परिचय
बिश्केक घोषणा और भारत का एजेंडा
SCO शिखर सम्मेलन 2026, शंघाई सहयोग संगठन के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की 26वीं बैठक, 31 अगस्त और 1 सितंबर 2026 को किर्गिज़स्तान के बिश्केक में हुआ और संगठन के 25 वर्ष पूरे होने का अवसर बना। SCO 15 जून 2001 को स्थापित दस सदस्यों वाला यूरेशियाई समूह है; बिश्केक में भारत ने सुरक्षा, संयोजकता और अवसर का एजेंडा रखा, और अध्यक्षता पाकिस्तान को मिली।
बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन 2026: यह चर्चा में क्यों है
26वाँ SCO शिखर सम्मेलन: तिथियाँ, विषय, मेज़बान और नेता
सम्मेलन की अध्यक्षता किर्गिज़ राष्ट्रपति सदीर जापारोव ने की, और इसका विषय था "SCO के 25 वर्ष: सतत शांति, विकास और समृद्धि के लिए एक साथ"। दसों सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व शीर्ष स्तर पर हुआ: चीन से शी जिनपिंग, रूस से व्लादिमीर पुतिन, ईरान से मसूद पेज़ेशकियान, पाकिस्तान से शहबाज़ शरीफ़, बेलारूस से अलेक्ज़ेंडर लुकाशेंको, और कज़ाख़स्तान, ताजिकिस्तान तथा उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति, श्री मोदी और श्री जापारोव के साथ। अज़रबैजान, आर्मेनिया, मंगोलिया और तुर्किये जैसे साझेदार देशों के नेता विस्तारित "SCO प्लस" सत्र में आए, और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी उपस्थित रहे।
श्री मोदी उज़्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा के बाद बिश्केक पहुँचे; यह उनकी वहाँ की चौथी यात्रा थी। 31 अगस्त को, जो किर्गिज़स्तान का स्वतंत्रता दिवस है, वे छठे विश्व घुमंतू खेलों (World Nomad Games) के उद्घाटन में भी गए। 28 फ़रवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर युद्ध शुरू करने के बाद यह संगठन का पहला शिखर सम्मेलन था। इस युद्ध, अमेरिकी शुल्कों और रूस पर प्रतिबंधों के कारण इसका वातावरण 2025 के तियानजिन सम्मेलन से अधिक गंभीर रहा।
बिश्केक घोषणा 2026: ईरान, अफ़ग़ानिस्तान, आतंकवाद और मिसाइल रक्षा
शिखर सम्मेलन ने 27 अन्य दस्तावेज़ों के साथ बिश्केक घोषणा (Bishkek Declaration) स्वीकार की। इन दस्तावेज़ों में चार समझौता ज्ञापन, तथा जलवायु, परमाणु सुरक्षा, ऊर्जा संरक्षण और नशे की लत जैसे क्षेत्रों पर बीस से अधिक निर्णय और वक्तव्य थे। घोषणा के मुख्य पक्ष ये रहे।
- ईरान: ईरान पर सैन्य हमलों पर गहरी चिंता और उनकी निंदा; उसकी संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता का समर्थन; अंतर्राष्ट्रीय विधि और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन के लिए अमेरिका और इज़राइल की आलोचना; और शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा विकसित करने के सदस्यों के अधिकार का समर्थन।
- पश्चिम एशिया का संकट: क्षेत्र में स्थायी स्थिरता का एकमात्र मार्ग फ़िलिस्तीन प्रश्न का न्यायपूर्ण समाधान, और फ़ारस की खाड़ी क्षेत्र के युद्ध पर गहरी चिंता।
- तालिबान प्रशासन से अपेक्षा: अफ़ग़ानिस्तान में सभी नृजातीय-राजनीतिक समूहों को लेकर समावेशी सरकार बनाने का आह्वान।
- आतंकवाद: सीमा-पार आतंकवाद सहित उसके सभी रूपों की कड़ी निंदा, और आतंकवाद, अलगाववाद तथा उग्रवाद, इन तीन बुराइयों की भी।
- सामरिक सुरक्षा: राज्यों के समूहों द्वारा वैश्विक मिसाइल रक्षा प्रणालियों का एकतरफ़ा और असीमित विस्तार अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा को हानि पहुँचाता है, और सदस्यों के क्षेत्र में बिना अनुमति की उपग्रह इंटरनेट सेवाएँ अंतर्राष्ट्रीय विधि का उल्लंघन हैं।
यूक्रेन युद्ध में रूस की भूमिका पर घोषणा चुप रही। सदस्यों ने चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) को यूरेशियाई आर्थिक संघ से जोड़ने का भी समर्थन किया; भारत इस अंश से अलग रहा, क्योंकि वह BRI का समर्थन नहीं करता।
बिश्केक में मोदी की द्विपक्षीय बैठकें: ईरान, रूस और ब्रिक्स की तैयारी
