परिचय
नैनो-प्रौद्योगिकी (nanotechnology), जिसे नैनो टेक्नोलॉजी भी कहते हैं, ऐसे पदार्थ को गढ़ना है जिसकी कम से कम एक विमा 1 से 100 नैनोमीटर के बीच हो; इस पैमाने पर आकार ही पदार्थ का रंग, सामर्थ्य और अभिक्रियाशीलता बदल देता है। इसका उपयोग चिकित्सा, कृषि, इलेक्ट्रॉनिकी, ऊर्जा और जल शोधन में होता है।
नैनोविज्ञान और नैनो-प्रौद्योगिकी: अति सूक्ष्म का विज्ञान
नैनो-प्रौद्योगिकी क्या है: नैनोमीटर का पैमाना और इतिहास
जब किसी पदार्थ की कम से कम एक विमा 1 से 100 नैनोमीटर (nm) के बीच हो और उसे इसी पैमाने पर गढ़ा या बदला जाए, तो यह नैनो-प्रौद्योगिकी है। इस पैमाने पर पृष्ठीय क्षेत्रफल और क्वांटम प्रभाव तय करने लगते हैं कि पदार्थ कैसा व्यवहार करेगा। नैनोविज्ञान लगभग इसी का पर्याय है, पर वह शुद्ध विज्ञान पर बल देता है, जबकि नैनो-प्रौद्योगिकी उसका व्यावहारिक रूप है, नैनो-चिकित्सा से लेकर नैनो-इलेक्ट्रॉनिकी तक।
- नैनोमीटर: नैनो उपसर्ग का अर्थ 10−9 है, अर्थात् एक नैनोमीटर मीटर का एक अरबवाँ भाग। छह फ़ुट लंबा व्यक्ति 6 × 0.3048 = 1.83 m है, जो 1.83 × 109 nm, या 183 × 107 nm, होता है।
- पैमाने के चिह्न: परमाणु 0.15 से 0.6 nm का होता है; एकल-भित्ति कार्बन नैनोट्यूब 0.5 से 2 nm, अर्थात् मानव बाल की चौड़ाई का लगभग एक लाखवाँ भाग; और दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्घ्य 400 से 700 nm है।
- फ़ाइनमैन का व्याख्यान: रिचर्ड फ़ाइनमैन ने 29 दिसंबर 1959 को कैलटेक में दिए व्याख्यान There’s Plenty of Room at the Bottom में पहली बार परमाणुओं को सीधे सँभालकर वस्तुएँ बनाने की बात की।
- शब्द की उत्पत्ति: नोरियो तानिगुची ने 1974 में पहली बार नैनो-टेक्नोलॉजी शब्द का प्रयोग किया, और के. एरिक ड्रेक्सलर ने 1986 की अपनी पुस्तक Engines of Creation से इसे लोकप्रिय बनाया।
- उपकरण और खोजें: 1981 के स्कैनिंग टनलिंग माइक्रोस्कोप से अलग-अलग परमाणु दिखने लगे; 1985 में फुलरीन खोजे गए; और खोखली कार्बन नैनोट्यूब का श्रेय 1991 में सुमियो इजिमा को दिया जाता है।
- ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर की विधियाँ: नीचे से ऊपर (बॉटम-अप) विधि में पदार्थ आणविक घटकों से रासायनिक रूप से स्वयं जुड़ते हैं; ऊपर से नीचे (टॉप-डाउन) विधि में बड़ी वस्तुओं से, परमाणु-स्तर के नियंत्रण के बिना, नैनो-वस्तुएँ बनाई जाती हैं।
नैनो-पदार्थ अलग व्यवहार क्यों करते हैं: पृष्ठीय क्षेत्रफल और क्वांटम प्रभाव
नैनोकण केवल किसी बड़े पदार्थ का छोटा टुकड़ा नहीं है। परमाणु केवल 0.15 से 0.6 nm के होते हैं, इसलिए नैनोकण के पदार्थ का बड़ा भाग उसके पृष्ठ से कुछ ही परमाणु दूर रहता है, और पृष्ठ की परत पूरे कण के गुण तय कर सकती है। इस पैमाने पर क्वांटम यांत्रिकी के प्रभाव भी काम करते हैं, इसलिए नैनो-पदार्थ उसी पदार्थ के बड़े रूप से बहुत अलग हो सकता है।
- पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन: घन को छोटे घनों में काटने पर आयतन वही रहता है, पर पृष्ठ बढ़ जाता है। घन के लिए पृष्ठ ÷ आयतन = 6 ÷ भुजा, इसलिए भुजा आधी करने पर यह अनुपात दोगुना हो जाता है।
- रंग: पानी में सोने के नैनोकण 100 nm से छोटे हों तो वाइन-लाल और बड़े हों तो नीले-बैंगनी दिखते हैं। कोलॉइडी सोने से रँगा चौथी शताब्दी का रोमन लाइकर्गस प्याला पीछे से प्रकाश पड़ने पर लाल और सामने से पड़ने पर हरा दिखता है। इसके विपरीत, ठोस सोना जानी-पहचानी पीली धातु है।
- अभिक्रियाशीलता: नैनोमीटर विमाओं पर सोने जैसे निष्क्रिय तत्व भी अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं।
- आकार से रंग: क्वांटम डॉट, अर्थात् कुछ नैनोमीटर के अर्धचालक क्रिस्टल, में उत्सर्जित प्रकाश का रंग आकार के साथ बदलता है: डॉट जितना बड़ा, उसका प्रकाश उतना लाल।
- अदृश्य और फ़िल्टर से पार: दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्घ्य से बहुत छोटे होने के कारण नैनोकण साधारण प्रकाशीय सूक्ष्मदर्शी से नहीं दिखते, उनके परिक्षेपण पारदर्शी हो सकते हैं, और वे साधारण फ़िल्टरों से आसानी से निकल जाते हैं।
