परिचय
भारत की 45वीं संपत्ति
सारनाथ वाराणसी के निकट का वह मृगदाव है जहाँ बुद्ध ने पहला उपदेश दिया। 25 जुलाई 2026 को यह "सारनाथ का प्राचीन बौद्ध स्थल" नाम से यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में अंकित हुआ और भारत की 45वीं विश्व धरोहर संपत्ति बना। इसके स्तूप, विहार और अशोक स्तंभ लगभग सोलह शताब्दियों में फैले हैं।
सारनाथ यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल: जुलाई 2026 का अंकन
बुसान में विश्व धरोहर समिति का 48वाँ सत्र और भारत की 45वीं संपत्ति
25 जुलाई 2026 की शाम दक्षिण कोरिया के बुसान में विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र ने सारनाथ के प्राचीन बौद्ध स्थल को विश्व धरोहर सूची में अंकित किया। इसके साथ भारत की विश्व धरोहर संपत्तियाँ 45 हो गईं, और भारत विश्व में छठे तथा एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दूसरे स्थान पर पहुँचा। एक वर्ष पहले पेरिस में हुए 47वें सत्र में भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य अंकित हुए थे।
सारनाथ के लिए यह लंबी प्रतीक्षा थी। यह स्थल 1998 में भारत की अस्थायी सूची (Tentative List) में आया, और नामांकन जनवरी 2025 में विश्व धरोहर समिति को भेजा गया। इसके बाद अठारह महीने की प्रक्रिया चली, जिसमें यूनेस्को के सलाहकार निकायों के साथ तकनीकी बैठकें हुईं और ICOMOS ने मूल्यांकन मिशन भेजा; ICOMOS ही सांस्कृतिक और मिश्रित संपत्तियों का मूल्यांकन करती है।
सारनाथ के दो घटक और मानदंड (iii) तथा (vi)
यह एक क्रमिक (serial) संपत्ति है, जिसके दो जुड़े हुए घटक हैं: चौखंडी स्तूप, और सारनाथ के पुरातात्त्विक अवशेष, जिनमें धमेख स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंधकुटी विहार और अशोक स्तंभ आते हैं। स्थल दो सांस्कृतिक मानदंडों पर अंकित हुआ।
- मानदंड (iii): बौद्ध तीर्थयात्रा के चार प्रमुख स्थलों में से एक के रूप में सारनाथ का स्थायी आध्यात्मिक महत्त्व, जो सदियों तक यहाँ बनते और फिर से बनते धार्मिक भवनों में दिखता है।
- मानदंड (vi): बुद्ध के जीवन की उन घटनाओं से इसका सीधा संबंध जो बौद्धों के लिए असाधारण महत्त्व रखती हैं, विशेषकर पहला उपदेश और बोधगया में ज्ञान के बाद पहले शिष्यों से भेंट।
इस अंकन के बाद चार प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थलों में से तीन सूची में हैं: नेपाल का लुंबिनी, बोधगया का महाबोधि मंदिर और अब सारनाथ। भारत ने पर्यटन का संधारणीय प्रबंधन करने और बफ़र क्षेत्र में अनियोजित निर्माण रोकने का वचन दिया है, ताकि स्थल की प्रामाणिकता और अखंडता बनी रहे।
सारनाथ कहां है: वाराणसी के निकट मृगदाव और बुद्ध का पहला उपदेश
धर्मचक्र प्रवर्तन: सारनाथ क्यों प्रसिद्ध है
सारनाथ उत्तर प्रदेश में वाराणसी के निकट है। बिहार के बोधगया में पीपल के वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त करने के बाद बुद्ध यहाँ आए और पहली बार उपदेश दिया। बौद्ध परंपरा इस स्थान को ऋषिपतन, इशिपतन और मृगदाव (हिरणों का उद्यान) के नाम से जानती है।
यह उपदेश धर्मचक्र प्रवर्तन, अर्थात् "धर्म के चक्र का प्रवर्तन", कहलाता है। बुद्ध ने इसे अपने पहले पाँच शिष्यों को दिया; इसी से बौद्ध संघ की शुरुआत हुई और अष्टांगिक मार्ग के सिद्धांत स्थापित हुए।