युद्ध शुरू होने के बाद ईरान के राष्ट्रपति से श्री मोदी की पहली भेंट इसी सम्मेलन में हुई। 31 अगस्त को बिश्केक में उन्होंने श्री पेज़ेशकियान से पश्चिम एशिया में शांति और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में सहायता का आग्रह किया, और कहा कि नागरिकों, व्यापारिक जहाज़ों और नाविकों को हानि नहीं पहुँचनी चाहिए। श्री पेज़ेशकियान ने संघर्ष के लिए इज़राइल और अमेरिका को दोषी ठहराया और भारत से अपने संपर्कों से संवाद में सहायता करने को कहा।
श्री पुतिन से श्री मोदी ने कहा कि विश्व को "अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत की ओर" बढ़ना होगा। दोनों ने पश्चिम एशिया और काला सागर के संघर्षों पर बात की, जहाँ भारतीय नाविकों पर हमले हुए हैं, और श्री पुतिन ने बताया कि आज 40,000 भारतीय रूस में पढ़ते हैं। दोनों बैठकें 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में भारत की मेज़बानी वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी भी थीं, जहाँ ईरान और UAE के गतिरोध से संयुक्त घोषणा पर संकट था।
शंघाई सहयोग संगठन क्या है: उत्पत्ति, चार्टर और सदस्यता
शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना: शंघाई फाइव से 2001 तक
सीमा पर विश्वास बढ़ाने वाले एक समूह से शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation, SCO) निकला। अप्रैल 1996 में चीन, कज़ाख़स्तान, किर्गिज़स्तान, रूस और ताजिकिस्तान ने शंघाई फाइव बनाया, जिसने सोवियत संघ के विघटन से बची सीमाओं के प्रश्न सुलझाए। 2001 में उज़्बेकिस्तान के जुड़ने से यह शंघाई सिक्स बना, और इन छह देशों ने 15 जून 2001 को SCO की स्थापना की।
एक-दूसरे पर संदेह करने वाले देशों के बीच सीमाएँ सँभालने के लिए बना संगठन आम सहमति से ही चल सकता है। यही उत्पत्ति समझाती है कि यह 25 वर्ष क्यों टिका रहा, और यह भी कि कोई एक सदस्य इसके माध्यम से अपनी बात कितनी कम मनवा सकता है। SCO में सामूहिक रक्षा की कोई प्रतिबद्धता नहीं है, और इसके सदस्यों में भारत और पाकिस्तान जैसे प्रतिद्वंद्वी हैं, तथा सीमा के प्रश्न पर भारत और चीन भी।
SCO चार्टर: शंघाई भावना, तीन बुराइयाँ और आधिकारिक भाषाएँ
SCO चार्टर संगठन की भावना, लक्ष्य और नियम तय करता है। इसकी प्रस्तावना परस्पर विश्वास, परस्पर लाभ, समानता, परस्पर परामर्श, सांस्कृतिक विविधता के सम्मान और साझा विकास की आकांक्षा की बात करती है; इसी सूत्र को शंघाई भावना (Shanghai Spirit) कहते हैं।
- लक्ष्य: परस्पर विश्वास और अच्छा पड़ोस, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता, एक लोकतांत्रिक, न्यायपूर्ण और तर्कसंगत अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था, तथा राजनीति, व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, परिवहन, पर्यावरण, संस्कृति, शिक्षा और विज्ञान में सहयोग।
- तीन बुराइयाँ: आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से उनके सभी रूपों में मिलकर लड़ना, और साथ में मादक पदार्थों तथा हथियारों की अवैध तस्करी और अन्य अंतर्राष्ट्रीय अपराधों से भी।
- सिद्धांत: राज्यों की संप्रभुता, स्वतंत्रता और प्रादेशिक अखंडता का परस्पर सम्मान, सीमाओं की अनुल्लंघनीयता, अनाक्रमण और आंतरिक मामलों में अहस्तक्षेप।
- भाषाएँ: रूसी और चीनी SCO की आधिकारिक और कामकाजी भाषाएँ हैं।
इनमें से दो बातें भारत से सीधे जुड़ी हैं। प्रादेशिक अखंडता का सिद्धांत भारत की उस आपत्ति का आधार है, जो उसके क्षेत्र से गुज़रने वाली संयोजकता परियोजनाओं पर है। भाषा वाले उपबंध से ही अंग्रेज़ी को आधिकारिक भाषा बनाने की भारत की माँग निकलती है, जिसे बिश्केक घोषणा में स्थान मिला।
शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देश 2026: प्रेक्षक और संवाद साझेदार भी
SCO में दस सदस्य देश, दो प्रेक्षक और पंद्रह संवाद साझेदार हैं। भारत और पाकिस्तान जून 2017 में अस्ताना में एक साथ जुड़े, ईरान 4 जुलाई 2023 को भारत की वर्चुअल मेज़बानी वाले सम्मेलन में, और बेलारूस 4 जुलाई 2024 को अस्ताना में दसवाँ सदस्य बना।
| श्रेणी | देश |
|---|---|
| संस्थापक सदस्य (2001) | चीन, कज़ाख़स्तान, किर्गिज़स्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान |
| 2017 से सदस्य | भारत, पाकिस्तान (2017); ईरान (2023); बेलारूस (2024) |
| प्रेक्षक | अफ़ग़ानिस्तान, मंगोलिया |