नैनोकणों के प्रकार और नैनोकणों का संश्लेषण
पदार्थ का कोई भी कण, जिसका व्यास 1 से 100 नैनोमीटर हो, नैनोकण (परासूक्ष्मकण) कहलाता है। ये केवल मनुष्य की खोज नहीं हैं: ब्रह्मांडीय, भूवैज्ञानिक, मौसमी और जैविक प्रक्रियाएँ इन्हें प्राकृतिक रूप से बनाती हैं, और पृथ्वी पर आज भी गिरने वाली अंतरग्रहीय धूल का एक बड़ा भाग नैनोस्केल का है।
- प्राकृतिक नैनोकण: ज्वालामुखी विस्फोट और वायुमंडलीय रसायन; नैनोस्केल संरचना वाली मृदाएँ; और ज्वालामुखी क्रिया से बने ओपल, जो अपनी नैनोस्केल संरचना के कारण प्राकृतिक फ़ोटोनिक क्रिस्टल हैं।
- आनुषंगिक नैनोकण: दहन और उद्योग के उप-उत्पाद, जैसे डीज़ल की कालिख, वाहनों का धुआँ, प्रगलन, वेल्डिंग का धुआँ और चूल्हे की आग; गैस, जैव-भार या मोमबत्ती जलने पर फुलरीन भी बनते हैं।
- अभियांत्रिक नैनोकण: अपने गुणों के लिए जान-बूझकर बनाए जाते हैं। टाइटेनियम डाइऑक्साइड, ज़िंक ऑक्साइड और सिलिकॉन डाइऑक्साइड के नैनोकण सबसे अधिक बनने वाले तीन माने जाते हैं, और नैनोकण पेंट, प्लास्टिक, धातुओं, सिरेमिक और चुंबकीय उत्पादों में जाते हैं।
- कोलॉइड: कोलॉइडी कण 1 से 1000 nm के होते हैं, वास्तविक विलयन और निलंबन के बीच, इसलिए नैनोकणों के अनेक परिक्षेपण कोलॉइड हैं।
- नैनोकणों का संश्लेषण: प्रायः गीले रसायन से, जैसे सिल्वर नाइट्रेट जैसे चाँदी के लवण को विलयन में अपचयित करके कोलॉइडी चाँदी बनाना; मीथेन जैसी गैस के दहन या ताप-अपघटन से, जैसे कालिख बनती है; या जैविक रूप से, जैसे फ़्यूज़ेरियम ऑक्सीस्पोरम कवक चाँदी के आयनों को 5 से 15 nm के कणों में बदल देता है।
नैनो-पदार्थ: कार्बन, धातु और धातु ऑक्साइड
कार्बन नैनो-पदार्थ: कार्बन नैनोट्यूब, फुलरीन और ग्रैफ़ीन
जिन पदार्थों की कम से कम एक विमा 100 nm से कम हो, उन्हें नैनो-पदार्थ कहते हैं, और उनके गुण प्रायः उनके बड़े रूप से अलग और तकनीकी रूप से उपयोगी होते हैं। सबसे प्रसिद्ध परिवार कार्बन का है, जो उसी आबंधन से बना है जिससे कार्बन और उसके यौगिक (अंग्रेज़ी में) वाले लेख के अपररूप बनते हैं, और उसके केंद्र में कार्बन नैनोट्यूब है।
कार्बन का एक अपररूप, कार्बन नैनोट्यूब, नैनोमीटर व्यास वाली कार्बन की नली है। एकल-भित्ति नैनोट्यूब को ग्रैफ़ीन की परत को लपेटकर बने 0.5 से 2 nm व्यास के खोखले बेलन के रूप में समझा जा सकता है; बहु-भित्ति नैनोट्यूब में ऐसी कई नलियाँ एक के भीतर एक रहती हैं।
- गुण: असाधारण तनन सामर्थ्य और ऊष्मीय चालकता; कुछ नैनोट्यूब बिजली के अच्छे चालक हैं और कुछ अर्धचालक, और इन्हें रासायनिक रूप से बदला जा सकता है।
- खोज: ग्रेफ़ाइटी कार्बन की नैनोमीटर आकार की खोखली नलियों का श्रेय प्रायः NEC के सुमियो इजिमा को 1991 में दिया जाता है; एकल-भित्ति नलियाँ बनाने की विधि 1993 में आई।
- चिकित्सा में: बड़े पृष्ठ के कारण नैनोट्यूब औषधियाँ, जीन, टीके और प्रतिपिंड सीधे कोशिकाओं तक ले जा सकती हैं, और एकल-भित्ति नलियाँ अत्यंत संवेदनशील जैव-संवेदक का काम करती हैं।
- फुलरीन: C-60, साठ कार्बन परमाणुओं की फ़ुटबॉल जैसी संरचना, जिसे 1985 में हैरी क्रोटो, रिचर्ड स्मॉली और रॉबर्ट कर्ल ने खोजा और जिसके लिए उन्हें 1996 का रसायन नोबेल मिला।
- ग्रैफ़ीन: कार्बन परमाणुओं की एक परत, सबसे पतला द्वि-विमीय पदार्थ और अब तक मापा गया सबसे मज़बूत; इसे 2004 में अलग किया गया, और इसके खोजकर्ताओं को 2010 का भौतिकी नोबेल मिला।
चाँदी के नैनोकण, सोने के नैनोकण और धातु ऑक्साइड नैनोकण
अभियांत्रिक नैनोकणों के उत्पादन में धातु ऑक्साइड सबसे आगे हैं, और चाँदी तथा सोने जैसी धातुओं के अपने अलग उपयोग हैं। इनका मूल्य दो बातों से आता है: अपने द्रव्यमान के अनुपात में बहुत बड़ा पृष्ठ, और आकार पर निर्भर प्रकाशीय व्यवहार।
- चाँदी के नैनोकण: 1 से 100 nm के चाँदी के कण मुख्यतः औषधीय और जीवाणुरोधी कामों में आते हैं; भारत के नैनो मिशन ने नैनो-सिल्वर पर आधारित जीवाणुरोधी वस्त्र-लेप तैयार किया।
- सोने के नैनोकण: कोलॉइडी सोना प्राचीन काल से काँच रँगता आया है; अब सोने के नैनोकणों का अध्ययन ऐसे वाहकों के रूप में हो रहा है जो siRNA और DNA के सूत्र कोशिकाओं तक ले जाएँ।