राजाओं, भिक्षुओं और उपासकों ने लगभग सोलह शताब्दियों तक इस स्थान के आसपास निर्माण जारी रखा। यहाँ के स्मारक ईसा पूर्व चौथी-तीसरी शताब्दी के मौर्य-पूर्व काल से बारहवीं शताब्दी ई. तक के हैं, जब सारनाथ का पतन और विनाश हुआ; इसके बाद अठारहवीं शताब्दी में पुनः खोज तक स्थल गुमनाम रहा।
धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप और सारनाथ स्तूप: स्थल के स्मारक
स्तूप का अर्थ है टीला। प्रायः इसके भीतर एक छोटी पेटिका रखी जाती है, जिसे धातु-मंजूषा (relic casket) कहते हैं, और जिसमें बुद्ध या उनके अनुयायियों के शरीर के अवशेष या उनकी प्रयोग की हुई वस्तुएँ होती हैं। सारनाथ के स्तूप पहले उपदेश से जुड़ी घटनाओं की स्मृति हैं।
- धमेख स्तूप: सारनाथ की सबसे विशाल संरचना, ईंट और पत्थर का ठोस बेलन, जिसकी ऊँचाई 43.6 मीटर और व्यास 28 मीटर है। इसके पत्थर के आवरण पर गुप्त काल की बारीक फूल-पत्तियाँ उकेरी गई हैं, और इसका समय पाँचवीं-छठी शताब्दी माना जाता है।
- धर्मराजिका स्तूप: जनवरी 1794 में बनारस के राजा के दीवान जगत सिंह के कामगारों ने निर्माण सामग्री के लिए इसे ढहा दिया; भीतर हरे संगमरमर की धातु-मंजूषा मिली, और उसके अवशेष गंगा में बहा दिए गए।
- अशोक स्तंभ: मार्च 1905 के उत्खनन में स्तंभ के आधार और दंड के भाग, उस पर अंकित संघभेद अभिलेख (Schism Edict), सिंह शीर्ष और चक्र के अंश मिले, जिनका समय लगभग 241 से 233 ईसा पूर्व है।
- चौखंडी स्तूप: सातवीं-आठवीं शताब्दी में एक सीढ़ीदार मंदिर के रूप में बना, उस स्थान की स्मृति में जहाँ बोधगया से आते बुद्ध अपने पहले शिष्यों से मिले; इसकी अष्टकोणीय मीनार बाद में मुगल शासक हुमायूँ की यात्रा की याद में जोड़ी गई।
यात्रियों ने स्थल को उसके उत्कर्ष पर देखा। लगभग 640 ई. में आए ह्वेनसांग ने सैकड़ों छोटे देवालय और मनौती स्तूप, बुद्ध की बड़ी प्रतिमा वाला लगभग 61 मीटर ऊँचा विहार, और सम्मितीय संप्रदाय के लगभग 1,500 भिक्षु देखे।
सारनाथ अशोक स्तंभ, सिंह शीर्ष और सारनाथ मूर्तिकला शैली
सारनाथ अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष, राष्ट्रीय प्रतीक और सारनाथ शैली
पहले उपदेश की स्मृति में अशोक का बनवाया सिंह शीर्ष मौर्य मूर्तिकला परंपरा का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके मूल रूप में पाँच भाग थे: स्तंभ का दंड, कमल के आकार का घंटी आधार, उस पर एक ढोल जिस पर चार पशु दक्षिणावर्त चलते दिखते हैं, पीठ से पीठ सटाए बैठे चार भव्य सिंह, और शीर्ष पर धर्मचक्र, जो अब टूटी अवस्था में स्थल संग्रहालय में है।
गोल फलक पर अश्व, वृषभ, सिंह और हाथी तेज़ गति में उकेरे गए हैं, और सिंहों के चेहरे की मांसपेशियाँ प्रकृति के बारीक अवलोकन को दिखाती हैं। स्वतंत्र भारत ने शीर्ष के चक्र और कमल आधार को छोड़कर इसे राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया; स्वयं शीर्ष सारनाथ के पुरातत्त्व संग्रहालय में रखा है।
सारनाथ के नाम पर बौद्ध मूर्तिकला की एक शैली भी है। पाँचवीं शताब्दी ई. के उत्तरार्ध की बैठी हुई बुद्ध प्रतिमा चुनार के बलुआ पत्थर में बनी है और स्थल संग्रहालय में है। बुद्ध पद्मासन में धम्मचक्रप्रवर्तन मुद्रा में बैठे हैं, और आसन के नीचे बीच में चक्र तथा दोनों ओर हिरण पहले उपदेश की याद दिलाते हैं।
