिकार: हर संस्थापक का हिस्सा बराबर है, इसलिए कोई एक देश बैंक को नियंत्रित नहीं करता। नए सदस्य जुड़ सकते हैं, पर संस्थापकों का सामूहिक हिस्सा 55 प्रतिशत से कम नहीं हो सकता।
  • नेतृत्व: भारत के के. वी. कामत इसके पहले अध्यक्ष थे; मार्च 2023 में चुनी गईं ब्राज़ील की डिल्मा रूसेफ़ अब इसका नेतृत्व करती हैं।
नव विकास बैंक के ऋण का दंड-आरेख: 139 परियोजनाओं के लिए लगभग 43 अरब US डॉलर स्वीकृत, लगभग 20 अरब US डॉलर वितरित, और भारत की 32 परियोजनाओं के लिए लगभग 10 अरब US डॉलर स्वीकृत।

एक दशक बाद बैंक का रिकॉर्ड साधारण है। इसने लगभग 43 अरब अमेरिकी डॉलर की 139 परियोजनाएँ स्वीकृत की हैं, जिनमें से अधिकांश संस्थापक देशों में हैं, पर वितरित केवल लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर किए हैं। भारत के लिए 32 परियोजनाओं में लगभग 10 अरब अमेरिकी डॉलर स्वीकृत हुए हैं, जिनमें मेट्रो लाइनें और दिल्ली-ग़ाज़ियाबाद-मेरठ RRTS गलियारा शामिल हैं।

प्रतिबंधों ने बैंक को नुकसान पहुँचाया है। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद मार्च 2022 में बैंक ने रूस से जुड़े कामकाज रोक दिए, और तब से रूस को कोई नया ऋण नहीं दिया। ऐसा अपनी AA से AA-plus की साख रेटिंग बचाने के लिए किया गया। बैंक की 2022-26 की रणनीति का लक्ष्य था कि उसके ऋण और उधारी का 30 प्रतिशत सदस्यों की अपनी मुद्राओं में हो, किन्तु 2025 के मध्य तक यह हिस्सा लगभग 22 प्रतिशत ही था, और लंबे समय से वादा किया गया रुपया बॉन्ड अब तक जारी नहीं हुआ है।

घोषणा बैंक की बढ़ती भूमिका, अधिक सदस्यता और स्थानीय मुद्रा में अधिक वित्तपोषण का समर्थन करती है। यह मई 2026 में मॉस्को में बैंक की 11वीं वार्षिक बैठक की मेज़बानी के लिए रूस को धन्यवाद देती है, और भारत की अध्यक्षता में शुरू हुए ब्रिक्स-NDB ज्ञान पोर्टल का स्वागत करती है।

NDB और AIIB की तुलना: उभरती अर्थव्यवस्थाओं के दो बैंक

2010 के दशक में उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने जो दो बैंक बनाए, भारत दोनों का संस्थापक सदस्य है, और परीक्षा में दोनों को अक्सर एक-दूसरे से मिला दिया जाता है। एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (AIIB) चीन के नेतृत्व वाला ऋणदाता है, जिसने 16 जनवरी 2016 को काम शुरू किया। तालिका दोनों को आमने-सामने रखती है।

NDB और AIIB की तुलना
विशेषता NDB AIIB
किसने बनाया पाँच ब्रिक्स देश (2014 का समझौता) चीन के नेतृत्व में; 16 जनवरी 2016 से कार्यरत
मुख्यालय शंघाई बीजिंग
सदस्य पाँच संस्थापक, नए सदस्यों के लिए खुला 111 सदस्य देश, जिनमें जर्मनी जैसे एशिया से बाहर के देश भी
मताधिकार पाँचों संस्थापकों का बराबर अभिदत्त पूँजी के अनुसार: चीन सबसे बड़ा, भारत दूसरा
ऋण 139 परियोजनाएँ, लगभग 43 अरब अमेरिकी डॉलर 350 परियोजनाएँ, लगभग 69 अरब अमेरिकी डॉलर
साख रेटिंग AA से AA-plus AAA