- टाइटेनियम डाइऑक्साइड: 100 nm से छोटे कण पराबैंगनी विकिरण रोकते हैं, पर त्वचा पर पारदर्शी रहते हैं, इसलिए सनस्क्रीन में लगते हैं; अक्षत त्वचा पर इनके उपयोग का जोखिम अत्यंत कम माना जाता है।
- ज़िंक ऑक्साइड: इसका सबसे आम उपयोग भी सनस्क्रीन में है, क्योंकि यह पराबैंगनी प्रकाश सोखता है पर दृश्य प्रकाश के लिए पारदर्शी है; पैकेजिंग में सूक्ष्मजीवों को मारने और पराबैंगनी-रोधी वस्त्रों के लिए इसका परीक्षण हो रहा है।
- क्वांटम डॉट: अर्धचालक नैनो-क्रिस्टल, जिनका प्रकाश-उत्सर्जन क्वांटम प्रभाव तय करते हैं। इनकी खोज और संश्लेषण को 2023 का रसायन नोबेल मिला, और सौर सेल, LED, लेज़र, क्वांटम कंप्यूटिंग और चिकित्सा इमेजिंग इनके संभावित उपयोग हैं।
नैनो-प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग
चिकित्सा में नैनो-प्रौद्योगिकी: लक्षित औषधि वितरण और निदान
चिकित्सा में नैनो-प्रौद्योगिकी, अर्थात् नैनो-चिकित्सा, इसलिए काम करती है कि नैनो-पदार्थ अधिकांश जैविक अणुओं और संरचनाओं के आकार के होते हैं। नैनो-पदार्थों को जीव विज्ञान से जोड़ने से निदान-उपकरण, कंट्रास्ट एजेंट, विश्लेषण के औज़ार और औषधि-वितरण के वाहन पहले ही बन चुके हैं।
- लक्षित औषधि वितरण: औषधि को केवल रोगग्रस्त भाग में पहुँचाने से कुल खुराक और दुष्प्रभाव काफ़ी घट सकते हैं। जल-युक्त केंद्र के चारों ओर लिपिड द्विपरत वाले गोले, लाइपोसोम, 1974 में कीमोथेरेपी के लिए प्रस्तावित हुए; लाइपोसोमी औषधि डॉक्सिल आज कापोसी सार्कोमा, अंडाशय के कैंसर और मल्टीपल मायलोमा का उपचार करती है।
- जीन और mRNA का वितरण: लिपिड नैनोकणों ने कॉमिरनैटी और स्पाइकवैक्स जैसे कोविड-19 टीकों का mRNA पहुँचाया, और गैर-वायरल नैनो-वाहक अन्य न्यूक्लिक अम्ल औषधियाँ पहुँचाते हैं; जीन चिकित्सा को स्वयं नैनो-जैवप्रौद्योगिकी का एक रूप माना जा सकता है।
- निदान और इमेजिंग: नैनो-इलेक्ट्रॉनिक जैव-संवेदक और कार्बन नैनोट्यूब संवेदक जैव-अणुओं को अत्यधिक संवेदनशीलता से पहचानते हैं, और नैनोकण शरीर के भीतर इमेजिंग के लिए कंट्रास्ट एजेंट का काम करते हैं।
- बेहतर अवशोषण: नैनो-क्रिस्टल औषधियाँ तेज़ी से घुलती हैं और बेहतर अवशोषित होती हैं; 2000 में स्वीकृत नैनो-क्रिस्टल औषधि रैपाम्यून प्रत्यारोपण के बाद अंग की अस्वीकृति रोकती है।
- भारत के नियम: 24 अक्टूबर 2019 को जारी नैनो-फ़ार्मास्यूटिकल्स के मूल्यांकन के दिशानिर्देश उन उत्पादों पर लागू होते हैं जिनकी कम से कम एक विमा 1 से 100 nm हो, या 1000 nm तक, यदि नैनो-प्रौद्योगिकी उनका व्यवहार बदलती हो, और ऐसे उत्पादों को स्पष्ट नियामक मार्ग देते हैं।
- सीमाएँ: लंबे समय टिकने वाले नैनोकण यकृत और प्लीहा में फँस सकते हैं; चूहों में ऐसे अजैव-निम्नीकरणीय पदार्थ के जमाव से अंगों की क्षति और सूजन हुई है।
| औषधि | नैनो रूप | उपयोग |
|---|---|---|
| डॉक्सिल | लाइपोसोम में औषधि | कापोसी सार्कोमा, अंडाशय का कैंसर, मल्टीपल मायलोमा |
| ओनिविड | लाइपोसोम में इरिनोटेकन, 2015 में स्वीकृत | फैल चुका अग्न्याशय का कैंसर |
| रैपाम्यून | नैनो-क्रिस्टल, 2000 में स्वीकृत | प्रत्यारोपण के बाद अंग की अस्वीकृति रोकना |
| कॉमिरनैटी, स्पाइकवैक्स | लिपिड नैनोकणों में mRNA | कोविड-19 टीके |
| कैबेनुवा | इंजेक्शन वाले नैनो-निलंबन | HIV-1 का मासिक पूर्ण उपचार |
कृषि में नैनो-प्रौद्योगिकी: नैनो यूरिया और नैनो उर्वरक
कृषि में नैनो-प्रौद्योगिकी का लक्ष्य उपज बढ़ाना और खेती से मिट्टी तथा पानी को होने वाली क्षति घटाना है। पारंपरिक उर्वरकों का बड़ा भाग व्यर्थ जाता है: सरकार के अनुमान से यूरिया की केवल लगभग 35 प्रतिशत नाइट्रोजन फ़सल लेती है और शेष मिट्टी को प्रभावित करती है, जबकि खेतों से बहता पानी जल की गुणवत्ता बिगाड़ता है।
- नैनो उर्वरक: छोटे आकार के कारण ये पौधों की कोशिका-भित्ति से पार हो जाते हैं, इसलिए पोषक तत्व अधिक कुशलता से पहुँचाते हैं और पानी में कम रिसते हैं; अध्ययनों के अनुसार ये 40 से 50 दिनों तक धीरे-धीरे पोषक छोड़ते हैं, जबकि पारंपरिक उर्वरक 4 से 10 दिन।