इस शैली की पहचान है पतला और सुगठित शरीर, कोमल और लयबद्ध रेखाएँ, और शरीर से चिपका पारदर्शी वस्त्र। इस प्रकार की अनेक खड़ी बुद्ध प्रतिमाएँ कभी धर्मराजिका स्तूप के चारों ओर थीं और अब सारनाथ संग्रहालय में हैं।
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भारत: 45 संपत्तियाँ और चयन की प्रक्रिया
विश्व धरोहर अभिसमय, 1972 और वैश्विक सूची
यूनेस्को ने 1972 में विश्व सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण संबंधी अभिसमय अपनाया, जो उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य वाले स्थलों को वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए बचाता है; अक्टूबर 2024 तक 196 पक्षकार राज्यों ने इसका अनुसमर्थन किया था। जुलाई 2026 तक सूची में 173 देशों की 1,273 संपत्तियाँ थीं: 991 सांस्कृतिक, 240 प्राकृतिक और 42 मिश्रित।
- पहला चरण: कोई देश पहले स्थल को अपनी अस्थायी सूची में रखता है, जो अनिवार्य पहला चरण है; भारत की अस्थायी सूची में 69 संपत्तियाँ हैं।
- नामांकन और मूल्यांकन: नामांकन दस्तावेज़ का मूल्यांकन एक सलाहकार निकाय करता है; सांस्कृतिक और मिश्रित संपत्तियों के लिए यह ICOMOS है।
- निर्णय: विश्व धरोहर समिति अपने वार्षिक सत्र में निर्णय करती है, जैसा उसने बुसान में किया।
भारत के सभी 45 विश्व धरोहर स्थल, वर्षवार
भारत की 45 विश्व धरोहर संपत्तियों में 37 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित हैं। पहली चार 1983 में एक साथ अंकित हुईं: आगरा का किला, ताजमहल, और एलोरा तथा अजंता की गुफाएँ।
| वर्ष | संपत्ति | राज्य या संघ राज्यक्षेत्र | प्रकार |
|---|---|---|---|
| 1983 | आगरा का किला; ताजमहल | उत्तर प्रदेश | सांस्कृतिक |
| 1983 | अजंता की गुफाएँ; एलोरा की गुफाएँ | महाराष्ट्र | सांस्कृतिक |
| 1984 | सूर्य मंदिर, कोणार्क | ओडिशा | सांस्कृतिक |
| 1984 | महाबलीपुरम के स्मारक समूह | तमिलनाडु | सांस्कृतिक |
| 1985 | काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान; मानस वन्यजीव अभयारण्य | असम | प्राकृतिक |
| 1985 | केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान | राजस्थान | प्राकृतिक |
| 1986 | खजुराहो के स्मारक समूह | मध्य प्रदेश | सांस्कृतिक |
| 1986 | फ़तेहपुर सीकरी | उत्तर प्रदेश | सांस्कृतिक |
| 1986 | गोवा के गिरजाघर और कॉन्वेंट | गोवा | सांस्कृतिक |
| 1986 | हम्पी के स्मारक समूह | कर्नाटक | सांस्कृतिक |
| 1987 | सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान | पश्चिम बंगाल | प्राकृतिक |
| 1987 | एलिफेंटा की गुफाएँ | महाराष्ट्र | सांस्कृतिक |
| 1987 | पट्टदकल के स्मारक समूह | कर्नाटक | सांस्कृतिक |
| 1987, 2004 | महान जीवंत चोल मंदिर | तमिलनाडु | सांस्कृतिक |
| 1988, 2005 | नंदा देवी और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान | उत्तराखंड | प्राकृतिक |
| 1989 | साँची के बौद्ध स्मारक | मध्य प्रदेश | सांस्कृतिक |
| 1993 | हुमायूँ का मकबरा; कुतुब मीनार और उसके स्मारक | दिल्ली | सांस्कृतिक |
| 1999, 2005, 2008 | भारत के पर्वतीय रेलमार्ग | पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश | सांस्कृतिक |
| 2002 | बोधगया का महाबोधि मंदिर परिसर | बिहार | सांस्कृतिक |