दोनों बैंक भारत के लिए अलग-अलग ढंग से उपयोगी हैं। NDB में भारत का मत चीन के बराबर है, और इस बैंक ने भारत की परिवहन परियोजनाओं को धन दिया है। AIIB में भारत की अभिदत्त पूँजी दूसरी सबसे बड़ी है: 8,367.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर, जबकि चीन की 29,780.4 मिलियन अमेरिकी डॉलर। इससे भारत को ऐसे बैंक में आवाज़ मिलती है, जिसके सदस्य अधिक हैं, ऋण अधिक हैं और साख रेटिंग सर्वोच्च है।

दोनों ही बैंक भारत को ब्रेटन वुड्स संस्थाओं के बाहर अवसंरचना के लिए धन के स्रोत देते हैं। साथ ही AIIB से भारत यह भी देख पाता है कि ऐसे किसी बैंक को चीन का प्रभाव कितना दिशा दे सकता है।

ब्रिक्स मुद्रा (करेंसी) और डी-डॉलरीकरण: समूह ने क्या तय किया

यह काम ब्रिक्स भुगतान कार्यबल (BRICS Payment Task Force) के पास है, जो यह अध्ययन करता है कि सदस्य देशों की भुगतान और संदेश प्रणालियाँ आपस में कैसे काम कर सकती हैं। घोषणा का संबंधित अनुच्छेद इस काम को स्वीकार तो करता है, पर कोई नया लक्ष्य तय नहीं करता। इसी कारण स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की प्रगति को धीमी और क्रमिक बताया जाता है।

इस सावधानी की बड़ी वजह भारत का रुख़ है। भारत स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का समर्थन करता है, पर साझा ब्रिक्स मुद्रा का विरोध करता है। कारण यह है कि ब्रिक्स के कुल निर्यात का लगभग दो-तिहाई चीन से होता है, अतः साझा मुद्रा व्यवहार में युआन पर ही चलेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी ब्रिक्स मुद्रा अपनाने वाले देशों पर 100 प्रतिशत प्रशुल्क की धमकी दी है। ब्रिक्स साझेदारों के साथ भारत का रुपया-व्यापार केवल UAE और रूस तक सीमित है, और रूसी तेल का भुगतान भारत ने UAE के दिरहम में भी किया है।

अब तक का रिकॉर्ड भी इसी सावधानी से मेल खाता है। जुलाई 2025 की 126 बिंदुओं वाली रियो घोषणा में "डी-डॉलरीकरण" शब्द एक बार भी नहीं आया, और श्री पुतिन ने नवंबर 2024 में कहा था कि समूह ने डॉलर छोड़ने की कोशिश नहीं की है। स्वयं NDB के बकाया बॉन्ड में से आधे अमेरिकी डॉलर में हैं।

आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (Contingent Reserve Arrangement, CRA) 100 अरब अमेरिकी डॉलर के भंडार का एक साझा कोष है। इसे 2015 में इसलिए बनाया गया था कि वित्तीय संकट में कोई सदस्य IMF के पास गए बिना संभल सके, पर आज तक इसका कभी उपयोग नहीं हुआ। अपने आवंटित हिस्से के 30 प्रतिशत से अधिक राशि चाहने वाले सदस्य को पहले IMF के किसी कार्यक्रम में शामिल होना पड़ता है। घोषणा CRA संधि में ऐसे संशोधनों का स्वागत करती है, जो इसे अधिक लचीला बनाएँ, साथ ही इसके नौवें परीक्षण का, और नए सदस्यों को इसमें लाने पर चल रही बातचीत का भी।

भारत और ब्रिक्स: सामरिक स्वायत्तता, चीन और पश्चिम

भारत के लिए ब्रिक्स का महत्त्व: गैर-पश्चिमी, पश्चिम-विरोधी नहीं

ब्रिक्स किसलिए है, इस पर सदस्य एकमत नहीं हैं। रूस, चीन और ईरान एक पश्चिम-विरोधी ब्रिक्स चाहते हैं, जबकि भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीका इसे गैर-पश्चिमी मानते हैं: उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक मंच, किसी के विरुद्ध बना गुट नहीं। श्री मोदी ने सम्मेलन में यही बात कही कि ब्रिक्स "किसी के विरुद्ध नहीं", बल्कि सबको साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।