| संवाद साझेदार | अज़रबैजान, आर्मेनिया, कंबोडिया, लाओस, नेपाल, तुर्किये, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, मालदीव, बहरीन, म्यांमार, मिस्र, सऊदी अरब, क़तर |
सदस्य देश मिलकर विश्व के कम से कम 24 प्रतिशत और यूरेशिया के लगभग 65 प्रतिशत क्षेत्रफल पर फैले हैं, और विश्व की 42 प्रतिशत जनसंख्या यहीं रहती है। विश्व उत्पादन में इनका हिस्सा बाज़ार मूल्यों पर लगभग 23 प्रतिशत (2024) और क्रय शक्ति समता पर लगभग 36 प्रतिशत है। अर्थात् यह समूह जितना जनसंख्या में बड़ा है, उतना धन में नहीं।
SCO का संस्थागत ढाँचा: परिषदें, सचिवालय और RATS
राष्ट्राध्यक्षों की परिषद और SCO की अन्य परिषदें
SCO का सर्वोच्च निकाय राष्ट्राध्यक्षों की परिषद (Council of Heads of State) है। इसकी बैठक वर्ष में एक बार उस देश में होती है, जिसके पास अध्यक्षता हो; अध्यक्षता सदस्यों के बीच रूसी वर्णमाला के क्रम में बदलती है। इसमें भारत का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री करते हैं।
- शासनाध्यक्षों की परिषद: दूसरा सबसे ऊँचा निकाय, जो हर वर्ष व्यापार, आर्थिक सहयोग और बजट पर मिलता है। इसमें भारत की ओर से प्रायः विदेश मंत्री जाते हैं।
- विदेश मंत्रियों की परिषद: शिखर सम्मेलन से लगभग एक महीना पहले मिलकर परिणाम दस्तावेज़ों के मसौदे तय करती है, इसलिए घोषणा का अधिकांश भाग नेताओं के पहुँचने से पहले ही तय हो जाता है।
- राष्ट्रीय समन्वयकों की परिषद: रोज़ का काम चलाती है और अन्य परिषदों की बैठकें तैयार करती है; भारत के समन्वयक विदेश मंत्रालय में अपर सचिव (SCO) हैं।
- मंत्रिस्तरीय बैठकें: रक्षा, अर्थव्यवस्था और व्यापार, परिवहन, संस्कृति, स्वास्थ्य, न्याय, आपात स्थितियाँ, और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषदों के सचिव, आदि।
कुल मिलाकर SCO में 29 चार्टर निकाय और 40 से अधिक कार्य-तंत्र हैं, जो पूरे वर्ष मिलते रहते हैं। सदस्यों में मतभेद होने पर भी ये नियमित माध्यम उन्हें बात करते रखते हैं, जो पड़ोसियों के बीच अचानक संकट में काम आ सकता है।
शंघाई सहयोग संगठन का मुख्यालय: बीजिंग में सचिवालय, ताशकंद में RATS
SCO के दो स्थायी निकाय हैं: बीजिंग में सचिवालय, और ताशकंद में क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (Regional Anti-Terrorist Structure, RATS) की कार्यकारी समिति। ये परिषदों के निर्णय लागू करते हैं। महासचिव, कज़ाख़स्तान के नुरलान येरमेकबायेव, ने जनवरी 2025 में तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए पद सँभाला। SCO 2005 से संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रेक्षक भी है।
RATS बल से नहीं, सूचना से काम करती है। यह उन व्यक्तियों और संगठनों का डेटाबेस रखती है, जिन्हें सदस्य देशों ने आतंकवादी, अलगाववादी या उग्रवादी घोषित किया है, और सदस्यों के बीच खुफ़िया सूचना का समन्वय करती है। भारत SCO के आतंकवाद-रोधी अभ्यासों में भी भाग ले चुका है: 22 से 29 अगस्त 2018 तक रूस के चेबरकुल में पीस मिशन अभ्यास में 200 भारतीय सैनिक गए, जो सदस्यता के बाद भारत का पहला अभ्यास था, और फिर 2021 में।
नए SCO केंद्र और SCO विकास बैंक का प्रस्ताव
संगठन नया तंत्र जोड़ रहा है। 31 अगस्त और 1 सितंबर 2025 के तियानजिन सम्मेलन में सदस्यों ने संगठित अपराध और साइबर तथा सूचना ख़तरों के विरुद्ध सुरक्षा चुनौतियों और ख़तरों का सामना करने वाला एक SCO सार्वभौमिक केंद्र बनाने पर सहमति दी, और मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध खुफ़िया सूचना साझा करने और संयुक्त अभियानों के लिए SCO मादक पदार्थ-रोधी केंद्र को स्वीकृति दी।
वित्त के क्षेत्र में, संयुक्त परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए SCO अंतर-बैंक संघ अक्टूबर 2005 से है, और अब SCO विकास बैंक (SCO Development Bank) बनाने की घोषणा हो चुकी है। स्थानीय मुद्राओं में अधिक व्यापार की नेताओं की माँग के साथ, यह अमेरिका के नेतृत्व वाली आर्थिक व्यवस्था के सामने समूह का एक उत्तर है।
भारत और SCO: प्रेक्षक से पूर्ण सदस्य तक
शंघाई सहयोग संगठन में भारत कब शामिल हुआ: 2005 से 2017 तक