| 2003 | भीमबेटका के शैलाश्रय | मध्य प्रदेश | सांस्कृतिक |
| 2004 | चंपानेर-पावागढ़ पुरातात्त्विक उद्यान; छत्रपति शिवाजी टर्मिनस | गुजरात; महाराष्ट्र | सांस्कृतिक |
| 2007 | लाल किला परिसर | दिल्ली | सांस्कृतिक |
| 2010 | जंतर मंतर, जयपुर | राजस्थान | सांस्कृतिक |
| 2012 | पश्चिमी घाट | कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु | प्राकृतिक |
| 2013 | राजस्थान के पहाड़ी किले | राजस्थान | सांस्कृतिक |
| 2014 | ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान संरक्षण क्षेत्र | हिमाचल प्रदेश | प्राकृतिक |
| 2014 | पाटन की रानी की वाव | गुजरात | सांस्कृतिक |
| 2016 | नालंदा महाविहार का पुरातात्त्विक स्थल | बिहार | सांस्कृतिक |
| 2016 | कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान | सिक्किम | मिश्रित |
| 2016 | ले कार्बूज़िए का स्थापत्य कार्य | चंडीगढ़ | सांस्कृतिक |
| 2017 | ऐतिहासिक नगर अहमदाबाद | गुजरात | सांस्कृतिक |
| 2018 | मुंबई के विक्टोरियन गॉथिक और आर्ट डेको समूह | महाराष्ट्र | सांस्कृतिक |
| 2019 | जयपुर नगर | राजस्थान | सांस्कृतिक |
| 2021 | धोलावीरा: एक हड़प्पा नगर | गुजरात | सांस्कृतिक |
| 2021 | काकतीय रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर | तेलंगाना | सांस्कृतिक |
| 2023 | होयसलों के पवित्र मंदिर समूह | कर्नाटक | सांस्कृतिक |
| 2023 | शांतिनिकेतन | पश्चिम बंगाल | सांस्कृतिक |
| 2024 | मोइदम: अहोम राजवंश की टीला-समाधि प्रणाली | असम | सांस्कृतिक |
| 2025 | भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य | महाराष्ट्र, तमिलनाडु | सांस्कृतिक |
| 2026 | सारनाथ का प्राचीन बौद्ध स्थल | उत्तर प्रदेश | सांस्कृतिक |
भारत की धरोहर का संरक्षण: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, अधिनियम और कार्यक्रम
संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और दो अधिनियम
भारत की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार का शीर्ष निकाय संस्कृति मंत्रालय है। सांस्कृतिक विषयों पर यूनेस्को से भारत का संपर्क यही रखता है, और विश्व धरोहर स्थलों तथा अमूर्त धरोहर के नामांकनों का समन्वय करता है। विश्व धरोहर से जुड़े विषयों की नोडल एजेंसी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) है, जो केंद्र द्वारा संरक्षित 3,688 स्मारकों की देखरेख करता है; इनमें 28 विश्व धरोहर संपत्तियाँ हैं।
- प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958: राष्ट्रीय महत्त्व के स्मारकों का संरक्षण और रखरखाव इसी अधिनियम के अंतर्गत होता है।
- पुरावशेष तथा बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972: यह पुरावशेषों और बहुमूल्य कलाकृतियों का नियमन करता है; दोनों अधिनियमों को ASI लागू करता है।
सारनाथ का अपना अतीत बताता है कि यह क्यों आवश्यक है: 1794 में एक स्तूप निर्माण सामग्री के लिए ढहा दिया गया और उसके अवशेष खो गए, उस समय जब कोई विधि स्थल की रक्षा नहीं करती थी।
पुरावशेषों की वापसी, धरोहर गोद लें और राष्ट्रीय स्मारक एवं पुरावशेष मिशन
- पुरावशेषों की वापसी: भारत 669 पुरावशेष वापस ला चुका है, जिनमें 656 वर्ष 2014 के बाद आए; इनमें चोल काल की शिव नटराज प्रतिमा भी है।