भारत के लिए यह समूह सामरिक स्वायत्तता (strategic autonomy) का साधन है, अर्थात् किसी खेमे में शामिल हुए बिना सभी बड़ी शक्तियों के साथ काम करने की स्वतंत्रता। ब्रिक्स के कारण भारत संयुक्त राज्य अमेरिका से घनिष्ठ संबंध रखते हुए भी अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता का मोर्चा नहीं बनता। साथ ही, जब द्विपक्षीय यात्राएँ रुक जाती हैं, तब भी चीन से बात करने का एक मंच भारत के पास रहता है।

  • कूटनीतिक प्रतिष्ठा: युद्ध के समय सर्वसम्मत पाठ, जैसा 2023 में भारत की मेज़बानी वाले G20 शिखर सम्मेलन में हुआ था, बँटे हुए खेमों के बीच सेतु के रूप में भारत की साख बढ़ाता है।
  • भारत-चीन संबंध: श्री मोदी और श्री शी ने अगस्त 2025 में तियानजिन की भेंट के बाद से हुई स्थिर प्रगति का स्वागत किया। दोनों सहमत हुए कि मतभेद विवाद न बनें, और सीमा प्रश्न का न्यायसंगत, उचित और परस्पर स्वीकार्य समाधान खोजा जाए। चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 2014 के बाद से 38 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 113 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है।
  • सुरक्षा हित: पहलगाम की निंदा ऐसे पाठ में दर्ज हुई जिस पर चीन ने भी सहमति दी, और संयुक्त राष्ट्र में भारत की बड़ी भूमिका को रूस तथा चीन का समर्थन मिला।
  • द्विपक्षीय लाभ: UAE की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी ने ओडिशा में एक एल्युमिनियम परियोजना में 11.5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की, और मलेशिया कोटा किनाबालु में भारत का महावाणिज्य दूतावास खोलने पर सहमत हुआ। श्री पुतिन ने श्री मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया।

विस्तारित ब्रिक्स की चुनौतियाँ और 2027 की राह

विस्तार ने ब्रिक्स को बड़ा तो बनाया है, पर उसे सँभालना कठिन भी कर दिया है। नई दिल्ली सम्मेलन में ये दोनों पहलू दिखे:

  • सदस्यों के बीच प्रतिद्वंद्विता: ईरान और UAE एक अघोषित संघर्ष में हैं, और नए सदस्य अपने द्विपक्षीय विवाद समूह में ले आए हैं। यही ख़तरा SAARC को निष्क्रिय कर चुका है।
  • दबाव में सर्वसम्मति: रूस की अध्यक्षता में 2020 में और फिर मई 2026 में भारत द्वारा ऐसा अध्यक्षीय वक्तव्य जारी हुआ, जिस पर सर्वसम्मति नहीं थी। यदि यह आम बात बन गई, तो ब्रिक्स का वज़न घटेगा।
  • चीन का प्रभाव: सुधार के लिए चीन का समर्थन चुनिंदा है, जैसे भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीका की सुरक्षा परिषद सीटों के प्रश्न पर; वह AIIB और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव जैसे समानांतर ढाँचे भी खड़े करता है।
  • वाशिंगटन का दबाव: श्री ट्रम्प ने ब्रिक्स पर डॉलर के विरुद्ध षड्यंत्र का आरोप लगाया है और इसके सदस्यों को प्रशुल्क की धमकी दी है; ब्राज़ील और भारत पहले ही दंडात्मक अमेरिकी प्रशुल्क झेल चुके हैं।
  • परिणाम देने की क्षमता: NDB धीमी गति से ऋण वितरित करता है, CRA का कभी उपयोग नहीं हुआ, और सऊदी अरब की स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है।