भारत जून 2017 में अस्ताना में शंघाई सहयोग संगठन का पूर्ण सदस्य बना, उसी सम्मेलन में जिसमें पाकिस्तान, और इस प्रवेश में बारह वर्ष लगे। जुलाई 2005 के अस्ताना सम्मेलन में भारत, ईरान और पाकिस्तान प्रेक्षक बने थे, और जुलाई 2015 में रूस के उफ़ा में सदस्यों ने भारत को शामिल करने का निर्णय लिया। भारत रूस के समर्थन से आया, जैसे पाकिस्तान चीन के समर्थन से, और तब से भारत चीन और पाकिस्तान, दोनों के साथ एक सुरक्षा समूह में बैठता है।
भारत की रुचि विचारधारा से नहीं, भूगोल से है। हाइड्रोकार्बन से समृद्ध और रूस, चीन, अफ़ग़ानिस्तान तथा पाकिस्तान से घिरा मध्य एशिया बाहरी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र बन गया है, और भारत तथा ताजिकिस्तान के बीच केवल अफ़ग़ानिस्तान का संकरा वाखान गलियारा है।
श्री मोदी ने 2015 में पाँचों मध्य एशियाई देशों की यात्रा की। इस क्षेत्र से भारत का माल व्यापार 2010 के 50 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2025 में 2 अरब डॉलर से अधिक हो गया, जबकि 2025 में चीन-मध्य एशिया व्यापार 106 अरब डॉलर पहुँचा। 2022 के गणतंत्र दिवस पर भारत ने पाँचों मध्य एशियाई नेताओं को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया, जिससे भारत-मध्य एशिया संवाद बना, पर भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन 2022 के बाद से नहीं हुआ।
भारत की SCO अध्यक्षता और SECURE SCO ढाँचा
भारत दोनों मुख्य परिषदों की अध्यक्षता कर चुका है। 30 नवंबर 2020 को वर्चुअल रूप में हुई शासनाध्यक्षों की 19वीं परिषद की अध्यक्षता उपराष्ट्रपति ने की; यह भारत की अध्यक्षता में पहली शिखर-स्तरीय बैठक थी। इसके बाद 17 सितंबर 2022 को समरकंद से भारत को राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की अध्यक्षता मिली, और उसने 4 जुलाई 2023 का वर्चुअल सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें ईरान को सदस्यता मिली।
अध्यक्ष के रूप में भारत ने अपनी प्राथमिकताएँ SECURE SCO के रूप में रखीं: सुरक्षा (Security), आर्थिक विकास (Economic development), संयोजकता (Connectivity), एकता (Unity), संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता का सम्मान (Respect) तथा पर्यावरण संरक्षण (Environmental protection)। इसकी अध्यक्षता में 130 से अधिक बैठकें और आयोजन हुए, जिनमें 14 मंत्रिस्तरीय थे। भारत ने काम के पाँच नए क्षेत्र भी खोले: स्टार्ट-अप और नवाचार, पारंपरिक चिकित्सा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, युवा सशक्तीकरण, और साझा बौद्ध विरासत। वाराणसी 2022-23 के लिए पहली SCO सांस्कृतिक और पर्यटन राजधानी बनी।
SCO में भारत का दाँव: बजट हिस्सा, पद और मध्य एशिया संयोजकता
भारत SCO के वार्षिक बजट का 5.9 प्रतिशत देता है और उसके पास दो निर्धारित पद हैं: बीजिंग के सचिवालय में एक उप महासचिव, और ताशकंद में RATS मुख्यालय में एक रेफ़रेंट। इनसे भारत को वर्ष में एक बार की बैठक ही नहीं, संगठन के काम पर लगातार दृष्टि मिलती है।
भारत की असली बाधा पहुँच की है। पाकिस्तान से बचकर मध्य एशिया तक कोई स्थल मार्ग न होने से भारत ईरान से होकर जाने वाली दो परियोजनाओं पर निर्भर है।
- अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (INSTC): भारत, ईरान, अज़रबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के बीच माल ढुलाई के लिए समुद्र, रेल और सड़क मार्गों का 7,200 किमी लंबा नेटवर्क। इस पर 16 मई 2002 को भारत, ईरान और रूस ने सहमति दी थी, और अनुमान है कि यह स्वेज़ नहर वाले मार्ग से 30 प्रतिशत सस्ता और 40 प्रतिशत छोटा है।
- चाबहार: 2016 के एक समझौते के अंतर्गत भारत शहीद बेहेश्ती बंदरगाह पर एक बर्थ का नवीनीकरण और 600 मीटर की कंटेनर सुविधा का निर्माण कर रहा है। यह बंदरगाह पाकिस्तान के कराची से 800 किमी अधिक अफ़ग़ान सीमा के निकट है, और भारत को अफ़ग़ानिस्तान से व्यापार का ऐसा मार्ग देता है जो पाकिस्तान से होकर नहीं जाता।
दोनों मार्ग ईरान से होकर जाते हैं, इसलिए ईरान पर युद्ध और होर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी मध्य एशिया तक भारत की पहुँच पर सीधा असर डालते हैं। यह नाकेबंदी उन चिंताओं में थी, जो श्री मोदी ने बिश्केक में ईरान के राष्ट्रपति के सामने रखीं।