- नैनो यूरिया: पत्तियों पर छिड़का जाने वाला तरल यूरिया, जिसे फ़रवरी 2021 में स्वीकृति मिली और अगस्त 2021 से बिक्री शुरू हुई। सरकार के अनुसार 500 ml की एक बोतल का फ़सल पर वही प्रभाव है जो दानेदार यूरिया के 45 kg के एक बोरे का; सात संयंत्र प्रति वर्ष 27.22 करोड़ बोतलें बना सकते हैं, और जुलाई 2025 तक 10.68 करोड़ बोतलें बिक चुकी थीं।
- नैनो DAP: अप्रैल 2023 में आया तरल डाइअमोनियम फ़ॉस्फ़ेट, जिसमें 8 प्रतिशत नाइट्रोजन और 16 प्रतिशत फ़ॉस्फ़ोरस है; तीन संयंत्र प्रति वर्ष 7.64 करोड़ बोतलें बना सकते हैं।
- नैनो-कीटनाशक: नैनो-आवरण कीटनाशक को धीरे-धीरे छोड़ता है, जिससे उसका प्रभाव लंबा चलता है और कम मात्रा लगती है।
- नैनो-संवेदक: सटीक कृषि के उपकरण, जो मिट्टी का स्वास्थ्य जाँचते हैं, रोगजनकों को पहचानते हैं और मिट्टी की नमी पर नज़र रखकर सिंचाई बचाते हैं।
- प्रदूषण की सफ़ाई: नैनो-मृदाएँ कीटनाशक अवशेषों को पकड़ लेती हैं ताकि वे पानी में न रिसें, और मृदा-बहुलक नैनो-कंपोजिट खेतों से बहते पानी को नियंत्रित करने में लगते हैं।
किसानों के लिए इसका वादा है कम लागत और कम बर्बादी: सरकार को आशा है कि नैनो DAP की कीमत DAP की आधी होगी, और किसान ड्रोन तथा बैटरी स्प्रेयर से छिड़काव गाँव-स्तर के उद्यमियों के माध्यम से किराये पर मिलता है। सावधानी भी उतनी ही वास्तविक है: नैनोकण कैसे चलते हैं और भोजन में कैसे जमा होते हैं, यह पूरी तरह ज्ञात नहीं, और सस्ते न हों तो नैनो उत्पादों का लाभ छोटे किसानों से अधिक बड़े खेतों को मिल सकता है।
इलेक्ट्रॉनिकी, ऊर्जा, जल और पर्यावरण में नैनो-प्रौद्योगिकी
चिकित्सा और खेती से आगे नैनो-प्रौद्योगिकी इलेक्ट्रॉनिकी, ऊर्जा और जल तक पहुँचती है। आधुनिक ट्रांज़िस्टर पहले से नैनो-युक्तियाँ हैं: 22 nm, 14 nm, 10 nm और 7 nm की सिलिकॉन चिप पीढ़ियाँ सभी 1 से 100 nm वाली नैनो-इलेक्ट्रॉनिकी की सीमा में हैं।
- लिथियम-आयन बैटरियाँ: ग्रेफ़ाइट ऐनोड में सिलिकॉन मिलाने से लिथियम-आयन सेल की क्षमता बढ़ती है; ISRO के सिलिकॉन-ग्रेफ़ाइट ऐनोड वाले सेल 190 Wh/kg तक पहुँचते हैं, जैसा लिथियम-आयन बैटरियों (अंग्रेज़ी में) वाले लेख में समझाया गया है।
- जल शोधन: लगभग 1 से 10 nm के छिद्रों वाली नैनो-निस्यंदन झिल्लियाँ पानी को मृदु और रोगाणुमुक्त करती हैं और अशुद्धियाँ हटाती हैं; नैनो मिशन ने आर्सेनिक और फ्लोराइड हटाने वाले फ़िल्टर तथा पेयजल से कीटनाशक हटाने की तकनीक बनाई।
- स्वतः साफ़ होने वाली सतहें: कमल के पत्ते की सूक्ष्म और नैनोस्केल संरचना, जिससे पानी मैल समेटकर लुढ़क जाता है, की नकल से स्वतः साफ़ होने वाले लेप, पेंट, छत की टाइलें और कपड़े बने हैं।
- अधिक मज़बूत पदार्थ: कंपोजिट में कार्बन नैनोट्यूब कार्बन तंतुओं की जगह लेती हैं या उनका साथ देती हैं, और थोड़ी-सी नैनोट्यूब या ग्रैफ़ीन हड्डी तथा ऊतक अभियांत्रिकी के जैव-निम्नीकरणीय बहुलकों को मज़बूत बनाती हैं।
- अगली पीढ़ी की चिप: आज के सिलिकॉन से आगे की नैनो-इलेक्ट्रॉनिकी के दावेदार हैं कार्बन नैनोट्यूब, सिलिकॉन नैनो-तार और आणविक इलेक्ट्रॉनिकी।
- औद्योगिक उपयोग: नैनोकण रासायनिक उत्प्रेरक का काम करते हैं, और नैनो-पदार्थ पेंट, फ़िल्टर, ऊष्मारोधन और ऐसे स्नेहक योजकों में जाते हैं जो चलते पुर्ज़ों का घर्षण घटाते हैं।
भारत का नैनो मिशन और नैनो-प्रौद्योगिकी के जोखिम
नैनो मिशन: नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर भारत का मिशन
भारत का सरकारी प्रयास अक्टूबर 2001 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी पहल से शुरू हुआ। यही आगे नैनो मिशन बना, जो मई 2007 में पाँच वर्षों के लिए ₹1,000 करोड़ के नियोजित सार्वजनिक निवेश के साथ क्षमता-निर्माण के एक व्यापक कार्यक्रम के रूप में शुरू हुआ।
- मिशन के लक्ष्य: शिक्षा और मानव संसाधन कार्यक्रम, अनुसंधान, उत्कृष्टता केंद्र, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और व्यावसायिक इनक्यूबेटरों के माध्यम से संस्थान-उद्योग परियोजनाएँ, और नैनो-प्रौद्योगिकी के विकास तथा व्यवसायीकरण पर विशेष ज़ोर।