अब अध्यक्षता चीन के पास जाएगी, जो 2027 में 19वें शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा; घोषणा के अंतिम अनुच्छेद में इसके लिए भारत का पूर्ण समर्थन दर्ज है। श्री मोदी द्वारा प्रस्तावित ब्रिक्स सुधार रोडमैप उसी सम्मेलन तक तैयार होना है, और 12वाँ ब्रिक्स संसदीय मंच अक्टूबर 2026 में मिलेगा।

UPSC के लिए ब्रिक्स: पाठ्यक्रम और 2026 के शिखर सम्मेलन से जुड़े परीक्षा-बिंदु

UPSC पाठ्यक्रम में ब्रिक्स: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II और प्रारंभिक परीक्षा

ब्रिक्स सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II के अंतर्राष्ट्रीय संबंध खंड में आता है। पाठ्यक्रम में यह दो जगह है: भारत से जुड़े या उसके हितों को प्रभावित करने वाले समूह और समझौते, तथा महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ, उनकी संरचना और अधिदेश (सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II का पाठ्यक्रम (अंग्रेज़ी में))। नव विकास बैंक, भुगतान और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III को भी छूते हैं, और राज्य लोक सेवा आयोगों की परीक्षाएँ भी यही तथ्य पूछती हैं।

  1. प्रारंभिक परीक्षा के तथ्य: सदस्य और भागीदार देश, सदस्यों के जुड़ने का क्रम, शिखर सम्मेलनों के स्थान और विषय, और NDB का मुख्यालय तथा संस्थापक।
  2. मुख्य परीक्षा का विश्लेषण: वैश्विक दक्षिण की आवाज़ के रूप में ब्रिक्स, भारत का गैर-पश्चिमी रुख़, डी-डॉलरीकरण की सीमाएँ, और AIIB तथा ब्रेटन वुड्स संस्थाओं की तुलना में NDB।
  3. निबंध और साक्षात्कार: सुधारित बहुपक्षवाद, सामरिक स्वायत्तता, और बँटी हुई दुनिया में सेतु के रूप में भारत की भूमिका।

विगत वर्षों के प्रश्न: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा इस लेख को पढ़ने के बाद आप यूपीएससी के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिख सकेंगे। हर प्रश्न के साथ एक खुलने वाली रूपरेखा है, जो बताती है कि परीक्षा में उसे कैसे हल करें।

  1. यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2026, सामान्य अध्ययन-II"ब्रिक्स (BRICS) वैश्विक शासन में एक शक्तिशाली संतुलनकारी शक्ति के रूप में कार्य करता है, जो वैश्विक दक्षिण की आवाज़ और प्रभाव को सक्रिय रूप से प्रबल बनाता है।" ब्रिक्स (BRICS) की भूमिका को समझाइए कि वह स्वयं को अन्य समूहों के विकल्प के रूप में कैसे प्रस्तुत करता है?
    उत्तर-लेखन रूपरेखा

    प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।

    निर्देशात्मक शब्द: समझाइए · दृष्टिकोण: प्रश्न का केंद्र "विकल्प" शब्द है। पहले दिखाएँ कि ब्रिक्स स्वयं को विकल्प के रूप में कैसे प्रस्तुत करता है (आवाज़, अपनी संस्थाएँ, अपना एजेंडा), फिर उसकी सीमाओं से इस दावे को परखें।

    भूमिका: ब्रिक्स को ग्यारह सदस्यों के ऐसे समूह के रूप में प्रस्तुत करें, जिसमें विश्व की 49.5 प्रतिशत जनसंख्या रहती है और विश्व GDP में जिसकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है; सितंबर 2026 में नई दिल्ली के 18वें शिखर सम्मेलन ने 140 अनुच्छेदों की घोषणा सर्वसम्मति से स्वीकार की।

    मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):