बिश्केक में भारत का SCO एजेंडा: सुरक्षा, संयोजकता और अवसर
सुरक्षा स्तंभ: आतंकवाद के पूरे तंत्र को नष्ट करना
श्री मोदी ने सुरक्षा, संयोजकता और अवसर का भारत का दृष्टिकोण पहली बार 2025 में तियानजिन में रखा था; बिश्केक में उन्होंने कहा कि अब इसे ठोस परिणामों में बदलने का समय है। आतंकवाद पर उन्होंने कहा कि SCO क्रिया-प्रतिक्रिया वाले दृष्टिकोण पर नहीं रुक सकता, और उसे आतंकी वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरीकरण और सुरक्षित पनाहगाहों के पूरे तंत्र को नष्ट करना होगा।
उन्होंने सदस्यों से एक स्वर में बोलने को कहा, बिना दोहरे मानदंडों के, और उन देशों को कड़ा संदेश देने को कहा जो आतंकवाद को नीति के साधन की तरह इस्तेमाल करते हैं और आतंकियों को पनाह देते हैं: आतंकवाद कभी किसी की सामरिक संपत्ति नहीं हो सकता। यह पाकिस्तान की ओर स्पष्ट संकेत था, और यह उसी समय आया जब पाकिस्तान SCO की अध्यक्षता सँभाल रहा था।
- अफ़ग़ानिस्तान में शांति: शांतिपूर्ण यूरेशिया, अफ़ग़ानिस्तान की शांति से जुड़ा है, जहाँ भारत विकास और मानवीय सहायता देता है और देता रहेगा।
- पश्चिम एशिया का युद्ध: इस युद्ध ने ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं पर चोट की है, और सबसे अधिक बोझ ग्लोबल साउथ पर पड़ा है; संघर्ष युद्धभूमि पर नहीं, संवाद और कूटनीति से सुलझने चाहिए।
- मादक पदार्थ: नशीले पदार्थों की तस्करी केवल अपराध नहीं, युवाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा है; इसीलिए नए SCO केंद्रों को व्यवहार में काम करना होगा।
संयोजकता स्तंभ: संप्रभुता, CPEC पर आपत्ति और सीमा-शुल्क
भारत ऐसी संयोजकता का समर्थन करता है जो बाज़ारों को जोड़े और व्यापार खोले, पर उसकी शर्त है कि वह सभी देशों की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता का सम्मान करे; श्री मोदी ने इसे SCO चार्टर की मूल भावना कहा। आपत्ति चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (China-Pakistan Economic Corridor, CPEC) पर है, जो चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का भाग है और गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर जाता है, जिसे भारत अपना क्षेत्र मानता है।
आपत्ति को चार्टर पर टिकाने से एक द्विपक्षीय विवाद उस पाठ का प्रश्न बन जाता है, जिस पर हर सदस्य ने हस्ताक्षर किए हैं। श्री मोदी ने संयोजकता का अर्थ सड़कों, रेल और हवाई गलियारों से आगे बढ़ाकर सरल सीमा-शुल्क, डिजिटल दस्तावेज़ों और कुशल लॉजिस्टिक्स तक भी फैलाया।
अवसर स्तंभ: युवा, स्टार्ट-अप और सभ्यतागत संवाद मंच
तीसरा स्तंभ इस प्रश्न का है कि लाभ किसे मिले। श्री मोदी ने कहा कि SCO का सहयोग केवल सरकार-केंद्रित नहीं, जन-केंद्रित होना चाहिए, और उसे इस पर मापा जाना चाहिए कि वह युवाओं के लिए कितने अवसर बनाता है, उद्यमियों के लिए कितने बाज़ार खोलता है, किसानों तक कितनी प्रौद्योगिकी पहुँचाता है और कितने जीवन सुधारता है। उन्होंने युवाओं पर किर्गिज़स्तान के ध्यान का स्वागत किया और भारत के अपने मंच गिनाए: SCO स्टार्ट-अप फ़ोरम, युवा लेखक सम्मेलन (Young Authors' Conclave) और युवा वैज्ञानिक फ़ोरम (Young Scientists' Forum)।
| भारत के नेतृत्व या समर्थन वाली पहल | यह क्या है |
|---|---|
| SCO चार्टर में अंग्रेज़ी को आधिकारिक भाषा बनाना | एक संरचनात्मक परिवर्तन: चार्टर में अभी केवल रूसी और चीनी हैं |
| SCO सभ्यतागत संवाद मंच | भारत ने 2025 में प्रस्तावित किया; इसका पहला सत्र 2026 में भारत में होना है |
| युवा वैज्ञानिक फ़ोरम | युवाओं का मंच, जो भारत की 2020 की अध्यक्षता में शुरू हुए काम को आगे बढ़ाता है |
| युवा लेखक सम्मेलन | युवाओं और संस्कृति का मंच |
SCO में भारत की चुनौतियाँ और इस्लामाबाद 2027 की राह
आम सहमति, चीन-पाकिस्तान जोड़ी और पाकिस्तान की अध्यक्षता