- दूसरा चरण: 20 फ़रवरी 2014 को 12वीं योजना के लिए ₹650 करोड़ के साथ स्वीकृत, अनुप्रयोग-आधारित अनुसंधान पर अधिक बल के साथ; यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में स्थित रहा और एक प्रख्यात वैज्ञानिक की अध्यक्षता वाली नैनो मिशन परिषद ने इसे दिशा दी।
- मिशन की उपलब्धियाँ: नैनोविज्ञान के प्रकाशनों में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर पहुँचा; मिशन से लगभग 5,000 शोध-पत्र और 900 PhD निकले, नैनो हाइड्रोजेल आई ड्रॉप तथा आर्सेनिक और फ्लोराइड फ़िल्टर जैसे उत्पाद बने, और राष्ट्रीय नियामक ढाँचे का एक रोडमैप तैयार हुआ।
- वैश्विक सुविधाएँ: भारतीय वैज्ञानिकों को जापान के त्सुकुबा की फ़ोटॉन फ़ैक्टरी और जर्मनी के हैम्बर्ग के PETRA III तक पहुँच मिली।
- संस्थान: मोहाली का नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, विभाग का एक स्वायत्त संस्थान, कृषि नैनो-प्रौद्योगिकी, नैनो-चिकित्सा, ऊर्जा, क्वांटम पदार्थों और नैनो-इलेक्ट्रॉनिकी पर काम करता है।
- कार्यक्रम आज: मिशन 31 मार्च 2017 को पूरा हुआ और नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी के राष्ट्रीय कार्यक्रम में बदल गया, जिसने 2024 में उन्नत पदार्थों पर प्रस्ताव आमंत्रित किए; प्रयोगशालाओं और उद्योग में नैनो-पदार्थों के सुरक्षित रख-रखाव के प्रारूप दिशानिर्देश भी जारी हुए हैं।
| क्षेत्र | भारत में उदाहरण |
|---|---|
| स्वास्थ्य | नैनो हाइड्रोजेल आई ड्रॉप; 2019 से नैनो-फ़ार्मास्यूटिकल्स के नियम |
| कृषि | नैनो यूरिया और नैनो DAP, यूरिया की 27.22 करोड़ बोतलों की वार्षिक क्षमता के साथ |
| जल | आर्सेनिक और फ्लोराइड के फ़िल्टर; पेयजल से कीटनाशक हटाना |
| ऊर्जा और अंतरिक्ष | 190 Wh/kg वाले सिलिकॉन-ग्रेफ़ाइट ऐनोड लिथियम-आयन सेल |
| वस्त्र | नैनो-सिल्वर जीवाणुरोधी लेप |
नैनोकणों के जोखिम: विषाक्तता, पर्यावरण और विनियमन
जिस छोटे आकार से नैनोकण उपयोगी बनते हैं, उसी से वे जोखिम भरे भी बनते हैं। उनकी विषाक्तता का अध्ययन, नैनो-विषविज्ञान, बताता है कि शरीर बड़े कणों से लड़ने के लिए बना है, जबकि नैनोकण कहीं अधिक मुक्त रूप से घूमते हैं; पशु-अध्ययनों में ज़िंक ऑक्साइड के नैनोकण अपरा और रक्त-मस्तिष्क अवरोध पार कर चुके हैं।
- मुक्त मूलक: अधिक अभिक्रियाशीलता से मुक्त मूलकों सहित अभिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियाँ अधिक बन सकती हैं, जो नैनोकणों से होने वाली हानि का एक मुख्य मार्ग है: ऑक्सीकारक तनाव, सूजन और प्रोटीन, झिल्लियों तथा DNA की क्षति।
- फेफड़ों को हानि: साँस से भीतर जाना सबसे बड़ी चिंता है। पशु-अध्ययनों में कार्बन नैनोट्यूब और नैनो-तंतुओं ने सिलिका या ऐस्बेस्टस जितनी तीव्र सूजन, ग्रैनुलोमा और फेफड़ों का फ़ाइब्रोसिस किया, और कुछ नैनो-पदार्थों ने कैंसर पैदा किया।
- पर्यावरण और खाद्य शृंखला: सनस्क्रीन के साथ धुलकर ज़िंक ऑक्साइड बहते पानी में पहुँच सकता है और खाद्य शृंखला में ऊपर चढ़ सकता है; धातु नैनोकण ऐसे आयन छोड़ सकते हैं जो मिट्टी और उसके सूक्ष्मजीवों को प्रभावित करें, और कार्बन नैनो-पदार्थ कहीं अधिक समय तक अपघटित नहीं होते।
- अंगों में जमाव: अपघटित न होने वाले या धीरे-धीरे अपघटित होने वाले कण अंगों में जमा हो सकते हैं।
- नैनो-पदार्थों का विनियमन: नैनो-प्रौद्योगिकी को विशेष विनियमन चाहिए या नहीं, इस पर मतभेद है। यूरोप में सनस्क्रीन के लेबल पर नैनोकण बताना अनिवार्य है, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा में जैविक प्रमाणन अभियांत्रिक नैनोकणों को बाहर रखता है, और भारत के 2019 के नैनो-फ़ार्मास्यूटिकल दिशानिर्देशों से कृषि-आदानों, प्रसाधन-सामग्री और प्रत्यारोपणों के सुरक्षा नियम निकलने थे।
- अब तक के प्रमाण: 2011 तक किसी अभियांत्रिक नैनोकण से मनुष्य में कोई रोग होना ज्ञात नहीं था।