    • वैश्विक दक्षिण की आवाज़: सुरक्षा परिषद में सुधार और ब्राज़ील तथा भारत की बड़ी भूमिका का समर्थन; IMF कोटा का पुनर्संरेखण, क्योंकि अमेरिका के 16.49 प्रतिशत मत 85 प्रतिशत की सीमा पर उसे वीटो देते हैं; WTO अपीलीय निकाय की बहाली।
    • अपनी संस्थाएँ: नव विकास बैंक (संस्थापकों के बराबर मत) और 100 अरब अमेरिकी डॉलर की आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था, ब्रेटन वुड्स संस्थाओं के विकल्प के रूप में।
    • वैकल्पिक एजेंडा: एकतरफ़ा प्रशुल्क, द्वितीयक प्रतिबंधों और कार्बन सीमा करों का विरोध; स्वास्थ्य, खाद्य, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और AI पर सहयोग।
    • पश्चिम-विरोधी नहीं: भारत का गैर-पश्चिमी रुख़; सर्वसम्मति की कूटनीति; भागीदार देशों से बढ़ती पहुँच।
    • सीमाएँ: ईरान-UAE प्रतिद्वंद्विता; साझा मुद्रा का अभाव; NDB ने लगभग 43 अरब अमेरिकी डॉलर स्वीकृत किए पर लगभग 20 अरब ही वितरित किए; CRA का कभी उपयोग नहीं हुआ; चीन का प्रभाव।

    निष्कर्ष: निष्कर्ष में लिखें कि आवाज़ और एजेंडा के स्तर पर ब्रिक्स एक विश्वसनीय संतुलनकारी शक्ति है, किन्तु उसकी संस्थाएँ अभी मौजूदा व्यवस्था की जगह नहीं लेतीं, उसकी पूरक बनती हैं।

  2. यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2014, सामान्य अध्ययन-IIभारत ने हाल ही में "नव विकास बैंक" (NDB) और साथ ही "एशियाई आधारिक संरचना निवेश बैंक" (AIIB) के संस्थापक सदस्य बनने के लिये हस्ताक्षर किये हैं। इन दो बैंकों की भूमिकाएं एक दूसरे से किस प्रकार भिन्न होंगी? भारत के लिये इन दो बैंकों के रणनीतिक महत्व पर चर्चा कीजिये।
    उत्तर-लेखन रूपरेखा

    प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।

    निर्देशात्मक शब्द: चर्चा कीजिए · दृष्टिकोण: प्रश्न के दो भाग हैं। पहले दोनों बैंकों की भूमिका का अंतर विशेषता-दर-विशेषता बताएँ, फिर भारत के लिए हर बैंक के रणनीतिक महत्त्व को अलग-अलग तौलें।

    भूमिका: NDB (2014 में फ़ोर्टालेज़ा में ब्रिक्स समझौता; मुख्यालय शंघाई) और AIIB (चीन के नेतृत्व में; जनवरी 2016 से कार्यरत; मुख्यालय बीजिंग) का परिचय दें, और बताएँ कि भारत दोनों का संस्थापक सदस्य है।

    मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):

    • स्वामित्व और मताधिकार: NDB में पाँचों संस्थापकों के मत बराबर, और संस्थापकों का हिस्सा कम से कम 55 प्रतिशत; AIIB में मत पूँजी के अनुसार, चीन सबसे बड़ा, भारत दूसरा।
    • सदस्यता और पहुँच: NDB छोटा और नए सदस्यों के लिए खुला; AIIB में एशिया से बाहर के देशों सहित 111 सदस्य देश।
    • ऋण: NDB की 139 परियोजनाएँ, लगभग 43 अरब अमेरिकी डॉलर; AIIB की 350 परियोजनाएँ, लगभग 69 अरब अमेरिकी डॉलर; AIIB की रेटिंग AAA, जबकि NDB की AA से AA-plus।
    • भारत के लिए: अवसंरचना के लिए धन (NDB की 32 परियोजनाओं में लगभग 10 अरब अमेरिकी डॉलर, जिनमें दिल्ली-ग़ाज़ियाबाद-मेरठ RRTS शामिल है); ब्रेटन वुड्स संस्थाओं से अधिक प्रभाव; दक्षिण-दक्षिण सहयोग में भूमिका।
    • सावधानी: AIIB में चीन का प्रभाव; रूस पर प्रतिबंधों से NDB की गति धीमी।