SCO के भीतर चीन-पाकिस्तान की जोड़ी के सामने वार्ता करना भारत के लिए कठिन है, पर ज़रूरी भी। आम सहमति से भारत अपनी आतंकवाद वाली भाषा रिकॉर्ड में रखवा पाता है, पर घोषणा किसी सदस्य का नाम नहीं ले सकती, और अपने-आप किसी सदस्य का आचरण नहीं बदलती। इसी तरह, चार्टर का संप्रभुता सिद्धांत हर सदस्य मानता है, फिर भी चीन और पाकिस्तान यह नहीं मानते कि CPEC उसका उल्लंघन करता है।
- पाकिस्तान की अध्यक्षता: 2026-27 का एजेंडा पाकिस्तान तय करेगा और अगला शिखर सम्मेलन इस्लामाबाद में होगा। भारत ने अभी नहीं बताया कि वह किस स्तर पर जाएगा; 2024 में शासनाध्यक्षों की बैठक के लिए विदेश मंत्री इस्लामाबाद गए थे, पर उसके बाद पहलगाम, ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि के निर्णय ने संबंधों को और कठोर कर दिया है।
- बदला हुआ पड़ोस: ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता से, और सऊदी अरब तथा तुर्किये के साथ एक नए सुरक्षा समझौते से पाकिस्तान को कूटनीतिक स्थान मिला है।
- चीन का भार: मध्य एशिया का चीन से व्यापार भारत के व्यापार से कहीं बड़ा है, और सदस्यों ने BRI को यूरेशियाई आर्थिक संघ से जोड़ने का समर्थन किया, जिसे भारत अस्वीकार करता है।
- बाहर से दबाव: अमेरिकी शुल्कों, ईरान पर युद्ध और रूस पर प्रतिबंधों ने पूरे समूह में आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा तथा संयोजकता को हानि पहुँचाई है।
भारत के लिए SCO अब भी क्यों महत्त्वपूर्ण है
SCO उन गिने-चुने मंचों में है, जहाँ भारत चीन, रूस, ईरान और मध्य एशियाई देशों से एक साथ बात कर सकता है। गलवान के बाद भारत और चीन का फिर से संवाद तब शुरू हुआ, जब 2024 के कज़ान ब्रिक्स सम्मेलन में श्री मोदी श्री शी से मिले। 2025 में तियानजिन में दोनों ने सीमा परिसीमन पर "अर्ली हार्वेस्ट" प्रस्ताव पर और तीन स्थानों से सीमा व्यापार फिर शुरू करने पर सहमति दी, जबकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया था।
यह मंच भारत के अन्य लक्ष्य भी साधता है। इसके साथ-साथ हुई बैठकों से श्री मोदी ब्रिक्स सम्मेलन से पहले ईरान और रूस से मिल सके, और 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एशियाई अस्थायी सीट पर ताजिकिस्तान से भारत की प्रतिस्पर्धा में मध्य एशियाई मत महत्त्वपूर्ण हैं। चीन पर बहुत निर्भर किर्गिज़स्तान और उसके पड़ोसियों के लिए भारत और SCO एक मूल्यवान संतुलन देते हैं।
UPSC के लिए SCO: पाठ्यक्रम से जुड़ाव और परीक्षा के कोण
UPSC पाठ्यक्रम में SCO: सामान्य अध्ययन II, क्षेत्रीय समूह
SCO सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II में आता है, भारत से जुड़े या उसके हितों को प्रभावित करने वाले क्षेत्रीय और वैश्विक समूहों तथा समझौतों में, और महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं, उनकी संरचना और अधिदेश में। आतंकी वित्तपोषण से मादक पदार्थों तक, इसका सुरक्षा एजेंडा सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III तक भी पहुँचता है, और राज्य लोक सेवा आयोगों की परीक्षाएँ भी यही तथ्य पूछती हैं।
- प्रारंभिक परीक्षा के तथ्य: 15 जून 2001 को स्थापना; 1996 का शंघाई फाइव; दस सदस्य, दो प्रेक्षक और पंद्रह संवाद साझेदार; आधिकारिक भाषाएँ रूसी और चीनी; बीजिंग में सचिवालय और ताशकंद में RATS; 2005 में भारत को प्रेक्षक का दर्जा और 2017 में सदस्यता।
- मुख्य परीक्षा का विश्लेषण: SCO के लक्ष्य और भारत के हित, आम सहमति वाले निकाय में प्रतिद्वंद्विता सँभालना, चार्टर पर टिकी CPEC की आपत्ति, ईरान से होकर मध्य एशिया की संयोजकता।
- सामयिक तथ्य: बिश्केक, 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026; 2026-27 के लिए पाकिस्तान की अध्यक्षता; बिश्केक घोषणा में भारत की चार पहलें।
विगत वर्षों के प्रश्न: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा इस लेख को पढ़ने के बाद आप यूपीएससी के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिख सकेंगे। हर प्रश्न के साथ एक खुलने वाली रूपरेखा है, जो बताती है कि परीक्षा में उसे कैसे हल करें।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2021, सामान्य अध्ययन-IIएस० सी० ओ० के लक्ष्यों और उद्देश्यों का विश्लेषणात्मक परीक्षण कीजिए। भारत के लिए इसका क्या महत्त्व है?