हर नैनो-पदार्थ का जोखिम एक-सा नहीं है। कंपोजिट, युक्ति या लेपित सतह के भीतर जड़े कण अपनी जगह रहते हैं, जबकि उत्पादन या उपयोग के किसी चरण में खुले मुक्त नैनोकण घूम सकते हैं; व्यापक सहमति है कि तात्कालिक चिंता इन्हीं मुक्त कणों की है।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के विगत वर्षों के प्रश्न
विगत वर्षों के प्रश्न: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा इस लेख को पढ़ने के बाद आप यूपीएससी के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिख सकेंगे। हर प्रश्न के साथ एक खुलने वाली रूपरेखा है, जो बताती है कि परीक्षा में उसे कैसे हल करें।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2008 (हिंदी रूपांतर)छह फ़ुट लंबे व्यक्ति की ऊँचाई को (लगभग) नैनोमीटर में कैसे व्यक्त किया जा सकता है?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: पहले फ़ुट को मीटर में बदलें: एक फ़ुट 0.3048 m है, इसलिए 6 × 0.3048 = 1.8288 m, लगभग 1.83 m। फिर मीटर को नैनोमीटर में बदलें: एक मीटर 109 nm है, इसलिए 1.83 m = 1.83 × 109 nm। अंत में विकल्पों के रूप से मिलाएँ: 1.83 × 109 = 183 × 107, क्योंकि दशमलव दो स्थान दाईं ओर खिसकाने पर दस की दो घातें कम हो जाती हैं।
इस भ्रम से बचें: छह फ़ुट 1.83 m है, 2.34 m नहीं।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) 183 × 10⁶ nm: गलत। यह 0.183 m, लगभग 18 cm है, वास्तविक ऊँचाई का दसवाँ भाग; दस की एक घात कम है।
- (b) 234 × 10⁶ nm: गलत। यह 0.234 m, लगभग 23 cm है; अंक और घात, दोनों गलत हैं।
- (c) 183 × 10⁷ nm: सही। यह 1.83 × 10⁹ nm है, अर्थात् 1.83 m, जो छह फ़ुट के बराबर है।
- (d) 234 × 10⁷ nm: गलत। यह 2.34 m, लगभग 7 फ़ुट 8 इंच है, छह फ़ुट से कहीं अधिक।
उत्तर: छह फ़ुट 1.83 m है, जो 183 × 10⁷ nm है: विकल्प (c)।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2022निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- परासूक्ष्मकण (नैनोपार्टिकल्स), मानव-निर्मित होने के सिवाय, प्रकृति में अस्तित्व में नहीं हैं ।
- कुछ धात्विक ऑक्साइडों के परासूक्ष्मकण, प्रसाधन-सामग्री (कॉस्मेटिक्स) के निर्माण में काम आते हैं ।
- कुछ वाणिज्यिक उत्पादों के परासूक्ष्मकण, जो पर्यावरण में आ जाते हैं, मनुष्यों के लिए असुरक्षित हैं ।
उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं ?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: हर कथन को अलग परखें। कथन 1 कहता है कि नैनोकण केवल मानव-निर्मित हैं; लेख प्राकृतिक स्रोत दिखाता है, इसलिए यह गलत है। कथन 2 प्रसाधन में धातु ऑक्साइड के बारे में है; सनस्क्रीन के टाइटेनियम डाइऑक्साइड और ज़िंक ऑक्साइड इसे सही ठहराते हैं। कथन 3 सुरक्षा के बारे में है; नैनो-विषविज्ञान पर्यावरण में पहुँचे कुछ उत्पादों से हानि दर्ज करता है, इसलिए यह भी सही है। केवल 2 और 3 बचते हैं।
इस भ्रम से बचें: नैनोकण प्राकृतिक रूप से भी बनते हैं, इसलिए कथन 1 गलत है।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) केवल 1: गलत। कथन 1 गलत है: ज्वालामुखी विस्फोट, वायुमंडलीय रसायन और अंतरग्रहीय धूल प्राकृतिक नैनोकण देते हैं।
- (b) केवल 3: गलत। इसमें कथन 2 छूट जाता है, जो सही है: सनस्क्रीन में टाइटेनियम डाइऑक्साइड और ज़िंक ऑक्साइड के नैनोकण लगते हैं।
- (c) 1 और 2: गलत। इसमें गलत कथन 1 शामिल है।
- (d) 2 और 3: सही। धातु ऑक्साइड नैनोकण प्रसाधन में जाते हैं, और सनस्क्रीन के साथ धुला ज़िंक ऑक्साइड जैसे कुछ नैनोकण खाद्य शृंखला में पहुँचकर हानि कर सकते हैं।
उत्तर: कथन 1 गलत, कथन 2 और 3 सही: विकल्प (d)।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2015 (हिंदी रूपांतर)स्वास्थ्य क्षेत्र में नैनो-प्रौद्योगिकी के उपयोग के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- नैनो-प्रौद्योगिकी से लक्षित औषधि वितरण संभव हुआ है।
- नैनो-प्रौद्योगिकी जीन चिकित्सा में बड़ा योगदान दे सकती है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: हर चिकित्सीय उपयोग को चिकित्सा वाले खंड से मिलाएँ। कथन 1: लक्षित औषधि वितरण लाइपोसोम (डॉक्सिल) जैसे वाहकों से औषधि को केवल ज़रूरत की जगह पहुँचाता है। कथन 2: लिपिड नैनोकण और अन्य गैर-वायरल नैनो-वाहक न्यूक्लिक अम्ल पहुँचाते हैं, और जीन चिकित्सा स्वयं नैनो-जैवप्रौद्योगिकी गिनी जाती है। दोनों सही हैं।