- धरोहर गोद लें (Adopt a Heritage): सितंबर 2017 में शुरू और सितंबर 2023 में नए रूप में आई यह योजना कंपनियों, सार्वजनिक उपक्रमों, गैर-सरकारी संगठनों और न्यासों को संरक्षित स्मारकों पर सुविधाएँ विकसित करने देती है; मार्च 2026 तक 30 समझौता ज्ञापन हुए।
- राष्ट्रीय स्मारक एवं पुरावशेष मिशन: ASI के अंतर्गत चलने वाले इस मिशन ने मार्च 2026 तक 1.84 लाख स्मारकों और 17.20 लाख पुरावशेषों का दस्तावेज़ीकरण किया।
- ज्ञान भारतम मिशन: 2025 में शुरू, भारत की पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण, डिजिटलीकरण और प्रसार के लिए।
UPSC के लिए सारनाथ: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I
UPSC और PCS पाठ्यक्रम में कला, संस्कृति और धरोहर
सारनाथ सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I के भारतीय संस्कृति वाले भाग में आता है, जिसमें प्राचीन से आधुनिक काल तक की कला, साहित्य और स्थापत्य के पक्ष हैं, और बौद्ध धर्म के इतिहास में भी; राज्य लोक सेवा परीक्षाएँ भी इसी धरोहर पर प्रश्न पूछती हैं।
- प्रारंभिक परीक्षा के तथ्य: 25 जुलाई 2026 को बुसान में 48वें सत्र में अंकन; भारत की 45वीं संपत्ति (37 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक, 1 मिश्रित); मानदंड (iii) और (vi); दो घटक, चौखंडी स्तूप और पुरातात्त्विक अवशेष; 1998 से अस्थायी सूची में; चक्र और कमल आधार के बिना सिंह शीर्ष राष्ट्रीय प्रतीक है।
- मुख्य परीक्षा का विश्लेषण: जीवंत परंपरा के रूप में धरोहर, अंकन के साथ आने वाले दायित्व, पर्यटन के दबाव के विरुद्ध संरक्षण, और भारत की सांस्कृतिक कूटनीति में बौद्ध स्थल।
विगत वर्षों के प्रश्न: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा इस लेख को पढ़ने के बाद आप यूपीएससी के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिख सकेंगे। हर प्रश्न के साथ एक खुलने वाली रूपरेखा है, जो बताती है कि परीक्षा में उसे कैसे हल करें।
- यूपीएससी मुख्य परीक्षा 2018, सामान्य अध्ययन-I (हिंदी रूपांतर)भारतीय कला धरोहर की रक्षा करना इस समय की आवश्यकता है। चर्चा कीजिए।
उत्तर-लेखन रूपरेखा
प्रश्न की मांग, प्रमुख तर्क, प्रासंगिक उदाहरण और निष्कर्ष की दिशा। यह पूर्ण मॉडल उत्तर नहीं है।
भूमिका: आरंभ में भारत की कला धरोहर को जीवंत विरासत बताएँ: 45 विश्व धरोहर संपत्तियाँ और केंद्र द्वारा संरक्षित 3,688 स्मारक।
मुख्य भाग (विकसित किए जाने वाले बिंदु):
- अभी क्यों: क्षति और उपेक्षा (1794 में ढहाया गया सारनाथ का धर्मराजिका स्तूप), चोरी और अवैध व्यापार (669 पुरावशेष वापस लाए गए), स्थलों के आसपास पर्यटन और निर्माण का दबाव।
- संस्थाएँ और अधिनियम: नोडल एजेंसी के रूप में ASI; प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958; पुरावशेष तथा बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972।
- कार्यक्रम: बफ़र क्षेत्र और प्रबंधन योजना के साथ विश्व धरोहर नामांकन, धरोहर गोद लें, राष्ट्रीय स्मारक एवं पुरावशेष मिशन, पांडुलिपियों के लिए ज्ञान भारतम।
- कमियाँ: दस्तावेज़ीकरण, धन, स्थानीय भागीदारी और आगंतुक प्रबंधन।