    निष्कर्ष: निष्कर्ष में लिखें कि दोनों बैंक एक-दूसरे और विश्व बैंक के पूरक हैं; ये विकास-वित्त के लिए भारत के विकल्प बढ़ाते हैं और वैश्विक आर्थिक शासन में उसकी आवाज़ को मज़बूत करते हैं।

  3. यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2025BRICS के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
    1. I. 16वाँ BRICS शिखर सम्मेलन रूस की अध्यक्षता में कज़ान में संपन्न हुआ था।
    2. II. इंडोनेशिया BRICS का पूर्ण सदस्य बन गया है।
    3. III. 16वाँ BRICS शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय न्यायपूर्ण वैश्विक विकास और सुरक्षा के लिए बहुसंस्कृतिवाद को सशक्त करना था।

    उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

    1. a I और II
    2. b II और III
    3. c I और III
    4. d केवल I
    इस प्रश्न को कैसे हल करें

    प्रश्न का प्रकार: बहु-कथन

    हल करने की विधि: चरण 1: कथन I, 16वाँ शिखर सम्मेलन रूस की अध्यक्षता में कज़ान में हुआ: यह सही है। चरण 2: कथन II, इंडोनेशिया जनवरी 2025 में पूर्ण सदस्य बना: यह भी सही है। चरण 3: कथन III में "बहुपक्षवाद" की जगह "बहुसंस्कृतिवाद" लिखा गया है, अतः यह गलत है। इसलिए कथन I एवं कथन II सही हैं।

    इस भ्रम से बचें: विषय में केवल एक शब्द बदला गया है: बहुपक्षवाद की जगह बहुसंस्कृतिवाद।

    विकल्पवार व्याख्या:

    • (a) I और II: सही। रूस की अध्यक्षता में कज़ान सम्मेलन और इंडोनेशिया की सदस्यता, दोनों तथ्य सही हैं।
    • (b) II और III: गलत। कथन III सम्मेलन का विषय गलत बताता है।
    • (c) I और III: गलत। कथन III सम्मेलन का विषय गलत बताता है।
    • (d) केवल I: गलत। कथन II भी सही है, क्योंकि इंडोनेशिया जनवरी 2025 में सदस्य बन गया।

    उत्तर: कथन I एवं कथन II सही हैं: विकल्प (a), आधिकारिक उत्तर।

  4. यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2019एशियाई आधारिक-संरचना निवेश बैंक [एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट बैंक (AIIB)] के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
    1. AIIB के 80 से अधिक सदस्य राष्ट्र हैं।
    2. AIIB में भारत सबसे बड़ा शेयरधारक है।
    3. AIIB में एशिया से बाहर का कोई सदस्य नहीं है।

    उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

    1. a केवल 1
    2. b केवल 2 और 3
    3. c केवल 1 और 3
    4. d 1, 2 और 3
    इस प्रश्न को कैसे हल करें

    प्रश्न का प्रकार: बहु-कथन

    हल करने की विधि: चरण 1: कथन 1, 80 से अधिक सदस्य: सही, क्योंकि AIIB के 111 सदस्य हैं। चरण 2: कथन 2, भारत सबसे बड़ा शेयरधारक: गलत; सबसे बड़ा शेयरधारक चीन है और भारत दूसरे स्थान पर है। चरण 3: कथन 3, एशिया से बाहर कोई सदस्य नहीं: गलत, क्योंकि जर्मनी इसका सदस्य है। अतः केवल कथन 1 सही है।

    इस भ्रम से बचें: भारत बड़ा शेयरधारक है, इसलिए कथन 2 सही लगता है; पर वह दूसरे स्थान पर है, पहले पर नहीं।

    विकल्पवार व्याख्या:

    • (a) केवल 1: सही। केवल सदस्य संख्या वाला कथन सही है।
    • (b) केवल 2 और 3: गलत। सबसे बड़ा शेयरधारक भारत नहीं, चीन है, और बैंक में एशिया से बाहर के सदस्य भी हैं।
    • (c) केवल 1 और 3: गलत। कथन 3 गलत है, क्योंकि जर्मनी जैसे एशिया से बाहर के देश सदस्य हैं।
    • (d) 1, 2 और 3: गलत। कथन 2 और कथन 3, दोनों गलत हैं।

    उत्तर: केवल कथन 1 सही है: विकल्प (a), आधिकारिक उत्तर।

  5. यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2016 (हिंदी रूपांतर)निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
    1. नव विकास बैंक की स्थापना APEC ने की है।
    2. नव विकास बैंक का मुख्यालय शंघाई में है।

    उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

    1. a केवल 1
    2. b केवल 2
    3. c 1 और 2 दोनों
    4. d न तो 1, न ही 2
    इस प्रश्न को कैसे हल करें

    प्रश्न का प्रकार: बहु-कथन

    हल करने की विधि: चरण 1: कथन 1, बैंक APEC ने बनाया: गलत; NDB ब्रिक्स का बैंक है। चरण 2: कथन 2, मुख्यालय शंघाई में: सही। अतः केवल कथन 2 सही है।

    इस भ्रम से बचें: APEC एशिया-प्रशांत का एक आर्थिक मंच है; इस नाम का कोई विकास बैंक उसका नहीं है।

    विकल्पवार व्याख्या:

    • (a) केवल 1: गलत। NDB की स्थापना APEC ने नहीं, ब्रिक्स ने की।
    • (b) केवल 2: सही। NDB का मुख्यालय शंघाई में है, और इसे ब्रिक्स ने बनाया।
    • (c) 1 और 2 दोनों: गलत। कथन 1 गलत है।
    • (d) न तो 1, न ही 2: गलत। कथन 2 सही है।

    उत्तर: केवल कथन 2 सही है: विकल्प (b), आधिकारिक उत्तर।

  6. यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2014 (हिंदी रूपांतर)BRICS के नाम से ज्ञात देशों के समूह के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
    1. BRICS का पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रियो डी जनेरियो में हुआ था।
    2. BRICS समूह में सबसे अंत में शामिल होने वाला देश दक्षिण अफ़्रीका था।

    उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

    1. a केवल 1
    2. b केवल 2
    3. c 1 और 2 दोनों
    4. d न तो 1, न ही 2
    इस प्रश्न को कैसे हल करें

    प्रश्न का प्रकार: बहु-कथन

    हल करने की विधि: चरण 1: कथन 1, पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रियो डी जनेरियो में: गलत; यह येकातेरिनबर्ग में हुआ था। चरण 2: कथन 2, दक्षिण अफ़्रीका सबसे अंत में जुड़ा: 2014 में यह सही था, क्योंकि तब वही सबसे नया सदस्य था। अतः केवल कथन 2 सही है।

    इस भ्रम से बचें: वर्ष 2009 सही है, पर शहर गलत। कथन 2 2014 में सही था; उसके बाद मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE और इंडोनेशिया जुड़ चुके हैं।

    विकल्पवार व्याख्या:

    • (a) केवल 1: गलत। पहला शिखर सम्मेलन रियो डी जनेरियो में नहीं, येकातेरिनबर्ग में हुआ था।
    • (b) केवल 2: सही। 2014 में दक्षिण अफ़्रीका, जो 2010 में जुड़ा, सबसे अंत में जुड़ने वाला देश था।
    • (c) 1 और 2 दोनों: गलत। कथन 1 गलत है।
    • (d) न तो 1, न ही 2: गलत। प्रश्न पूछे जाने के समय कथन 2 सही था।

    उत्तर: केवल कथन 2 सही है: विकल्प (b), आधिकारिक उत्तर, 2014 की स्थिति के अनुसार।

स्रोत

संपादकीय अस्वीकरण

यह लेख नई दिल्ली घोषणा, आधिकारिक विज्ञप्तियों और इस पृष्ठ पर दिए गए अन्य स्रोतों पर आधारित है।