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: SCO का परिचय दें: शंघाई फाइव से 15 जून 2001 को स्थापित, आज दस सदस्य, दो पर्यवेक्षक और पंद्रह संवाद साझेदार, और विश्व की 42 प्रतिशत जनसंख्या।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- चार्टर के लक्ष्य: परस्पर विश्वास और अच्छा पड़ोस, आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मिलकर लड़ना, क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान, तथा व्यापार, ऊर्जा, परिवहन और संस्कृति में सहयोग।
- उपलब्धियाँ: RATS और उसका डेटाबेस, पीस मिशन अभ्यास, 2025 के सुरक्षा और मादक-पदार्थ-रोधी केंद्र, अंतर-बैंक संघ और प्रस्तावित SCO विकास बैंक।
- सीमाएँ: आम सहमति के कारण किसी सदस्य का नाम नहीं लिया जा सकता; भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन प्रतिद्वंद्विता; कोई सामूहिक रक्षा नहीं; केवल रूसी और चीनी आधिकारिक भाषाएँ।
- भारत के लिए महत्त्व: मध्य एशिया तक पहुँच, आतंकवाद-रोधी सहयोग, चीन और रूस से संवाद का मार्ग (कज़ान 2024, तियानजिन 2025), और अपने प्रस्तावों के लिए मंच, जैसे 2026 के बिश्केक घोषणापत्र में भारत की पहलें।
निष्कर्ष: निष्कर्ष में लिखें कि SCO के लक्ष्य उसकी उपलब्धियों से आगे हैं, फिर भी भारत के लिए इस मंच के भीतर रहना बाहर रहने से अधिक मूल्यवान है।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2023, सामान्य अध्ययन-II'संघर्ष का विषाणु एस.सी.ओ. के कामकाज को प्रभावित कर रहा है' उपरोक्त कथन के आलोक में समस्याओं को कम करने में भारत की भूमिका बताइये।
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: लिखें कि परस्पर विश्वास पर बने SCO में आज प्रतिद्वंद्वी सदस्य (भारत और पाकिस्तान, भारत और चीन) भी हैं, और युद्ध या प्रतिबंध झेल रहे सदस्य (ईरान, रूस) भी।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- संघर्ष का विषाणु: आम सहमति किसी सदस्य का नाम लेने से रोकती है; 2026-27 में पाकिस्तान की अध्यक्षता; CPEC विवाद; ईरान पर युद्ध और होर्मुज़ की नाकेबंदी से ऊर्जा और संपर्क पर चोट।
- सुरक्षा पर भारत की भूमिका: दोहरे मानदंड नहीं, आतंकवाद के पूरे तंत्र को नष्ट करना, नए SCO केंद्रों को व्यवहार में प्रभावी बनाने की माँग।
- संघर्ष पर भारत की भूमिका: युद्धभूमि नहीं, संवाद और कूटनीति; बिश्केक में ईरान और रूस से भेंट; कज़ान और तियानजिन में चीन से फिर संवाद।
- सहयोग पर भारत की भूमिका: SECURE ढाँचा, स्टार्ट-अप, युवा और सभ्यतागत संवाद मंच, चार्टर में अंग्रेज़ी।
निष्कर्ष: निष्कर्ष में लिखें कि भारत SCO के संघर्षों को मिटा नहीं सकता, पर विवादों को चार्टर के सिद्धांतों और सहयोग में बदलकर संगठन को चलाए रखता है।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2024, सामान्य अध्ययन-IIमध्य एशियाई गणराज्यों (C.A.R.s) के साथ भारत के विकसित होते राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिये, तथा क्षेत्रीय और वैश्विक भूराजनीति में उनके बढ़ते महत्त्व पर प्रकाश डालिये।
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: मध्य एशिया को भारत के विस्तारित पड़ोस के रूप में बताएँ: रूस और चीन के बीच स्थलरुद्ध, और भारत से केवल वाखान गलियारे द्वारा अलग।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- राजनीतिक: 2015 में प्रधानमंत्री की पाँचों देशों की यात्रा; भारत-मध्य एशिया संवाद; SCO सदस्यता; 2026 में उज़्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा; सुरक्षा परिषद की सीट के लिए समर्थन।
- आर्थिक: व्यापार 2010 के 50 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2025 में 2 अरब डॉलर से अधिक, पर चीन के 106 अरब डॉलर से बहुत पीछे; ईरान से होकर INSTC और चाबहार के मार्ग।
- रणनीतिक: RATS के माध्यम से आतंकवाद-रोधी सहयोग; अफ़ग़ानिस्तान; चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन।
- सीमाएँ: पाकिस्तान से बचकर कोई स्थल मार्ग नहीं; ईरान पर युद्ध और होर्मुज़ की नाकेबंदी; 2022 के बाद से भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन नहीं हुआ।
निष्कर्ष: निष्कर्ष में लिखें कि संबंध इरादे में बढ़ रहे हैं पर क्रियान्वयन में पीछे हैं, और ईरान से होकर संपर्क ही तय करेगा कि वे कितनी दूर जा सकते हैं।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2025भारत, अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (INSTC), जो एक बहु-मोडल परिवहन कॉरिडोर है, के संस्थापक सदस्यों में से एक है। यह कॉरिडोर किन्हें जोड़ेगा?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: चरण 1: कॉरिडोर का नाम उत्तर-दक्षिण है और यह भारत से ईरान होकर जाता है। चरण 2: वहाँ से माल मध्य एशिया, रूस और यूरोप तक जाता है। अतः भारत से मध्य एशिया से यूरोप, ईरान होते हुए।
इस भ्रम से बचें: चीन, बांग्लादेश और म्यांमार दूसरे गलियारों के हैं; INSTC का प्रवेश-द्वार ईरान है।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) भारत से मध्य एशिया से यूरोप, ईरान होते हुए: सही। ईरान प्रवेश-द्वार है, जहाँ से मार्ग मध्य एशिया, रूस और यूरोप तक जाते हैं।