निष्कर्ष: निष्कर्ष में कहें कि धरोहर साझी धरोहर-निधि है; उसकी रक्षा के लिए विधि, संस्थाएँ और समुदाय साथ चाहिए, जैसा सारनाथ का अंकन दिखाता है।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2024 (हिंदी रूपांतर)यूनेस्को द्वारा जारी विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित निम्नलिखित संपत्तियों पर विचार कीजिए:
- शांतिनिकेतन
- रानी की वाव
- होयसलों के पवित्र मंदिर समूह
- बोधगया का महाबोधि मंदिर परिसर
उपर्युक्त में से कितनी संपत्तियाँ 2023 में सम्मिलित की गईं?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: चरण 1: शांतिनिकेतन, 2023: हाँ। चरण 2: पाटन की रानी की वाव, 2014: नहीं। चरण 3: होयसलों के पवित्र मंदिर समूह, 2023: हाँ। चरण 4: महाबोधि मंदिर परिसर, 2002: नहीं। 2023 में दो संपत्तियाँ जुड़ीं।
इस भ्रम से बचें: चारों सूची में हैं; प्रश्न केवल यह पूछता है कि 2023 में कौन-सी आईं।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) केवल एक: गलत। शांतिनिकेतन और होयसल मंदिर, दोनों 2023 में अंकित हुए।
- (b) केवल दो: सही। शांतिनिकेतन और होयसलों के पवित्र मंदिर समूह।
- (c) केवल तीन: गलत। रानी की वाव (2014) और महाबोधि (2002) पहले आए।
- (d) सभी चार: गलत। चार में से केवल दो 2023 के हैं।
उत्तर: केवल दो: विकल्प (b), जो आधिकारिक उत्तर है।
- यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2005 (हिंदी रूपांतर)निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
- चंपानेर-पावागढ़ पुरातात्त्विक उद्यान
- छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन, मुंबई
- मामल्लपुरम
- सूर्य मंदिर (कोणार्क मंदिर)
उपर्युक्त में से कौन-से यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित हैं?
इस प्रश्न को कैसे हल करें
हल करने की विधि: चरण 1: चंपानेर-पावागढ़ पुरातात्त्विक उद्यान: 2004 में अंकित। चरण 2: छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, मुंबई: 2004। चरण 3: मामल्लपुरम (महाबलीपुरम): 1984। चरण 4: कोणार्क का सूर्य मंदिर: 1984। चारों सूची में हैं।
इस भ्रम से बचें: प्रश्न बनते समय 2004 के अंकन नए थे; बाक़ी दो 1984 के हैं।
विकल्पवार व्याख्या:
- (a) 1, 2 और 3: गलत। कोणार्क का सूर्य मंदिर भी सूची में है।
- (b) 1, 3 और 4: गलत। छत्रपति शिवाजी टर्मिनस भी सूची में है।
- (c) 2 और 4: गलत। चंपानेर-पावागढ़ और महाबलीपुरम भी सूची में हैं।
- (d) 1, 2, 3 और 4: सही। चारों विश्व धरोहर संपत्तियाँ हैं।
उत्तर: चारों: विकल्प (d), जो आधिकारिक उत्तर है।
स्रोत
- PIB: Turning the Wheel of Heritage, Sarnath's Path to the World Heritage List (26 August 2026)
- Ministry of Culture: About the Ministry
- NCERT: An Introduction to Indian Art, Part I (Class XI), Chapters 3 and 4
- NCERT: Our Pasts I (Class VI), Chapters 7 and 12
- Wikipedia: Sarnath
- Wikipedia: Dhamek Stupa
- Wikipedia: Chaukhandi Stupa
- The Hindu, Delhi, 26 July 2026: Sarnath added to UNESCO Heritage List
- The Hindu, Delhi, 28 and 29 July 2026: quiz on India's World Heritage sites, with answers
- UPSC: Civil Services Examination question papers
संपादकीय अस्वीकरण
यह लेख PIB की पृष्ठभूमि टिप्पणी, NCERT और इस पृष्ठ पर दिए गए अन्य स्रोतों पर आधारित है।