इस भ्रम से बचें: नैनो-वाहकों से जीन वितरण वास्तविक है।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) केवल 1: गलत। इसमें कथन 2 छूट जाता है, जबकि नैनो-वाहक जीन और mRNA पहुँचाते हैं।
- (b) केवल 2: गलत। इसमें कथन 1 छूट जाता है, जबकि डॉक्सिल जैसी लाइपोसोमी औषधियाँ उपयोग में आ चुका लक्षित वितरण हैं।
- (c) 1 और 2 दोनों: सही। नैनो-प्रौद्योगिकी लक्षित औषधि वितरण और जीन वितरण, दोनों संभव बनाती है।
- (d) न तो 1 और न ही 2: गलत। दोनों उपयोग स्थापित हैं।
उत्तर: दोनों कथन सही: विकल्प (c)।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2014 (हिंदी रूपांतर)उद्योग द्वारा विभिन्न उत्पादों के निर्माण में प्रयुक्त कुछ रासायनिक तत्वों के नैनोकणों को लेकर कुछ चिंता है। क्यों?
- वे पर्यावरण में जमा होकर जल और मिट्टी को दूषित कर सकते हैं।
- वे खाद्य शृंखलाओं में प्रवेश कर सकते हैं।
- वे मुक्त मूलकों का बनना शुरू कर सकते हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: हर चिंता को जोखिम वाले खंड से परखें। कथन 1: धातु नैनोकण मिट्टी और पानी में आयन छोड़ सकते हैं। कथन 2: सनस्क्रीन के साथ धुला ज़िंक ऑक्साइड खाद्य शृंखला में ऊपर चढ़ सकता है। कथन 3: अधिक अभिक्रियाशीलता मुक्त मूलकों सहित अभिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियाँ बढ़ाती है। तीनों दर्ज चिंताएँ हैं।
इस भ्रम से बचें: तीनों चिंताएँ प्रमाणित हैं।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) केवल 1 और 2: गलत। इसमें मुक्त मूलक छूट जाते हैं, जो नैनोकणों से हानि का एक मुख्य मार्ग है।
- (b) केवल 3: गलत। इसमें मिट्टी और पानी में जमाव तथा खाद्य शृंखला में प्रवेश छूट जाते हैं।
- (c) केवल 1 और 3: गलत। इसमें खाद्य शृंखला छूट जाती है, जिसमें सनस्क्रीन का ज़िंक ऑक्साइड पहुँच सकता है।
- (d) 1, 2 और 3: सही। तीनों चिंताएँ प्रमाणित हैं।
उत्तर: तीनों कथन मान्य चिंताएँ: विकल्प (d)।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2016, सामान्य अध्ययन-III (हिंदी रूपांतर)अतिसूक्ष्म प्रौद्योगिकी (नैनोटेक्नोलॉजी) 21वीं सदी की प्रमुख प्रौद्योगिकियों में से एक क्यों है? नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर भारत सरकार के मिशन की प्रमुख विशेषताओं और देश की विकास प्रक्रिया में इसके अनुप्रयोग के दायरे का वर्णन कीजिए।
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: नैनो-प्रौद्योगिकी 1 से 100 नैनोमीटर पर पदार्थ के साथ काम करती है, जहाँ आकार ही गुण बदल देता है; इसलिए यह एक साथ अनेक क्षेत्रों की सक्षमकारी प्रौद्योगिकी है।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- प्रमुख क्यों: नैनोस्केल पर नए गुण; चिकित्सा, कृषि, ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिकी और जल के लिए ज्ञान-प्रधान सक्षमकारी प्रौद्योगिकी।
- नैनो मिशन: मई 2007, पाँच वर्षों में ₹1,000 करोड़; शिक्षा, अनुसंधान, उत्कृष्टता केंद्र, उद्योग से जुड़ाव; 2014 में दूसरा चरण, ₹650 करोड़; नैनो मिशन परिषद; 2017 में पूरा होकर राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में जारी।
- उपलब्धियाँ: विश्व प्रकाशनों में तीसरा स्थान; 5,000 शोध-पत्र, 900 PhD; आई ड्रॉप, आर्सेनिक और फ्लोराइड फ़िल्टर, नैनो-सिल्वर वस्त्र; मोहाली का INST।
- दायरा: लक्षित औषधि वितरण और नैनो-फ़ार्मास्यूटिकल नियम; नैनो यूरिया और नैनो DAP; जल-फ़िल्टर; बैटरी और चिप।
निष्कर्ष: निष्कर्ष यह रखें कि मिशन ने क्षमता खड़ी की, और अगला कदम स्पष्ट सुरक्षा नियमों के साथ बड़े पैमाने पर उत्पाद हैं।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2020, सामान्य अध्ययन-III (हिंदी रूपांतर)नैनोटेक्नोलॉजी से आप क्या समझते हैं और यह स्वास्थ्य क्षेत्र में किस प्रकार सहायता कर रही है?