- (b) भारत से मध्य एशिया, चीन होते हुए: गलत। INSTC चीन से होकर नहीं जाता।
- (c) भारत से दक्षिण-पूर्व एशिया, बांग्लादेश और म्यांमार होते हुए: गलत। यह पूर्व की ओर के गलियारों का वर्णन है, INSTC का नहीं।
- (d) भारत से यूरोप, अज़रबैजान होते हुए: गलत। अज़रबैजान इस नेटवर्क का भाग है, पर मार्ग ईरान होकर जाता है।
उत्तर: भारत से मध्य एशिया से यूरोप, ईरान होते हुए: विकल्प (a), आधिकारिक उत्तर।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2017भारत द्वारा चाबहार बंदरगाह विकसित करने का क्या महत्त्व है?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: चरण 1: चाबहार दक्षिण-पूर्वी ईरान में, अरब सागर के तट पर है। चरण 2: भारत के लिए इसका उद्देश्य अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया तक ऐसा मार्ग है जो पाकिस्तान से बचकर निकले। अतः विकल्प (c)।
इस भ्रम से बचें: अफ़्रीका से व्यापार और अरब तेल-उत्पादकों से संबंध, चाबहार बनाने का कारण नहीं हैं।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) अफ़्रीकी देशों से व्यापार में अपार वृद्धि: गलत। यह बंदरगाह अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया की ओर खुलता है, अफ़्रीका की ओर नहीं।
- (b) तेल-उत्पादक अरब देशों से संबंध सुदृढ़: गलत। चाबहार ईरान में है, और इसका उद्देश्य पहुँच है, खाड़ी की कूटनीति नहीं।
- (c) अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया में पहुँच के लिए पाकिस्तान पर निर्भरता नहीं: सही। यही इस बंदरगाह का उद्देश्य है।
- (d) पाकिस्तान, इराक और भारत के बीच गैस पाइपलाइन को सुकर बनाएगा और उसकी सुरक्षा करेगा: गलत। बंदरगाह का ऐसी पाइपलाइन से कोई संबंध नहीं, और इसका उद्देश्य ही पाकिस्तान से बचना है।
उत्तर: पाकिस्तान के बिना अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच: विकल्प (c), आधिकारिक उत्तर।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2007 (हिंदी रूपांतर)निम्नलिखित में से कौन-सा एक शंघाई सहयोग संगठन का सदस्य नहीं है?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: चरण 1: रूस, कज़ाख़स्तान और उज़्बेकिस्तान 2001 के संस्थापक सदस्य हैं। चरण 2: यूक्रेन कभी SCO का भाग नहीं रहा। अतः यूक्रेन।
इस भ्रम से बचें: चारों देश पूर्व सोवियत गणराज्य हैं; इन्हें केवल SCO की सदस्यता अलग करती है।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) रूस: गलत। रूस संस्थापक सदस्य है।
- (b) कज़ाख़स्तान: गलत। कज़ाख़स्तान संस्थापक सदस्य है।
- (c) यूक्रेन: सही। यूक्रेन SCO का न सदस्य है, न पर्यवेक्षक, न संवाद साझेदार।
- (d) उज़्बेकिस्तान: गलत। उज़्बेकिस्तान 2001 में जुड़ा, जिससे शंघाई फाइव, शंघाई सिक्स बना।
उत्तर: यूक्रेन: विकल्प (c), आधिकारिक उत्तर।
स्रोत
- PIB: Prime Minister participates in the 26th SCO Summit in Bishkek, Kyrgyz Republic (1 September 2026)
- PIB: English translation of the Prime Minister's statement at the 26th SCO Summit (1 September 2026)
- Ministry of External Affairs: Brief on India-SCO Cooperation (3 July 2026)
- Ministry of External Affairs: Charter of the Shanghai Cooperation Organization
- PIB: Curtain raiser, Exercise SCO Peace Mission 2018
- PIB: Indian military contingent in the 6th edition of Exercise SCO Peaceful Mission 2021
- NCERT: Contemporary World Politics (Class XII), Chapter 2, The End of Bipolarity
- United Nations DPPA: Shanghai Cooperation Organization
- The Hindu, Delhi, 28 August 2026: India's return to its Central Asian neighbourhood (op-ed)
- The Hindu, Delhi, 30 August 2026: PM's Central Asia visit (news analysis); PM in Uzbekistan for 2-day visit ahead of SCO summit
- The Hindu, Delhi, 1 September 2026: Ensure peace, freedom of navigation, PM urges Iran; PM calls for 'end of war' at meeting with Putin
- The Hindu, Delhi, 2 September 2026: SCO must dismantle terror ecosystem: PM; Xi urges SCO member states to make security a key priority; Water must never be weaponised, says Sharif
- The Hindu, Delhi, 4 September 2026: Forging consensus (editorial)
- The Hindu, Delhi, 6 September 2026: Shanghai Cooperation Organisation, the house of multilaterals
- Wikipedia: Shanghai Cooperation Organisation
- Wikipedia: 2026 Bishkek SCO summit
- Wikipedia: Regional Anti-Terrorist Structure
- Wikipedia: SCO Interbank Consortium
- Wikipedia: International North–South Transport Corridor
- Wikipedia: Chabahar Port
- Wikipedia: China–Pakistan Economic Corridor
- UPSC: Civil Services Examination question papers
संपादकीय अस्वीकरण
यह लेख PIB की विज्ञप्तियों, विदेश मंत्रालय के विवरण, SCO चार्टर और इस पृष्ठ पर दिए गए अन्य स्रोतों पर आधारित है।