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: नैनो-प्रौद्योगिकी 1 से 100 नैनोमीटर पर पदार्थ को गढ़ना है, जो अधिकांश जैविक अणुओं का आकार है; इसीलिए यह शरीर के भीतर काम कर पाती है।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- लक्षित औषधि वितरण: लाइपोसोम, डॉक्सिल; कम खुराक और कम दुष्प्रभाव।
- जीन और mRNA वितरण: कोविड-19 टीकों में लिपिड नैनोकण।
- निदान: जैव-संवेदक, कंट्रास्ट एजेंट, इमेजिंग; बेहतर अवशोषित होने वाली नैनो-क्रिस्टल औषधियाँ।
- भारत: 2019 के नैनो-फ़ार्मास्यूटिकल दिशानिर्देश; नैनो मिशन की नैनो हाइड्रोजेल आई ड्रॉप; सीमाएँ: यकृत और प्लीहा में जमाव।
निष्कर्ष: निष्कर्ष यह रखें कि नैनो-चिकित्सा उपचार को अधिक सटीक बनाती है, बशर्ते सुरक्षा का परीक्षण स्पष्ट नियमों में हो।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2025, सामान्य अध्ययन-IIIनैनो-प्रौद्योगिकी कृषि के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण उन्नति कैसे प्रदान करती है? यह प्रौद्योगिकी कैसे किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति के उत्थान में सहायक हो सकती है?
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: पारंपरिक उर्वरकों का बड़ा भाग व्यर्थ जाता है; नैनो-प्रौद्योगिकी आदानों को छोटी और लक्षित मात्रा में पहुँचाती है।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- उन्नति: धीरे पोषक छोड़ने और कम रिसने वाले नैनो उर्वरक; नैनो यूरिया (सरकार के अनुसार 45 kg बोरे के बदले 500 ml बोतल) और नैनो DAP; नैनो-कीटनाशक; नैनो-संवेदक; बहते पानी के विरुद्ध नैनो-मृदाएँ।
- किसान: कम आदान लागत (नैनो DAP की कीमत DAP की आधी होने की आशा); मिट्टी को कम क्षति; गाँव-स्तर की सेवा के रूप में ड्रोन से छिड़काव।
- देश: यूरिया के कम बोरों की खपत और आयात; 27.22 करोड़ बोतलों की वार्षिक क्षमता।
- सावधानियाँ: भोजन में जमाव पूरी तरह ज्ञात नहीं; लाभ बड़े खेतों के पक्ष में जा सकता है।
निष्कर्ष: निष्कर्ष यह रखें कि खेतों से मिले प्रमाण, कृषि-विस्तार और सुरक्षा परीक्षण साथ चलें, तो नैनो-प्रौद्योगिकी किसानों की आय बढ़ा सकती है।
स्रोत
- NCERT: Chemistry Part I (Class XI), Some Basic Concepts of Chemistry
- NCERT: Chemistry Part I (Class XII), Surface Chemistry
- Department of Science and Technology: National Programme on Nano Science and Technology (earlier Nano Mission)
- PIB: Proposal for Nanoscience and Nanotechnology Mission (18 December 2006)
- PIB: Continuation of the Mission on Nano Science and Technology in the 12th Plan (20 February 2014)
- PIB: Guidelines released for evaluation of nanopharmaceuticals in India (24 October 2019)
- CDSCO: Guidelines for Evaluation of Nanopharmaceuticals in India
- PIB: Nano urea and nano DAP plants and sales (29 July 2025)
- PIB: Launch of IFFCO Nano DAP (Liquid) (26 April 2023)
- PIB: IFFCO Nano Urea Liquid plants at Aonla and Phulpur (14 February 2023)
- Wikipedia: Nanotechnology
- Wikipedia: Nanoparticle
- Wikipedia: Carbon nanotube
- Wikipedia: Nanomedicine
- Wikipedia: Nanotoxicology
- Wikipedia: Quantum dot
- Wikipedia: Nanotechnology in agriculture
- UPSC: Civil Services Examination question papers
संपादकीय अस्वीकरण
यह लेख NCERT की पाठ्यपुस्तकों और इस पृष्ठ पर दिए गए अन्य स्रोतों पर आधारित है।
